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भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी लापरवाही नहीं: सत्ता द्वारा प्रायोजित हत्या; कांग्रेस की मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत बोलीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 फ़रवरी 2026, 7:43 पूर्वाह्न
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भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी लापरवाही नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित पानी के सेवन से हुई नागरिकों की मौत ने अब एक भीषण राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। बुधवार को इंदौर प्रेस क्लब में मीडिया से चर्चा में कांग्रेस की मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने प्रदेश और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि मासूम नागरिकों की इन मौतों को केवल प्रशासनिक लापरवाही का नाम देकर दबाया नहीं जा सकता, बल्कि यह एक सुनियोजित हत्या है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार अपने नागरिकों को जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत साफ पानी तक मुहैया कराने में विफल रहती है तो वह शासन करने का नैतिक अधिकार खो देती है।

प्रदेश सरकार को सार्वजनिक रूप से मांगना चाहिए माफी- श्रीनेत ने मांग की है कि प्रदेश सरकार को इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगना चाहिए और प्रत्येक मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए।

उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के इस्तीफे की मांग की और चेताया कि यदि सरकार ने जिम्मेदारी तय नहीं की तो जनता इसका जवाब देगी।

ज्वलंत मुद्दों पर सरकार की चुप्पी लोकतंत्र के लिए खतरा
सिर्फ स्थानीय ही नहीं, श्रीनेत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। भारत-अमेरिका ट्रेड डील का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि अब हमारे तेल आयात का निर्णय भी अमेरिका द्वारा तय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह विडंबना ही है कि समझौतों की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति करते हैं और भारतीय नेतृत्व केवल मूकदर्शक बना रहता है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने संसद में विपक्ष की आवाज दबाने और देश के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार की चुप्पी को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताया।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सवाल पूछने वालों को अपमानित कर रहे
कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि एक तरफ विकसित भारत का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि आजादी के दशकों बाद भी लोग दूषित पानी पीकर जान गंवाने को मजबूर हैं।

सरकार की संवेदनहीनता पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी पीड़ितों को न्याय देने के बजाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सवाल पूछने वालों को अपमानित कर रहे हैं।

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