अफसरशाही हावी, ऐसे में काम करना मुश्किल: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एसीएस की बैठक में बयां की पीड़ा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही इलाज के दौरान होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। यहां गंदे पानी की समस्या अफसरों को बताई गई थी, लेकिन अफसर काम ही नहीं करते। किसी काम के लिए कितनी बार फोन लगाएं? घटना में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एसीएस संजय दुबे के साथ हुई बैठक में ये बातें कही। महापौर ने कहा अफसर पूरी तरह मनमानी कर रहे हैं। यही वजह है कि इतनी बड़ी घटना हुई। समय रहते यदि अफसर कार्य कर लेते तो अंजाम यह नहीं होता। अफसर शिकायतों को हलके में लेते हैं। भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड को लेकर अफसरों व जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी है।
काम करना मुश्किल हो गया- बैठक में महापौर ने कहा अफसर काम करना ही नहीं चाहते। एक काम के लिए कितनी बार फोन करना पड़ेगा, इसकी सीमा तय कर दें। जरा-जरा-सी बातों के लिए हम ऊपर फोन नहीं लगा सकते। उन्होंने एसीएस दुबे से कहा मौजूदा परिस्थितियों में काम करना मुश्किल है।
निगम में अफसरों की कमी नहीं। जो अफसर हैं, वे ही ईमानदारी से काम कर लें तो हालात नहीं बिगड़ते। निगमायुक्त ने एक अपर आयुक्त को पांच-पांच विभाग दे रखे हैं, जबकि दूसरे अफसरों के पास काम ही नहीं है।
अफसर काम नहीं करें तो व्यवस्था कैसे सुधरे
महापौर भार्गव ने एसीएस के समक्ष अपनी पीड़ा जताते हुए कहा वर्तमान में निगम अफसरों द्वारा जिस तरह मनमानी की जा रही है, उससे काम करना मुश्किल हो गया है। आप चाहो तो मेरी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकते हो। अफसर जब तक काम नहीं करेंगे, तब तक शहर की व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
महापौर ने कहा कलेक्टर को रविवार को मैसेज किया था कि भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीजों के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन सोमवार के बाद अफसरों ने सक्रियता दिखाई। जनप्रतिनिधि होने के नाते जवाब हमें देना पड़ता है। लेकिन जब अफसर काम नहीं करते हैं तो जनप्रतिनिधि को लोगों के समक्ष लापरवाह बताया जाता है।
…तो काम कौन करेगा
सूत्रों के मुताबिक बैठक में महापौर द्वारा अफसरों पर सुनवाई नहीं करने और गैर जिम्मेदाराना कार्य करने के आरोप लगाए जाने पर एसीएस दुबे ने कहा यदि सभी अफसरों को हटा देंगे तो काम किससे कराएंगे। हालांकि बैठक में अफसरों पर कार्रवाई को लेकर जनप्रतिनिधियों ने बात नहीं रखी। केवल महापौर अकेले ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात करते रहे। इसके बाद भी एसीएस ने किसी पर भी कार्रवाई करने के कोई संकेत नहीं दिए।
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