खबर
Top News

बैंक और बीमा कर्मियों का हल्लाबोल: निजीकरण की नीतियों के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन; ठप हुआ वित्तीय कारोबार

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 फ़रवरी 2026, 11:22 पूर्वाह्न
143 views
शेयर करें:

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्र सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों और विवादित चार श्रम संहिताओं के खिलाफ आज गुरुवार को समूचे राष्ट्र के साथ बैंक और बीमा कर्मियों ने आर-पार की जंग का एलान कर दिया है।

सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस देशव्यापी हड़ताल के चलते आज जिले भर में बैंकिंग और बीमा सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

हजारों की संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए
सुबह से ही बैंकों के शटर नहीं उठे और कामकाज ठप होने से आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन का मुख्य केंद्र आज शहर का गांधी हॉल परिसर स्थित अभिनव कला समाज रहा। यहाँ जिले भर से हजारों की संख्या में बैंक अधिकारी और कर्मचारी एकत्रित हुए।

शक्ति प्रदर्शन किया
प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर सरकार की निजीकरण की नीतियों के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की और एक विशाल आमसभा के माध्यम से अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

इस वजह से किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन

अभिनव कला समाज के प्रांगण में आयोजित इस सभा में कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर दिखा, जहाँ वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचना देश की अर्थव्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को 10 श्रमिक संगठनों और 18 महासंघों के साथ-साथ कांग्रेस का भी सशक्त समर्थन प्राप्त हुआ है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध बैंकों के निजीकरण की साजिश, संस्थानों में कर्मचारियों की भारी कमी, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पुरानी पेंशन योजना को समाप्त करने के विरुद्ध है।

कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा
कर्मचारी नेताओं ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण आम जनता पर सेवा शुल्क का बोझ बढ़ रहा है और कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कृष्ण शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि गांधी हॉल से उठी यह आवाज दिल्ली तक पहुंचनी चाहिए।

सभी कार्य पूरी तरह ठप रहे
यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया और श्रम कानूनों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा।

आज की इस तालाबंदी के कारण चेक क्लियरिंग, कैश ट्रांजेक्शन और ऋण संबंधी सभी कार्य पूरी तरह ठप रहे, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!