परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के साथ सीनाजोरी: इंदौर में पत्रकारों पर जानलेवा हमला, कैमरा तक गायब : खुलासा रोकने के लिए दलालों की खुली गुंडागर्दी
खुलासा फर्स्ट…इंदौर। परिवहन विभाग लंबे समय से भ्रष्टाचार को लेकर विवादों में घिरा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक स्वीकार चुके हैं परिवहन विभाग का भ्रष्टाचार किसी जमाने के चंबल के डाकुओं जैसा है। उ
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
परिवहन विभाग लंबे समय से भ्रष्टाचार को लेकर विवादों में घिरा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक स्वीकार चुके हैं परिवहन विभाग का भ्रष्टाचार किसी जमाने के चंबल के डाकुओं जैसा है। उनकी यह टिप्पणी शुक्रवार को इंदौर स्थित क्षेत्रीय परिवहन (आरटीओ) कार्यालय में सच होती दिखी, जब एक राज्य स्तरीय न्यूज चैनल के संवाददाता और कैमरामैन पर भ्रष्टाचार का खुलासा करते समय दलालों व कर्मचारियों ने सामूहिक हमला कर दिया। न केवल जानलेवा हमला बल्कि घटना के साक्ष्य मिटाने के लिए कैमरा भी गायब कर दिया गया। घायलों की आपबीती सुनकर साफ महसूस हुआ हमला सुनियोजित था।
12 साल से बैठे अधिकारी–कर्मचारी और ‘एवजी साम्राज्य’ का खुला खेल
सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का आरटीओ कार्यालय में वर्षों से भ्रष्टाचार की गंदगी से अटा पड़ा है। करीब 12 वर्ष से एआरटीओ अर्चना मिश्रा मजबूती से जमी हैं, जबकि उनका मूल विभाग परिवहन नहीं है। भ्रष्टाचार की फाइलों को वर्षों से चला रही हैं। इनके साथ काम करने वाला बाबू आरपी गौतम तो दो दशक से जमा है। गौतम ने करीब 40-50 एवजी (बिचौलियों) का संगठित साम्राज्य बना रखा है, जिनके दम पर पूरा कार्यालय ठेके पर चल रहा है। हर काम की तयशुदा रिश्वत इन्हीं एवजीयों के हाथों वसूली जाती है, जिसका रिकॉर्ड पप्पू तांबे रखता है।अधिकारियों को महीने का पैसा पहुंचाने का काम और शाखा प्रभारी बाबूओं को पैसा बांटने की जिम्मेदारी निभाता है। इन काली करतूतों का खुलासा फर्स्ट ने कई बार मय सबूत किया है पर कार्रवाई नाममात्र की भी नहीं हुई।
पूर्व मंत्रियों का टकराव, फर्जी लाइसेंस कांड तक विवादों का अंत नहीं
‘एमपी अजब है गजब है’ टैगलाइन वाला मप्र इन दिनों परिवहन विभाग की वजह से राष्ट्रीय सुर्खियों में है। पहले पूर्व मंत्रियों के आपसी टकराव, फिर एक पूर्व कांस्टेबल के यहां से 54 किलो सोना और 11 करोड़ नकद बरामद होने जैसी घटनाएं और हाल ही में बैकलॉग एंट्री के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने का मामला, विभाग की सड़ांध का खुलासा करने के लिए काफी हैं।
आरटीओ प्रदीप शर्मा की सफाई- सारे काम ऑनलाइन
आरटीओ परिसर दलालों और एवजीओं से हमेशा भरा रहता है। इसके बावजूद RTO प्रदीप शर्मा का दावा है कि यहां सब काम ऑनलाइन होता है और यह कि कार्यालय सार्वजनिक है, किसी को प्रवेश से रोका नहीं जा सकता। उनका कहना है कि आवेदक स्वयं सुविधा के लिए दलालों के पास जाते हैं और उनकी स्वीकृति के बाद ही संबंधित शाखा के बाबू या प्रभारी से काम करवाते हैं पर बड़े सवाल हैं-
-आरटीओ के बाहर बैठने वाले *कितने दलाल अधिकृत हैं और कितने अवैध?
- इन दलालों का कभी पुलिस सत्यापन किया गया?
-क्या कार्यालय परिसर में इनकी अवैध मौजूदगी पर विभाग की कोई निगरानी व्यवस्था* है?
जो हमला हुआ है, वह दर्शाता है इसमें सामान्य दलाल नहीं बल्कि पेशेवर अपराधियों जैसी मनोवृत्ति वाले लोग शामिल थे। रोजमर्रा की दिहाड़ी कमाने वाले लोग इस तरह की हिंसा नहीं करते।
पत्रकारों पर हमला—पहले से रची गई थी साजिश
हमले का शिकार संवाददाता हेमंत शर्मा व कैमरामैन राजा खान शुक्रवार को लाइसेंस शाखा में भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे थे। तभी शाखा प्रभारी बाबू अंकित चिंतामण सहित छह लोगों ने पहले से रची गई साजिश के अनुसार दोनों पर हमला किया। लगभग 30 से 40 लोगों की भीड़ ने घेरकर बेरहमी से पीटा। दोनों किसी तरह मौत के मुंह से बचकर अस्पताल पहुंचे।
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