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कलेक्टर के तेवर सख्त तीन दिन में रिपोर्ट तलब: सीबीएसई मान्यता की आड़ में 40 बच्चों के हक पर डाका

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 जनवरी 2026, 8:40 पूर्वाह्न
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कलेक्टर के तेवर सख्त तीन दिन में रिपोर्ट तलब

‘खुलासा फर्स्ट’ ने उठाई मास्टर माइंड स्कूल के पालकों की आवाज

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के नाम मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले बिचौली मर्दाना स्थित मास्टर माइंड स्कूल प्रबंधन की मनमानी जिला प्रशासन के रडार पर है।

स्कूल द्वारा एमपी बोर्ड की मान्यता त्याग कर सीबीएसई अपनाने के पीछे छिपे ‘मुनाफाखोरी’ के खेल और आरटीई के तहत पढ़ रहे 40 बच्चों को बाहर करने की साजिश का खुलासा ‘खुलासा फर्स्ट’ ने बच्चों के माता-पिता द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत पर प्रमुखता से किया था।

इस मामले को गंभीरता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा केंद्र ने आनन-फानन में उच्च स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया, जिसे तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के कड़े आदेश दिए गए हैं।

जिला शिक्षा केंद्र के डीपीसी संजयकुमार मिश्रा द्वारा गठित विशेष टीम में विखं स्रोत समन्वयक (बीआरसी) राजेंद्रसिंह तंवर, हरिओम वैष्णव, अनुराग भारद्वाज और एकेडमिक समन्वयक श्वेता बाथम शामिल हैं।

जांच दल मौके पर जाकर न केवल स्कूल के दस्तावेजों की पड़ताल करेगा, बल्कि उन तथ्यों को भी खंगालेगा, जिनके आधार पर स्कूल संचालक नवीन चौधरी ने आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों के भविष्य को अधर में लटकाकर मान्यता निरस्त करने का आवेदन दिया है।

खुलासा फर्स्ट द्वारा पालकों की पीड़ा और स्कूल के दोहरे चरित्र का खुलासा किए जाने के बाद कलेक्टर के कड़े रुख ने विभाग के उन अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है, जो अब तक इस पूरे प्रकरण में चुप्पी साधे बैठे थे और जिन पर स्कूल प्रबंधन से मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

अभिभावकों का आक्रोश और प्रशासन की सक्रियता के बीच सवाल है कि क्या निजी स्कूल अपनी व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा के संवैधानिक अधिकारों की बलि चढ़ा सकते हैं? नियमों की स्पष्ट अनदेखी कर बोर्ड परिवर्तन की आड़ में गरीब बच्चों को बेदखल करने की इस कोशिश ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब पालकों की निगाह जांच दल की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी प्रशासन इन मासूमों को उनके हक की शिक्षा दिला पाता है या फिर प्रभावशाली रसूख के आगे नियम फिर बौने साबित होंगे?

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