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निगम को होने वाले राजस्व नुकसान के लिए एआरओ को जिम्मेदार ठहराया

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 जनवरी 2026, 11:07 पूर्वाह्न
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निगम को होने वाले राजस्व नुकसान के लिए एआरओ को जिम्मेदार ठहराया

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के द्वारा जोन 13 वार्ड 74 में 5309 संपत्तियों सर्वे कराया गया। उसमें से 2413 संपत्तियों के क्षेत्रफल में अंतर पाया गया। इससे निगम को करीब 6,74,54,096 के राजस्व का नुकसान होने का दावा किया गया।

इसके लिए तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी को जिम्मेदार बताकर निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए गए।

दो दिन तक किए गए इस सर्वे में करीब 11301 संपत्तियों के खातों की जांच कर उनका भौतिक सत्यापन किया गया। इसमें से 2413 संपत्तियों के क्षेत्रफल में अंतर पाया गया। इससे निगम को करीब 6,74,54,096 रुपए के राजस्व का नुकसान होने का दावा किया गया।

इसके बाद नेताओं और निगम अफसरों में विवाद हुआ और सर्वे बीच में ही रोक दिया गया, लेकिन सर्वे के दौरान संपत्तियों के क्षेत्रफल में अंतर पाए जाने का ठीकरा पूर्व में पदस्थ सहायक राजस्व अधिकारी पर थोप दिया गया।

इसके चलते अपर आयुक्त राजस्व ने निगमायुक्त के माध्यम से शासन तक शिकायत दर्ज कराई। अंतत: जो सहायक राजस्व अधिकारी इंदौर शहर से करीब सात सौ किलोमीटर दूर लहार नगर परिषद में पदस्थ था उसे जिम्मेदार बताकर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने निलंबित कर ट्रेंचिंग ग्राउंड अटैच करने के आदेश जारी कर दिए। निगमायुक्त और अपर आयुक्त की मिलीभगत से जारी इस आदेश को लेकर निगम में हडक़ंप मच गया है।

हर कोई अफसरों की अफसरशाही को कोस रहा है।

अफसरों की अफसरशाही का अनूठा कारनामा
कार्रवाई पर सवाल: निगम गलियारों में अपर आयुक्त और निगमायुक्त के द्वारा सहायक राजस्व अधिकारी पर की गई कार्रवाई से कई सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि अपर आयुक्त अपनी मनमानी करते हुए जानबूझकर एआरओ को टारगेट कर कार्रवाई कर रहे हैं।

इसके चलते ही अतुल रावत पर कार्रवाई की गई है। अन्यथा निगम सभी 22 जोन क्षेत्रो में सर्वे कराए और फिर देखे कि कितनी संपत्तियों के क्षेत्रफल में अंतर मिलता है। कहा जा रहा है कि राजस्व वसूली तो बहाना है, सहायक राजस्व अधिकारियों पर जानबूझकर कार्रवाई करने का अभियान अपर आयुक्त द्वारा शुरू किया गया है। इसका नतीजा है कि जो सहायक राजस्व अधिकारी इंदौर से दूर नौकरी कर रहा था उसे जानबूझकर दोषी ठहराया गया है।

महीनों से अटकी फाइलें: नगर निगम में अपर आयुक्त राजस्व की लापरवाही व मनमानी का कारनामा बताते हुए सूत्रों ने दावा किया कि अपर आयुक्त जानबूझकर एनओसी की कई फाइलों को महीनों तक दबाए रहते हैं, जिससे लोग परेशान हो रहे हैं।

बताया जाता है कि निगम से नए भवन निर्माण का नक्शा पास कराने वालों को राजस्व विभाग की एनओसी जमा करानी होती है, लेकिन अपर आयुक्त ने सभी कामकाज अपने हाथ में लेते हुए एनओसी जारी करने का जिम्मा भी खुद संभाल रखा है।

ऐसे में एनओसी की फाइलें शुभलाभ के लिए महीनों तक पेंडिंग रहती है। इससे लोग परेशान होते रहते हंै। निगमायुक्त को यह सब जानकारी होने के बाद भी वह अपरआयुक्त पर मेहरबान बने हुए हैं।

दागी को बढ़ावा: सूत्रों की माने तो अपर आयुक्त राजस्व के इर्दगिर्द निगम के घोटालेबाजों ने घेरा बना लिया है। इसके चलते वह सहायक राजस्व अधिकारियों को कामचोर बताने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इसके चलते ही तीन जोन के सहायक राजस्व अधिकारियों को नोटिस जारी कराए और राजस्व नुकसान का ठीकरा भी एआरओ के सिर फोड़कर उसे निलंबित करा दिया।

आने वाले दिनों में कई एआरओ को हटाकर अपनी पसंद के दागी अफसरों को कुर्सी सौंपने की प्लानिंग पर कामकाज शुरू हो गया है। इसमें निगमायुक्त को भी गुमराह कर शामिल करने की जुगत भिड़ाई जा रही है।

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