देवी अहिल्या की विरासत जमींदोज: 254 साल पहले करवाया था मणिकर्णिका घाट का निर्माण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
254 साल पहले 1771 में देवी अहिल्या द्वारा वाराणसी में बनवाए गए मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को तोड़कर जमींदोज कर दिया गया है। यहां श्मशान घाट बनाया जाना है। इसी कारण घाट को तोड़ा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी हैं यहां से सांसद
घाट का हिस्सा तोड़ने से देवी अहिल्या के वंशज और समाज के लोगों में खासी नाराजगी है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने ही 2023 में इसका भूमिपूजन किया था। इस स्थान पर 18 करोड़ रुपए से विकास कार्य किये जाने है।
खासगी देवी अहिल्या बाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट करता है निगरानी
इस घाट की निगरानी देवी अहिल्या की संपत्तियों की देखरेख के लिए बने खासगी देवी अहिल्या बाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट द्वारा किया जाती है।
इसके अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन देवी अहिल्याबाई होलकर की दूरदर्शिता और विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही होने चाहिए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि हमने प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लापरवाही की जांच, दोषियों पर कार्रवाई, मूर्तियां ट्रस्ट को सौंपने और उनके पुनः प्रतिष्ठापन का आग्रह किया है।
मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल
ढाई सौ वर्ष से ज्यादा प्राचीन मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। कहा जाता है कि यहीं माता पार्वती की कणिका (कान की मणि) गिरी थी। इसी कारण इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा। देवी अहिल्या ने यहां तीर्थ यात्रियों के लिए कई सुविधाएं विकसित कराई हैं।
15 जनवरी को बैठक में तय करेंगे रणनीति
वाराणसी प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शहर में आक्रोश है। इसके विरोध में धनगर समाज, पाल, बघेल समेत कई समाजों ने 15 जनवरी को बैठक रखी है। इसमें रणनीति तय की जाएगी।
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