दूषित पानी ने ली 31वीं जान: वेंटिलेटर पर संघर्ष के बाद एकनाथ की सांसें थमी; सिस्टम की ‘सफेदपोश’ बेरहमी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में जहरीले पानी ने मौत का जो तांडव शुरू किया था, उसने अब 31वीं बलि ले ली है। एक महीने से मौत से जंग लड़ रहे 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी ने शुक्रवार शाम अंतिम सांस ली। प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि जो बुजुर्ग जल संसाधन विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत था, अपने हक की पेंशन के लिए जीवनभर कोर्ट के चक्कर काटता रहा, अंत में उसे व्यवस्था की नाकामी ने वेंटिलेटर तक पहुंचा दिया।
सूर्यवंशी की मौत केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक तंत्र की सामूहिक हत्या है, जिसने दूषित पेयजल की आपूर्ति को समय रहते रोकने की जहमत नहीं उठाई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक तरफ परिवार उजड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल डैमेज कंट्रोल में जुटा है।
29 दिसंबर 2025 को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद शुरू हुआ यह सफर शैल्बी से बांबे हॉस्पिटल के वेंटिलेटर तक जा पहुंचा, जहां 25 दिन तक उनके हर अंग ने काम करना बंद कर दिया। उनकी किडनियां फेल हुईं, लिवर खराब हुआ और अंततः दिल ने भी साथ छोड़ दिया।
विडंबना देखिए कि जिस मरीज की स्थिति इतनी गंभीर थी कि इंदौर दौरे पर आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी स्वयं बांबे अस्पताल पहुंचकर हाल-चाल जान रहे थे, प्रशासन उस दौरान केवल कागजी आंकड़ों में सफाई पेश करने में व्यस्त था। जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और कोई सुधार नहीं दिखा, तब बेबस परिजन ने 29 जनवरी को उन्हें घर ले जाने का फैसला किया।
ऑटो ड्राइवर बेटे निलेश सूर्यवंशी की लाचारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अपने पिता को सिस्टम के हाथों दम तोड़ते देखने के बजाय घर की चारदीवारी में अंतिम विदाई देना बेहतर समझा।
इस पूरे मातम के बीच जो राजनीतिक हलचल दिखी, उसने मानवता को और भी शर्मसार कर दिया है। गुरुवार रात जब बुजुर्ग को घर लाया गया, तो पूर्व पार्षद मांगीलाल रेडवाल, बंटी भार्गव और विजेंद्र यादव मृतक के घर पहुंचे थे। शुक्रवार शाम 5 बजे जैसे ही सूर्यवंशी की मौत हुई, भाजपा पार्षद और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा दस्ता वहां तैनात हो गया।
इनमें भाजपा पार्षद कमल वाघेला, रामकिशन बाबा यादव, मंडल उपाध्यक्ष शक्ति चंदेरिया, केदारनाथ योगी, ओम कश्यप, सन्नी तिवारी और गोलू यादव जैसे नेता शामिल थे। जनता में सुगबुगाहट है कि भाजपा सरकार के खिलाफ पिछले दिनों दो शवयात्रा को सड़क पर रखकर हुए प्रदर्शन और न्याय की गुहार से हुई किरकिरी को देखते हुए अब इन भाजपाइयों ने पहले से ही मोर्चा संभाल रखा था, ताकि प्रशासन के खिलाफ कोई बड़ा जनाक्रोश सड़क पर न उतर सके।
मालवा मिल मुक्तिधाम पर जब एकनाथ का अंतिम संस्कार हुआ, तो वहां जलती चिता के साथ-साथ आम आदमी का वह भरोसा भी जल रहा था, जो उसने इस तंत्र पर किया था। एक तरफ एक ऑटो चालक बेटा अपने पिता को खोने के बाद दु:ख के बोझ तले दबा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में इस नरसंहार को सामान्य मौत बताने की कोशिशें जारी हैं।
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