स्वच्छता के शिखर पर बैठे शहर में दूषित पानी का तांडव: सिस्टम की लापरवाही ने ली 6 जानें
खुलासा फर्स्ट, इंदौर। देशभर में स्वच्छता के मॉडल के रूप में पहचाना जाने वाला शहर एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की विफलता का उदाहरण बन गया है। 6 लोगों की हो चुकी है मौत भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देशभर में स्वच्छता के मॉडल के रूप में पहचाना जाने वाला शहर एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की विफलता का उदाहरण बन गया है।
6 लोगों की हो चुकी है मौत
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई ने ऐसा कहर बरपाया कि अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक रहवासी अस्पतालों तक पहुंच चुके हैं।
इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम को दो महीने पहले से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन प्रशासन तब तक नहीं जागा जब तक हालात जानलेवा नहीं हो गए।
सोया रहा नगर निगम
हैरानी की बात यह है कि रहवासी पिछले दो महीनों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत 181 हेल्पलाइन और जोन कार्यालय में कर रहे थे।
25 दिसंबर को सामने आया था पहला मामला
25 दिसंबर को सबसे पहले एक महिला की तबीयत बिगड़ी। इसके बाद कई लोग उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित हुए।
मृतकों की सूची
उर्मिला यादव (65 वर्ष) – लंबे समय से पानी की शिकायतें की जा रही थीं, मौत के बाद उनका 11 महीने का बच्चा भी ICU में भर्ती।
सीमा प्रजापत (50 वर्ष) – पेट दर्द और उल्टी के बाद रास्ते में ही अस्पताल में मौत।
नंदलाल पाल – पूर्व रेलवे कर्मचारी; परिवार का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट नहीं, बल्कि दूषित पानी के कारण हुई है मौत।
संतोष बिगोलिया – गार्ड; 22 दिसंबर से उल्टी-दस्त, 25 दिसंबर को मौत। मरने वालों में दो अन्य भी शामिल है।
बीमार लोगों की स्थिति
400 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग है। आम लक्षण की बात करें तो पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बुखार, कमजोरी और निर्जलीकरण।
इन अस्पतालों में हो रहा इलाज
बीमार लोगों का उपचार चाचा नेहरू अस्पताल, वर्मा हॉस्पिटल, त्रिवेणी हॉस्पिटल में हो रहा है।
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप
दो महीने से लगातार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई जांच या पाइपलाइन सफाई नहीं हुई। नगर निगम के अपर आयुक्त ने एक मामले में कार्डियक अरेस्ट की बात कही, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
समय पर ध्यान दिया गया होता तो मौतें रोकी जा सकती थीं। स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की प्रतिक्रिया घर-घर सर्वे और दवाइयों का वितरण शुरू किया गया।
पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए है। डॉक्टरों की विशेष टीमें गली-गली तैनात की गईं है। गंभीर हालत वाले मरीजों को ICU और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया है।
स्थानीय लोगों के बयान
नंदलाल पाल के बेटे सिद्धार्थ पाल ने कहा
"मैंने कई बार 181 हेल्पलाइन और पार्षद कार्यालय को शिकायत की, लेकिन किसी ने नहीं सुना। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो पिता आज जीवित होते।"
संजय यादव (उर्मिला यादव के बेटे)
"मां की मौत के बाद मेरा 11 माह का बेटा भी बीमार है। प्रशासन की अनदेखी ने हमारी पूरी जिंदगी बदल दी।"
अस्पतालों में मेडिकल टीम तैनात
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने पानी सप्लाई लाइनों की जांच और सफाई शुरू करदी है। इतना ही नहीं अस्पतालों में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। लोगों को साफ पानी की आपूर्ति के निर्देश दिए गए है।
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