कर दे भक्तों को निहाल बाबा रणजीत सरकार: कड़ाके की ठंड में भी रणजीत हनुमानजी के भक्तों का उमड़ा सैलाब
Khulasa First
संवाददाता

रणजीत अष्टमी पर बाबा की प्रभातफेरी में पहुंचे लाखों श्रद्धालु, भीड़ के सब रिकॉर्ड इस बरस भी टूटे
रातभर जागरण, सुबह 4 बजे से ही यात्रा मार्ग पर उमड़ा जनसैलाब, रोशनी में नहाया समूचा यात्रा मार्ग
भक्तों के स्वागत में बिछे पलक-पांवड़े, सैकड़ों स्वागत मंचों से हुआ सत्कार
चाय-दूध, पोहाजलेबी, समोसे-आलूबड़े, सेंव-मिक्चर, हलवा, कोल्ड्रिंक से लेकर मठरी-पपड़ी के लगे थे सैकड़ों स्टॉल
पुलिस-प्रशासन के पुख्ता बंदोबस्त ने बनाए रखा भक्तिमय माहौल, अराजक तत्वों पर कड़ी रही निगरानी
4 बजे ब्रह्ममुहूर्त से शुरू हुई प्रभातफेरी सुबह 10 बजे तक यात्रा मार्ग पर ही, भव्य नजारा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यूं तो पूरी रात ही शहर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में बाबा की भक्ति हिलोरें मारती रही। महूनाका चौराहा से फूटी कोठी और अन्नपूर्णा से लेकर नरेंद्र तिवारी मार्ग, दशहरा मैदान से लौटकर फिर महूनाका तक रात थी ही नहीं। नजारा ऐसा था, जैसे दिन निकला हो। ऐसा लगा जैसे लोग सोए ही नहीं।
ब्रह्ममुहूर्त का सबको इंतजार था, लेकिन भक्तों का सैलाब तो तड़के 3 बजे से ही उमड़ने लगा। भोर में बहुत देर थी और घड़ी के कांटे सुबह के 4 ही बजा रहे थे। शहर जहां रजाई में दुबका हुआ था, वहां बाबा रणजीत निकल पड़े प्रभातफेरी के रूप में नगर भ्रमण पर।
कल्पना नहीं कर सकते ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब सुबह 4 बजे। 5 बजते-बजते तो भक्ति का ये सैलाब हजारों को पार कर लाखों में पहुंच गया। चार-साढ़े चार किलोमीटर का समूचा यात्रा मार्ग जैसे ठसाठस हो गया हो। श्रद्धालुओं के जत्थे के जत्थे भुनसारे ही अपने आराध्य के लिए नतमस्तक हो चले।
श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरे यात्रा मार्ग पर जैसे पलक-पांवड़े बिछा दिए गए हों। दुल्हन की तरह सजे मार्ग पर सैकड़ों नहीं, हजार से भी ज्यादा स्वागत मंच सजे हुए थे। जितने मंच, उतने ही भक्तों के स्वागत आयटम। ऐसा क्या नहीं, जो भक्ति में डूबे भक्तों को मनुहार के साथ नहीं दिया जा रहा।
गरमागरम केसर व ड्रायफ्रूट्स के दूध से लेकर केसर की चाय। पोहे-जलेबी की तो भरमार थी। आलूबड़े, समोसे, कचोरी के हाल ये थे कि कितनी खाएं, कितनी घर ले जाएं। यहां तक कि मूंग का हलवा, मठरी, पपड़ी, नुक्ती, बिस्किट आदि-आदि। ऐसा कौन-सा इंदौरी स्वाद था, जो बाबा के भक्तों को परोसा नहीं गया।
यहां तक कि फलिहारी मिक्चर, लहसुन की सेंव से लेकर गरम जल तक की सेवा स्वागत मंचों से की गई। अधिकांश स्टॉल महिलाओं के हाथों में थे और वे बड़े उत्साह से श्रद्धालुओं को प्रसाद दे रही थीं। जो पहली बार आए थे, उन्हें तो समझ ही नहीं पड़ रही थी कि क्या खाएं और क्या छोड़ें। पोहे तो हाथ में ला-लाकर रखे जा रहे थे।
बाबा रणजीत सरकार का नयनाभिराम विग्रह बेहद सुसज्जित रथ में सवार था। रथ स्वर्ण-सी आभा से दमक रहा था। फूलों के शृंगार से सजे रथ की अगवानी मंदिर के पुजारी दीपेश व्यास गुरु ने की। उनके साथ शहरभर के संत-महंत चल रहे थे। रथ के आगे विभिन्न भजन मंडलियां, डीजे-बैंड पार्टियां और आस्था के साथ झूमते-गाते लाखो-लाख श्रद्धालुओं का सैलाब चल रहा था।
मंदिर से महूनाका का महज सवा-डेढ़ किमी का फासला बाबा रणजीत ने दो घंटे से भी ज्यादा समय में तय किया। सुबह 7.30 बजे प्रभातफेरी महूनाका से अन्नपूर्णा रोड पर आ गई थी।
यात्रा को दशहरा मैदान तक आने में करीब 10 बज गए। इस दौरान न सिर्फ यात्रा मार्ग, बल्कि सुदामा नगर, उषा नगर, महावर नगर, गुमास्ता नगर, द्रविड़ नगर आदि रहवासी इलाकों में भी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था। नरेंद्र तिवारी मार्ग और सेठी गेट से मंदिर तक का नजारा किसी लघुकुंभ-सा था। खबर लिखे जाने, यानी 10.30 बजे तक बाबा की प्रभातफेरी अन्नपूर्णा से लौटकर नरेंद्र तिवारी मार्ग ही पहुंची थी। मंदिर प्रांगण तक प्रभातफेरी 12 बजे तक भी नहीं पहुंच पाएगी।
कड़ाके की ठंड। पारा 4-5 डिग्री के बीच। बावजूद ऐसी भक्ति, ऐसा उत्साह... वाह! न भूतो न भविष्यती। अद्भुत! अभूतपूर्व! भक्ति का कोई ओर-छोर भी नहीं। जिस तरफ नजर घुमाओ, लाखो-लाख लोग। बाल-अबाल, नर-नारी, युवा-तरुण। हर आयु वर्ग के श्रद्धालु।
श्रद्धा से झुके मस्तक और जुबां पर जयकारा- जय रणजीत, जय-जय रणजीत। ऐसा गगनभेदी उद्घोष कि भुजाएं फड़क उठें। अवनी से अंबर तक एक ही जयघोष गुंजायमान। जिसने भी इस दृश्य को देखा, धन्य-धन्य हो गया। अहिल्यानगरी इंदौर के इष्ट देव रणजीत हनुमान लला की वार्षिक प्रभातफेरी जो थी।
चहुंओर से बरसते फूल, राम नाम की धुन, हनुमंत नाम के जयकारे, लहराती भगवा पताकाएं और भक्ति का लहराता जनसमुद्र। वाकई, बाबा रणजीत की प्रभातफेरी अब इस उत्सवमयी शहर का सबसे बड़ा धार्मिक समागम हो गई है।
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