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धोखे से हड़पी विवादित जमीन का कब्जा दिलवाने का दावा: प्रशासनिक टीम पर अन्याय का आरोप

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । ग्राम दत्तोदा में छह एकड़ कृषि भूमि को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद शनिवार को उस समय फिर गरमा गया जब तहसीलदार यशदीप रावत पुलिस बल के साथ कब्जा दिलाने पहुंचे। दूसरी ओर किसान परिवा

Khulasa First

संवाददाता

07 दिसंबर 2025, 10:05 पूर्वाह्न
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धोखे से हड़पी विवादित जमीन का कब्जा दिलवाने का दावा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
ग्राम दत्तोदा में छह एकड़ कृषि भूमि को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद शनिवार को उस समय फिर गरमा गया जब तहसीलदार यशदीप रावत पुलिस बल के साथ कब्जा दिलाने पहुंचे। दूसरी ओर किसान परिवार का आरोप है कि जमीन धोखाधड़ी से हड़प ली गई और विरोध करने पर लगातार दबाव, धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध पर बेटे की हत्या
किसान छगन पिता गोपीचंद पटेल और उनके परिजनों का कहना है आर्थिक तंगी के कारण 2007-08 में आधी जमीन बेचने की इच्छा जताई थी। लेकिन अशिक्षित होने का फायदा उठाकर दलालों ने पूरी 6 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री करवा ली। कुछ दिन बाद तीसरे व्यक्ति को बेच दी गई। किसान को इसका पता तब चला जब वह खाद–बीज लेने गया और नामांतरण पूरा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर होने की जानकारी हुई।

रजिस्ट्री के नाम पर उनसे मुख्तियारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) करवा लिया गया, जिसे वे रजिस्ट्री समझते रहे। विरोध शुरू होते ही किसान के एक बेटे की अंधा कत्ल करवा दिया गया, जिसका प्रकरण खजराना थाने में लंबित है। प्रशासन जबरन बेदखल कर कब्जा दिला रहा है।

मामला ग्राम दत्तोदा की भूमि सर्वे नंबर 439/2, रकबा 1.191 हे. से संबंधित है, जिसे सरोदनी सरस्वती शिक्षा समिति द्वारा रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के आधार पर खरीदा गया था। समिति ने कब्जा प्राप्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर उप–तहसीलदार सिमरोल ने 06 अगस्त 2024 को आदेश जारी किया था।

छगन अशिक्षित वृद्ध हैं। उनका कहना है जयकुमार बजाज ने धोखाधड़ी की। वे अपनी ग्राम दत्तोदा तहसील महू के भूमि सर्वे नं. 466/1, 467, 468, 469/2 बेचना चाहते थे, लेकिन गलती से सर्वे 439/2 का विक्रय पत्र तैयार हो गया। जयकुमार बजाज ने उनके पक्ष में सिर्फ मुख्तयारनामा करवा दिया, जिसे वे रजिस्ट्री समझते रहे।

इसी त्रुटि का लाभ उठाकर जयकुमार ने विवादित भूमि शिक्षा समिति को बेच दी। हाई कोर्ट अधिवक्ता ओम दांगी ने आरोप लगाया छगन पटेल की जमीन भू–माफियाओं ने नशा खिलाकर 2007-08 में हड़प ली थी। आज भी प्रशासन किसान की बात सुने बिना दबाव बना रहा है। किसान की पत्नी छोटी बाई ने आहत होकर शनिवार को जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

राजस्व अपीलों की स्थिति
हाई कोर्ट में रिट पिटिशन 21897/2025) सरोदनी सरस्वती समिति द्वारा दायर की।कोर्ट ने 06.08.2024 के कब्जा आदेश को दो महीने में लागू करने के निर्देश दिए।

{ कमिश्नर न्यायालय में अपील (अपील क्रमांक 0038/2025-26) {छगन पटेल की अपील 11 अगस्त 2025 को खारिज {समिति ने कहा—जमीन 2007 में खरीदी, 2008 में उनके नाम दर्ज; सभी दस्तावेज विधिसम्मत।

शिक्षा समिति का दावा जमीन विधि अनुसार खरीदी
वर्तमान जमीन मालिक अंकिता पति आकाश गुप्ता (नीरजा सेठी की पुत्री) का कहना है- तहसीलदार का 06 अगस्त 2024 का कब्जा आदेश, एसडीएम, कमिश्नर और हाई कोर्ट- तीनों स्तरों पर बरकरार है। प्रशासन को कब्जा दिलाने के निर्देश हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दबाव और विरोध के कारण कार्रवाई बाधित की जा रही है। हमारे सभी दस्तावेज वैध हैं, फिर भी हमें न्याय से वंचित रखा जा रहा है।

आदेश पर दो माह में कब्जा दिलाना अनिवार्य: प्रशासन
तहसीलदार यशदीप रावत ने कहा धारा 250 के अंतर्गत कब्जा दिलाने पहुंचे थे। किसान पक्ष तहसीलदार, एसडीएम और आयुक्त न्यायालय- तीनों स्तरों पर प्रकरण हार चुका है। उच्च न्यायालय ने 90 दिन में कब्जा दिलाने का आदेश दिया है। वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में मालिक अंकिता गुप्ता दर्ज हैं।

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