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बर्बर हुआ बांग्लादेश: प्रियंका गांधी व पवन कल्याण ने जताया रोष; हिंदू युवक की बर्बरतापूर्ण हत्या मानवता के खिलाफ अपराध

दुस्साहस : भारतीय उच्चायोग पर कट्टरपंथी भीड़ का हमला, मंदिरों के सामने नारेबाजी हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या, भारत में गुस्सा प्रियंका ने कहा- भारत सरकार स्वयं संज्ञान ले, अल्पसंख्यक वर्ग पर क्यों हो...

Khulasa First

संवाददाता

20 दिसंबर 2025, 8:19 पूर्वाह्न
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बर्बर हुआ बांग्लादेश

दुस्साहस : भारतीय उच्चायोग पर कट्टरपंथी भीड़ का हमला, मंदिरों के सामने नारेबाजी

हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या, भारत में गुस्सा

प्रियंका ने कहा- भारत सरकार स्वयं संज्ञान ले, अल्पसंख्यक वर्ग पर क्यों हो रहे हमले?

थरूर ने यूनुस सरकार से स्थिति को संभालने की कही बात, प्रेस की आजादी पर भी जताई चिंता

कट्टरपंथियों के हिंसक प्रदर्शन को यूनुस सरकार का खुला समर्थन

छात्र नेता की मौत से बेकाबू भीड़ कर रही आगजनी, अखबारों के दफ्तरों में तोड़फोड़

बांग्लादेश के फिर से धधकने के पीछे चुनाव टालने की साजिश, युद्ध जैसे हालात, यूनुस सरकार पूरी तरह फेल

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट…इंदौर
जिस मुल्क को भारत ने दुनिया में अस्तित्व दिया, वह बांग्लादेश एक बार फिर बर्बर हो गया। ये बर्बरता हिंदू समुदाय के साथ फिर शुरू हुई है। एक हिंदू युवा को बर्बरतापूर्ण मारा-पीटा गया और फिर पेड़ से लटकाकर जिंदा जला दिया गया। इस बर्बर कृत्य का भीड़ जश्न भी मनाती है और ‘नारा-ए-तदबीर' के शोर के साथ मंदिरों को भी निशाना बनाती है।

अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ बर्बरता का ये सिलसिला ठीक वैसा ही है, जैसा डेढ़ साल पहले हसीना के तख्तापलट के समय हुआ था। पूरे बांग्लादेश में हिंदू भयभीत व सहमे हुए हैं और कट्टरपंथी भीड़ के रहमोकरम पर आश्रित हो गए हैं। एक-एक दिन ही नहीं, एक-एक पल मौत का आभास करा रहा है, लेकिन बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ऐसे बर्बर लोगों के सामने एक बार फिर नतमस्तक नजर आ रही है। इसके कारण ही कट्टरपंथियों का दुस्साहस इतना बढ़ गया कि उन्होंने भारतीय उच्चायोग पर भी हमला कर दिया। इससे पूरे भारत में जबरदस्त गुस्सा है।

हिंदू युवा दीपूचंद्र दास रोज की तरह काम करने फैक्ट्री में गया था। गरीब परिवार के इस युवा पर पूरे परिवार के लालन पालन की जिम्मेदारी थी। परिवार ने उसे सुबह हंसते-खेलते काम पर जाने के लिए विदा किया, लेकिन वह फिर लौटकर घर नहीं आया, न उसकी लाश को घर तक आने दिया गया। दीपू को उसी फैक्ट्री में सहकर्मियों ने घेर लिया, जहां वह काम करता था।

उस पर वही पुराना ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जिसके जरिये कट्टरपंथी चाहे जब किसी की भी जान ले लेते हैं और वह भी क्रूरता के साथ। दीपू के साथ भी ऐसा ही किया। उसके साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की गई। फिर उसे भीड़ ने जिंदा ही पेड़ पर उलटा लटका दिया। मार-मारकर उसकी जान ले ली और मिन्नतों के बाद भी उसकी लाश नहीं सौंपी।

मौलवियों को साथ लेकर पुलिस ने लाश मांगी, लेकिन कट्टरपंथी भीड़ ने इस्लाम के नाम पर दीपू को पुलिस के सामने ही आग के हवाले कर दिया। अब गरीब दीपचंद के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन हिंदू युवक की इस हत्या के बाद भी कट्टरपंथियों का हिंसक प्रदर्शन रुका नहीं है। इससे बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की जान सांसत में है।

हिंदू युवक की हत्या पर भारत गुस्से से भर गया है। कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने भारत सरकार से स्वतः संज्ञान लेने की मांग के साथ हिंदू युवक की हत्या पर रोष प्रकट किया तथा इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया। आंध्रप्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी रोष प्रकट करते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने यूनुस सरकार को स्थिति संभालने की हिदायत देते हुए अखबारों के दफ्तरों पर हुए हमले पर चिंता जाहिर की तथा प्रेस की आजादी पर जोर दिया। उधर, बांग्लादेश लगातार तीसरे दिन भी धधक रहा है। ताजा आग छात्र नेता की मौत के बाद से भड़की है।

इस आग की चपेट में बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के घर के साथ-साथ शेख हसीना का घर भी आया और हिंसक भीड़ ने उन्हें आग के हवाले कर दिया। देश के दो बड़े अखबारों के दफ्तर भी भारी तोड़फोड़ के बाद आग के हवाले कर दिए गए। पत्रकारों की बमुश्किल जान बची।

जिस भारत विरोधी छात्र नेता ने भारत के पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को बांग्लादेश में मिलाने की दम्भोक्ति जताई थी, उस शरीफ हादी की हत्या ने यूनुस सरकार को बंगबंधु के देश में चुनाव टालने का मौका दे दिया। ये चुनाव फरवरी में होना हैं और बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों के साथ पाकिस्तान भी नहीं चाहता कि वहां पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शासन लौटे।

लिहाजा बांग्लादेश में हिंसा फिर से लौट आई है। इस हिंसा में एक बार फिर बांग्लादेश का हिंदू समुदाय व उसके मंदिर निशाने पर हैं। कट्टरपंथी बर्बर रूप से फिर भीड़ की शक्ल में सड़कों पर उतरे हुए हैं। एक हिंदू युवा की क्रूरता के साथ हत्या कर उन्होंने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं।

भारतीय दूतावास पर हमले के साथ भारत की सीमा तक पैदल मार्च निकाले जा रहे हैं और हिंदुस्तान को ललकारा जा रहा है। भारत में गुस्सा बढ़ गया है और अब सबकी नजर मोदी सरकार पर है कि वह पड़ोसी मुल्क में हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर क्या रुख अख्तियार करती है, क्योंकि ये डेढ़ साल में दूसरी बार हिंदुओं पर हमले का बांग्लादेश का दुस्साहस है, जो इस बार भारतीय दूतावास तक जा पहुंचा है।

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