शहर के 59 स्थानों पर सात साल से हो रहा है दूषित पानी सप्लाय: प्रशासन व निगम अफसरों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिखे पत्र को किया नजरअंदाज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के द्वारा वर्ष 2019 में अपनी रिपोर्ट नगर निगम व प्रशाासन को सौंपी गई थी। इसमें शहर के 60 स्थानों से लिए गए पानी के सैंपल की जांच के बाद बताया गया था कि 59 स्थानों का पानी पीने योग्य नहीं है। उनमें भागीरथपुरा भी शामिल था। इसके बाद भी अफसरों ने इस जांच रिपोर्ट को तवज्जों नहीं दी। इसके चलते ही अब भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की वर्ष 2019 में जारी की गई रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि शहर के 60 में से 59 जगहों का पानी पीने के लायक नहीं था। इसके बावजूद नगर निगम के अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिन इलाकों का पानी खराब व पीने योग्य नहीं था उनमें भागीरथपुरा का नाम भी शामिल है।
बताया जाता है कि दूषित पानी का खुलासा करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने तीन पत्र लिखे, लेकिन किसी भी निगम अफसर ने इसे तवज्जों नहीं दी। बताया जाता है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह रिपोर्ट 2016-17 और 2017-18 में लिए गए पानी के सैंपलों पर आधारित थी।
इसकी जांच रिपोर्ट 2019 में सामने आई। इस रिपोर्ट के मुताबिक निगम प्रशासन को करीब 7 साल पहले ही यह जानकारी मिल गई थी कि शहर के अधिकांश इलाकों में लोग साफ नहीं, बल्कि दूषित पानी पी रहे हैं।
निगम अफसरों की लापरवाही को देखते हुए वर्ष 2022 तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को तीन बार पत्र लिखकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि इन इलाकों का पानी बिना उपचार किए इस्तेमाल करना खतरनाक है। इस मामले में जब नगर निगम ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, तब पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय ने सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड भोपाल को भी इस मामले की जानकारी दी, लेकिन जल आपूर्ति बंद नहीं हुई। किसी तरह की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई और दूषित जल स्रोतों को सील भी नहीं किया गया।
यहां का पानी पीने योग्य नहीं
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भागीरथपुरा की गलियां, खातीपुरा, रामनगर, खजराना रोड और आसपास के इलाकों का पानी पीने लायक नहीं है। इसके अलावा, सांवेर रोड, परदेशीपुरा, जूनी इंदौर, निरंजनपुर, सदर बाजार और बड़ा गणपति इलाके का पानी भी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लैब प्रभारी अतुल कोटिया ने बताया कि शहर के 59 स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए थे। इन सभी सैंपलों की विस्तृत जांच कराई गई। इनमें 59 स्थानों के सैंपल फेल निकले थे।
संक्रमण के कीटाणु
पीसीबी की जांच में पानी के सैंपलों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया था। यह वही बैक्टीरिया है जो आमतौर पर सीवरेज और गंदे पानी में पनपता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे डायरिया, पेट दर्द, उल्टी और गंभीर आंतों के संक्रमण होते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। जांच में खुलासा हुआ था कि जिन इलाकों से सैंपल लिए गए वह कान्ह नदी के आसपास एवं सीवेज लाइनों के बेहद करीब स्थित थे। गंदा पानी भूमिगत जलस्रोतों में मिलकर सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा था।
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