विदिशा भाजपा में बवाल, शिवराज के मौन पर उठ रहे सवाल?
महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट । विदिशा की राजनीति इन दिनों असामान्य और अशांत दौर से गुजर रही है। भाजपा के दशकों पुराने गढ़ विदिशा में पार्टी के भीतर ही खुलकर कलह मची हुई है। नगर पालिका के करी...
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संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट।
विदिशा की राजनीति इन दिनों असामान्य और अशांत दौर से गुजर रही है। भाजपा के दशकों पुराने गढ़ विदिशा में पार्टी के भीतर ही खुलकर कलह मची हुई है। नगर पालिका के करीब दो दर्जन भाजपा पार्षद सवा महीने से अपने ही विधायक मुकेश टंडन की कार्यशैली के खिलाफ धरने पर बैठे हैं।
विरोध के तौर पर कभी मशाल जुलूस निकाले जा रहे हैं, कभी विकास की अर्थी निकाली जा रही है, तो कभी बेतवा नदी में अर्द्धनग्न होकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जा रहा है। यह सब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की विदिशा भाजपा में हो रहा है।
आंदोलनकारी पार्षदों का आरोप है कि विधायक की कार्यशैली मनमानीपूर्ण है और वे लगातार प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं। इससे न केवल शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी असंतोष गहराता जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चर्चा शिवराज सिंह चौहान के मौन को लेकर है। अब तक न तो उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान दिया है और न ही आंदोलन कर रहे पार्षदों से संवाद किया है। स्थानीय भाजपा नेताओं की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।
स्थानीय नेता इस आशंका से खुलकर बोलने से बच रहे हैं कि यदि उन्होंने विधायक मुकेश टंडन के खिलाफ कोई रुख अपनाया, तो इससे शिवराज नाराज हो सकते हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर शिवराज विधायक मुकेश टंडन के खिलाफ बोलने से क्यों परहेज कर रहे हैं? क्या यह केवल संगठनात्मक अनुशासन का मामला है, या किसी आंतरिक समझौते और राजनीतिक रणनीति की वजह से मौन साधा गया है।
मप्र भाजपा के राजनीतिक इतिहास में यह स्थिति अभूतपूर्व मानी जा रही है, क्योंकि संभवतः यह पहला मौका है जब पार्टी के ही पार्षद अपने ही विधायक के खिलाफ इतने लंबे समय से सार्वजनिक आंदोलन कर रहे हैं। इससे भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन और आंतरिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विदिशा का राजनीतिक इतिहास अत्यंत प्रतिष्ठित रहा है। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज जैसे दिग्गज नेताओं ने किया है। ऐसे राजनीतिक विरासत वाले विदिशा में पार्टी के भीतर इस तरह का खुला विरोध भाजपा के लिए गंभीर राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी यह घटनाक्रम भाजपा नेतृत्व के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
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