बीजेपी पार्षद की कानूनी जीत: हाईकोर्ट ने पार्षद पद किया बहाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की बेंच ने चुनावी विवाद पर फैसला सुनाते हुए निर्वाचित पार्षद की सदस्यता बहाल कर दी है। कोर्ट ने न केवल निचली अदालत के 'चुनाव शून्य' घोषित करने के आदेश को रद्द...
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की बेंच ने चुनावी विवाद पर फैसला सुनाते हुए निर्वाचित पार्षद की सदस्यता बहाल कर दी है। कोर्ट ने न केवल निचली अदालत के 'चुनाव शून्य' घोषित करने के आदेश को रद्द किया, बल्कि विपक्षी उम्मीदवार को विजयी घोषित करने के निर्णय को भी खारिज कर दिया।
क्या था पूरा विवाद?
नगर निगम चुनाव 2022 में भाजपा की निशा देवलिया ने भारी मतों से जीत हासिल की थी। लेकिन कांग्रेस की रनर-अप प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा ने उन पर हलफनामे में जानकारी छिपाने और संपत्ति कर की विसंगतियों के आरोप लगाए थे। जिला अदालत ने इन आरोपों के आधार पर निशा का चुनाव रद्द कर दिया था, जिसे अब न्यायमुूर्ति अलोक अवस्थी की बेंच ने पूरी तरह पलट दिया है।
सबूतों का अभाव
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका दायर करने वाले पक्ष ने केवल अनुमानों के आधार पर आरोप लगाए थे। बिना ठोस दस्तावेजों या जांच के, किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की जीत को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
टैक्स चोरी के आरोप खारिज
संपत्ति कर की चोरी और क्षेत्रफल में विसंगति के दावों को कोर्ट ने "काल्पनिक" करार दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक नगर निगम के रिकॉर्ड अपडेट न हों, तब तक केवल धारणा के आधार पर कर देयता तय नहीं की जा सकती।
रनर-अप की जीत पर रोक
कानूनन, यदि किसी उम्मीदवार का चुनाव रद्द भी होता है, तो दूसरे नंबर वाले को सीधे विजेता घोषित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं, न कि राजनीतिक द्वेष से प्रेरित आरोप।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस फैसले के बाद निशा देवलिया के समर्थकों में खुशी की लहर है। उनके पति और भाजपा नेता रूपेश देवलिया ने इसे "राजनीतिक साजिश का अंत और सत्य की विजय" बताया है। वहीं, नंदिनी मिश्रा पक्ष अब इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
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