भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला: ईडी ने अधिकारी पर कसा शिकंजा; एक करोड़ की संपत्ति की अटैच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज करीब 1 करोड़ 6 लाख रुपए की अचल संपत्ति को अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार से अर्जित आय को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए खपाने के आरोपों के तहत की गई है।
ईओडब्ल्यू के केस के बाद ईडी की एंट्री
इससे पहले आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इंदौर ने फरवरी 2025 में राजेश परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया और जांच शुरू की।
किस संपत्ति पर हुई कार्रवाई
ईडी इंदौर के सब-रीजनल ऑफिस द्वारा की गई इस कार्रवाई में परमार और उनके परिवार के नाम दर्ज एक मकान, एक भूखंड, एक फ्लैट और कृषि भूमि को अटैच किया गया है। इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत 1.06 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
आय से 175% ज्यादा कमाई का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वर्ष 2007 से 2022 के बीच राजेश परमार ने करीब 1.66 करोड़ रुपए की आय अर्जित की, जो उनकी वैध आय से लगभग 175 फीसदी अधिक है। आरोप है कि इसी अवैध कमाई का इस्तेमाल कर उन्होंने अचल संपत्तियां खरीदीं।
बेलदार से एआरओ तक का सफर
राजेश परमार नगर निगम में बेलदार (मजदूर) के पद पर भर्ती हुए थे और बाद में सहायक राजस्व अधिकारी बने। ईओडब्ल्यू की छापेमारी के दौरान उनके पास से नकदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, लॉकर और बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे।
लॉकर से करीब 16 लाख रुपए का सोना और 25 हजार रुपए की चांदी मिली थी। उस समय वे निगम के जोन-16 में पदस्थ थे।
संपत्ति कर में गड़बड़ी के आरोप
जांच में सामने आया है कि परमार पर संपत्ति कर के मामलों में बकाया राशि कम दिखाकर खातों को शून्य करने और बदले में अवैध लाभ लेने के आरोप हैं। उनकी नौकरी के अनुसार कुल वैध कमाई लगभग 40 लाख रुपए ही आंकी गई है।
विदेश यात्राएं और पुराना कारोबार भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि परमार ने सरकारी सेवा में रहते हुए पांच बार विदेश यात्रा की। इसके अलावा, वे पहले फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में भी काम कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 में वार्ड-39 की कांग्रेस पार्षद रुबीना खान ने उनके खिलाफ निगमायुक्त से शिकायत भी की थी, जिसमें पद का दुरुपयोग और लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
फिलहाल ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में परमार की भूमिका और अवैध संपत्तियों को लेकर और खुलासे होने की संभावना है।
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