भरत का त्याग दुनिया का सर्वश्रेष्ठ आदर्श, पं. त्रिवेदी: बजरंग नगर के पशुपति नाथ मंदिर में रामकथा का आयोजन
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वर्तमान में लोगों को भरत के पदचिह्नों पर चलना चाहिए। इससे परिवार में भाइयों के बीच परस्पर पर स्नेह और भाईचारा अटूट बनता है। यह बात कांटाफोड़ शिव मंदिर के भागवताचार्य संजय कृष्ण त्रिवेदी ने बजरंग नगर के पशुपतिनाथ मंदिर में आयोजित रामकथा में राम भरत मिलाप प्रसंग का वर्णन करते हुए कही।
उन्होंने भरत के त्याग को विश्व का सर्वश्रेष्ठ आदर्श बताते हुए कहा कि श्रीराम के वनवास जाने की जानकारी होने पर ननिहाल से लौटे भरत ने अवध का राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया। राम-जानकी और लक्ष्मण से मिलने के लिए भरत व्याकुल हो उठे।
भरत रोते हुए राम के चरणों में गिर जाते हैं। प्रभु श्रीराम भरत व छोटे भाई शत्रुघ्न को ह्रदय से लगा लेते हैं। माता-पिता व अयोध्या का हाल पूछते हैं। भरत के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए श्रीराम वनवास की अवधि को पूरा कर अयोध्या लौटने का वचन देते हैं। भागवताचार्य द्वारा श्रीराम व भरत मिलाप के प्रसंग का वर्णन किया तो श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
विधायक और सभापति पहुंचे: बजरंग नगर पशुपति नाथ मंदिर समिति के राजेश गावड़े और प्रफुल्ल गावड़े ने बताया कि मंदिर परिसर में आयोजित रामकथा में विधायक रमेश मेंदोला शामिल हुए। इस मौके पर विधायक मेंदोला ने भागवताचार्य पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके अलावा नगर निगम वार्ड 27 के पार्षद व निगम सभापति मुन्नालाल यादव भी रामकथा का श्रवण करने पहुंचे। इस मौके पर सभापति ने व्यासपीठ की आरती उतारी और भागवताचार्य त्रिवेदी से आशीर्वाद लिया।
प्रसादी का वितरण किया: आयोजन समिति के राजेश गावड़े और प्रफुल्ल गावड़े ने बताया कि रामकथा हर दिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक हो रही है। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि रामकथा श्रवण करने वालों की संख्या हर दिन बढ़ रही है।
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