मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: शराब ठेकेदारों और तस्करों में मचा हड़कंप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आबकारी विभाग से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है, जिसने सभी शराब ठेकेदार और तस्करों के होश उड़ाए हैं। इस फैसले के तहत अब शराब की ट्रेस एंड ट्रेक प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे हर बॉटल की मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग की जा सकेगी।
भोपाल में हुई हाईलेवल बैठक
भोपाल में आबकारी विभाग ने हाल ही में ठेकेदारों, लाइसेंसियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन ने नए सिस्टम की पूरी जानकारी दी।
ठेकेदारों में मचा हड़कंप
यह सुनते ही ठेकेदारों में हड़कंप मच गया और उन्होंने विरोध जताया। ठेकेदारों ने इस फैसले के कारण राजस्व घटने की आशंका भी जताई। लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यह फैसला वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगा, यानी 1 अप्रैल 2026 से नए ठेकों पर लागू होगा।
ट्रेस एंड ट्रेक सिस्टम क्या है?
ट्रेस एंड ट्रेक तकनीक के तहत हर शराब बॉटल की पूरी जानकारी होगी कौन सी डिस्टलरी में बनी। आबकारी के किस गोदाम में भेजी गई। किस लाइसेंसी ठेकेदार की दुकान पर पहुंची।
हर बॉटल ट्रैक की जा सकेगी
अभी तक जब शराब की तस्करी पकड़ी जाती थी, तो ठेकेदार या डिस्टलरी के नाम सामने नहीं आते थे। अधिकतर मामलों में सिर्फ वाहन चालक का बयान होता था। अब इस सिस्टम से अवैध शराब की हर बॉटल ट्रैक की जा सकेगी, और दोषी ठेकेदार या डिस्टलरी को सीधे आरोपी बनाया जा सकेगा।
तीन साल से टाला जा रहा था फैसला
यह सिस्टम लागू करने की तैयारी तीन साल से चल रही थी, लेकिन ठेकेदार और डिस्टलरी संचालक लगातार विरोध कर इसे टालते रहे। इस बार सीएस अनुराग जैन ने साफ कर दिया कि इसे अब नहीं टाला जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से नए ठेकों पर लागू किया जाएगा।
क्यों ठेकेदारों को खतरा और राजस्व की चिंता?
मध्यप्रदेश के बॉर्डर जिलों से गुजरात और अन्य राज्यों में शराब की तस्करी आम है। हर दिन औसतन 1 करोड़ रुपये से अधिक की शराब तस्करी होती है। ठेकेदार इस तस्करी से अतिरिक्त मुनाफा कमाते हैं।
तस्करी का रास्ता बंद हो जाएगा
लेकिन ट्रेस एंड ट्रेक लागू होने पर तस्करी का रास्ता बंद हो जाएगा। इससे ठेकेदारों की बोली कम होने और राजस्व घटने की आशंका जताई जा रही है। हाल ही में एक 1 करोड़ से अधिक मूल्य की शराब पकड़ी गई है। इस फैसले का उद्देश्य राज्य में शराब तस्करी रोकना और कानूनी पारदर्शिता बढ़ाना है।
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