अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी: 5 दिन से बैठे हैं धरने पर; बसंत पंचमी पर भी नहीं किया स्नान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, प्रयागराज।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बसंत पंचमी के बड़े स्नान पर्व पर भी दोपहर 1 बजे तक अविमुक्तेश्वरानंद स्नान के लिए नहीं निकले, जिससे मेला क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रशासन माफी मांगे
अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में कहा है कि “जब तक प्रशासन अपनी गलती स्वीकार कर माफी नहीं मांगता, तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा। प्रशासन नोटिस-नोटिस का खेल खेल रहा है। जब मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ, तो वसंत पंचमी का स्नान कैसे कर लूं?”
तबीयत खराब
उनके शिष्यों के अनुसार, आज सुबह से उनकी तबीयत ठीक नहीं है। उन्हें तेज बुखार है, इसी वजह से वे पूरे समय वैनिटी वैन में ही रहे और एक बार भी बाहर नहीं आए।
सीएम योगी का बयान
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना बयान दिया। उन्होंने कहा कि “किसी को भी परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। कुछ कालनेमि ऐसे हैं जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।”
डिप्टी सीएम केशव मौर्य की अपील
वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आजमगढ़ में कहा कि “मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वे स्नान कर इस विषय का समापन करें।”
सवा लाख शिवलिंग भी नहीं हो पाए स्थापित
विवाद का असर यह भी रहा कि अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में लाए गए सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना नहीं कर पाए। उनके शिष्यों ने बताया कि “शंकराचार्य जहां भी प्रवास करते हैं, वहां सबसे पहले शिवलिंग की स्थापना होती है। श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इस बार परंपरा पूरी नहीं हो सकी।”
मौनी अमावस्या से शुरू हुआ था विवाद
गौरतलब है कि, पूरा विवाद 18 जनवरी, मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, जिससे नाराज होकर वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
48 घंटे में दो नोटिस
इसके बाद प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए। पूछा गया कि क्यों न उन्हें माघ मेले से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाए। जवाब नहीं मिलने पर जमीन और सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी दी गई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया कि “ये नोटिस असंवैधानिक हैं। अगर वापस नहीं लिए गए तो मानहानि का मुकदमा करेंगे।”
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