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स्वच्छ शहर का दूषित पानी कांड: भागीरथपुरा में फैला जानलेवा हैजा; पानी के 50 सैंपल में से 26 में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से हड़कंप

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 जनवरी 2026, 10:34 पूर्वाह्न
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स्वच्छ शहर का दूषित पानी कांड

भोपाल एम्स सहित कई जिलों के वरिष्ठ चिकित्सक पहुंचे

पानी की जांच के लिए राज्यस्तरीय जांच दल सहित कई टीमें इंदौर में

दूषित जल कांड पर सख्ती सीएम के निर्देश पर जांच तेज

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वच्छता में आठ बार नंबर वन का अवॉर्ड हासिल करने वाला इंदौर नागरिकों को ड्रेनेजयुक्त पानी सप्लाई कर रहा है। इसकी रहवासियों द्वारा सैकड़ों शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदारों ने कार्रवाई नहीं की। निगम अफसरों की इस लापरवाही का खामियाजा भागीरथपुरा के रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

16 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोगों का अस्पताल व घरों में इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद सरकार ने निगम अफसरों की लापरवाही मानते हुए आयुक्त दिलीप यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और नर्मदा प्रोजेक्ट प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को हटा दिया। साथ ही तीन नए अपर आयुक्त की नियुक्ति करने के साथ आयुक्त पद पर आईएएस क्षितिज सिंघल की नियुक्ति की है। देशभर में किरकिरी के बाद सरकार की प्रशासनिक सर्जरी की चर्चा जोरों पर है।

विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की पुष्टि
रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो हैजे के लिए जिम्मेदार है। रिपोर्ट पर प्रशासन अब तक मौन साधे है। बताया जा रहा है फीकल कॉलिफॉर्म नामक बैक्टीरिया मुख्य रूप से मानव या पशुओं के मल में पाया जाता है। पानी में इसकी मौजूदगी से खुलासा होता है कि पीने के पानी की पाइप लाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल रहा है।

इसी तरह ई-कोलाई बैक्टीरिया पाचन तंत्र पर हमला करता है। इसके संक्रमण से उल्टी, दस्त और पेट दर्द की समस्या होती है। इसके अलावा विब्रियो कोलेरी विब्रियो स्पीशीज हैजा फैलाने वाला मुख्य बैक्टीरिया है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। समय पर इलाज न मिलने पर जान तक जा सकती है।

इसी तरह स्यूडोमोनास एरूजिनोसा भी खतरनाक है, से ऐसे लोगों, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, को फेफड़ों में संक्रमण और रक्त में जहर फैलने का खतरा रहता है। क्लेबसेला स्पीशीज विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है।

इससे निमोनिया जैसी बीमारी पनपती है। सिट्रोबैक्टर स्पीशीज बैक्टीरिया छोटे बच्चों के लिए जानलेवा है। प्रोटोजोआ बैक्टीरिया से आंतों में संक्रमण और लंबे समय तक चलने वाले दस्त लगते हैं।

देश के सबसे स्वच्छ शहर में नगर निगम अफसरों की लापरवाही से भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त पानी सप्लाय हुआ। इससे क्षेत्र में भयावह हालात बन गए हैं। दूषित पानी से अब तक 16 लोगों की मौत हुई, जबकि हजारों बीमार हैं।

इस बीच क्षेत्र से दूषित पानी के 50 सैंपल लिए गए। इनकी जांच में 26 में जानलेवा हैजा सहित कई संक्रामक बीमारियों के बैक्टीरिया मिले। इस खुलासे से शासन- प्रशासन सहित रहवासियों में हड़कंप है।

शासन के निर्देश पर भोपाल एम्स सहित कई जिलों के वरिष्ठ चिकित्सकों को इंदौर भेजा गया है। साथ ही पानी की जांच के लिए भी सर्विलांस टीम के साथ कोलकाता का दल पहुंचा है।

चिकित्सकों की टीमें तैनात
भागीरथपुरा में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीमारी पर रोक और समुचित इलाज के लिए शासन ने भोपाल एम्स सहित दूसरे जिलों के वरिष्ठ चिकित्सकों को तैनात किया है। इंदौर पहुंचे चिकित्सकों ने एमवाय अस्पताल और भागीरथपुरा संजीवनी क्लिनिक पहुंचकर मरीजों के इलाज की जानकारी ली। पानी की जांच के लिए भी राज्यस्तरीय और कोलकाता का दल पहुंच गया है। दलों ने पूरे भागीरथपुरा से सैंपल लिए, जिससे पानी में मिले हैजा सहित कई जानलेवा बैक्टीरिया की जांच की जा सके।

जांच में हैजे की पुष्टि
50 सैंपलों की जांच हो चुकी है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में कहा गया है पानी में हैजा फैलाने वाले सहित कई जानलेवा बीमारियों के बैक्टीरिया शामिल हैं। इस खुलासे से सरकार की चिंता बढ़ा गई है। शासन, प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग का अमला पूरी तरह हरकत में है। भागीरथपुरा में चप्पे-चप्पे की जांच कर वहां खतरनाक बैक्टीरिया की जांच में टीम जुट गई है, लेकिन प्रशासन ने अब तक पूरी रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया है।

क्या कहती है जांच रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पीने के पानी की लाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल रहा था। पानी के सैंपल्स को अनसैटिस्फैक्ट्री श्रेणी में रखा गया है।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक पानी में हैजा जैसी संक्रामक बीमारी के साथ कई संक्रामक बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया शामिल है। करीब 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में पानी के सैंपल भेजे गए है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने शनिवार को क्षेत्र का दौरा किया और पानी पीकर रहवासियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की पानी साफ है।

कोलकाता से वैज्ञानिक टीम इंदौर पहुंची
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली गंभीर बीमारी के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद भोपाल से जांच दल और कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी की विशेषज्ञ टीम इंदौर पहुंची है। पानी के सैंपल में ई-कोलाई और शिगेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।

सीएम के आदेश पर भोपाल से पहुंची जांच टीम के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सदस्य भागीरथपुरा स्थित डिस्पेंसरी पहुंचे। टीम ने वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बढ़ते मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

एमवाय व चाचा नेहरू अस्पताल का दौरा... एनएचएम की एमडी सलोनी सिडाना ने एमवाय अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने भर्ती मरीजों से सीधे संवाद कर इलाज की स्थिति जानी और डॉक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

वैज्ञानिकों की टीम पानी के सैंपल लेकर जाएगी... दूषित पानी के स्रोत और संक्रमण की कड़ी को समझने के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी, कोलकाता से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम इंदौर पहुंची है। यह टीम भागीरथपुरा क्षेत्र से पानी के सैंपल लेकर विस्तृत वैज्ञानिक जांच करेगी। अधिकारियों ने बताया कि पानी का सर्वे अभी जारी है और राष्ट्रीय संस्थान के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

{मरीजों से संवाद, इलाज की गुणवत्ता की समीक्षा... राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, स्टाफ की स्थिति, इलाज की प्रक्रिया और रिकॉर्ड संधारण की समीक्षा की। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए कि मरीजों को ओआरएस के उपयोग की सही विधि-उबले हुए पानी में घोलकर-स्पष्ट रूप से समझाई जाए, ताकि दोबारा संक्रमण का खतरा न रहे।

भागीरथपुरा

कुल घरों का सर्वे 5,079

कुल लोगों की जांच 25,395

हल्के लक्षण वाले मरीज 65

मौके पर प्राथमिक उपचार 65

पुराने केस का फॉलोअप 429

OPD में रैफर मरीज 15

कुल भर्ती मरीज (अब तक) 354

डिस्चार्ज मरीज 205

वर्तमान में भर्ती मरीज 149

आईसीयू में भर्ती मरीज 20

पार्षद और मंत्री बिना नंबर की एक्टिवा पर क्षेत्र में कर रहे भ्रमण

हमें कौन रोक सकता है?

भागीरथपुरा क्षेत्र में जहां लोग दूषित पानी पीकर अपनी जान गंवा रहे थे, घर-घर मातम पसरा था और अस्पतालों में कराहें गूंज रही थीं, उसी वक्त क्षेत्र के विधायक व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला के साथ बिना नंबर प्लेट की नई चमचमाती एक्टिवा पर क्षेत्र में भ्रमण करते नजर आए। यह दृश्य सामने आते ही जनता के बीच आक्रोश और सवालों की बाढ़ आ गई।

दूषित जल कांड से जूझ रहे भागीरथपुरा में हालात बेहद संवेदनशील हंै। लोग अपने परिजनों को खो चुके हैं, कई अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र में ‘संवेदनशीलता’ की अपेक्षा थी, लेकिन सामने आई तस्वीरों ने सत्ता की प्राथमिकताओं पर ही सवाल खड़े कर दिए। भ्रमण के दौरान स्थानीय रहवासियों ने नेताओं के प्रति अपना गुस्सा भी जाहिर किया। लोगों का कहना था कि जब क्षेत्र शोक में डूबा है, तब यह कैसा निरीक्षण है और यह कैसी राजनीति?

तस्वीर के साथ सवाल किए जा रहे हैं कि जब पूरा इलाका गमगीन था, तब भ्रमण के लिए नई टू-व्हीलर ही क्यों चुनी गई? क्या सरकारी गाड़ी या पैदल निरीक्षण से साहब की शानोशौकत कम हो जाती? बिना नंबर की गाड़ी पर सार्वजनिक सड़क पर घूमना क्या नियमों से ऊपर होने का प्रमाण है? क्या कुछ छुटभैया नेता अपने बड़े नेता को खुश करने के लिए इस तरह की झांकी सजाते हैं? क्या जनता का दु:ख सिर्फ फोटो खिंचवाने का अवसर बन गया है?

जनता की आवाज... स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें सहानुभूति नहीं, बल्कि जवाब चाहिए। सवाल यह नहीं है कि नेता घूमने क्यों निकले, सवाल यह है कि दुख की घड़ी में यह प्रदर्शन किसके लिए था? भागीरथपुरा की तस्वीरें सिर्फ एक भ्रमण नहीं दिखातीं, बल्कि यह बताती हैं कि सत्ता और संवेदना के बीच की दूरी कितनी गहरी हो चुकी है। जनता आज यही पूछ रही है—जब मौतें हो रही थीं, तब यह भ्रमण था या तमाशा?

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