खबर
Top News

इस शहर के माथे पर एक और मौत का कलंक: जानिये दूषित पानी से अब कितने लोगों की जान गई, जिम्मेदार अभी भी लापरवाह

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 जनवरी 2026, 5:41 पूर्वाह्न
953 views
शेयर करें:
इस शहर के माथे पर एक और मौत का कलंक

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के दामन पर भागीरथपुरा की त्रासदी ने ऐसा गहरा दाग लगा दिया है, जिसे धो पाना अब मुमकिन नहीं है। जिस शहर को हम स्मार्ट कहते नहीं थकते, उसी शहर के एक हिस्से में सरकारी नलों से अमृत नहीं बल्कि यमराज की कालिख उतर रही है।

तमाम सफेद झूठ का खुलासा
रविवार सुबह सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम बोरासी की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासन के उन तमाम सफेद झूठ का भी खुलासा हो गया, जिनके पीछे अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश की जा रही थी।

मौतों का अनौपचारिक आंकड़ा अब 28 तक जा पहुंचा
राजाराम बोरासी की मौत के साथ ही इस दूषित जल कांड में होने वाली मौतों का अनौपचारिक आंकड़ा अब 28 तक जा पहुंचा है, लेकिन शर्मनाक पहलू यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौतों और दूषित पानी के बीच संबंध खोजने का कुतर्क गढ़ रहे हैं।

सीधा संबंध जहरीले पानी से
बोरासी को शनिवार को गंभीर हालत में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके दिल ने महज 20 प्रतिशत काम करना शुरू कर दिया था। डॉक्टरों ने निमोनिया और हृदय संबंधी गंभीर विकृतियों की पुष्टि की थी, जिसका सीधा संबंध उस जहरीले पानी से है जो पिछले कई दिनों से भागीरथपुरा की रगों में घोला जा रहा है।

आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त प्रशासन
विडंबना देखिए कि जब पीड़ित का बेटा, जो स्वयं मीडिया जगत का हिस्सा है, कलेक्टर से लेकर तमाम आला अधिकारियों को स्थिति की भयावहता से अवगत करा रहा था, तब प्रशासन अपनी छवि चमकाने और आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त था।

आयुष्मान कार्ड से इलाज होना ही सब कुछ है क्या
कल तक जो तंत्र दूषित पानी की बात को सिरे से खारिज कर पूरी बेशर्मी के साथ सब ठीक है का राग अलाप रहा था, आज उसकी चुप्पी चीख-चीखकर अपनी विफलता स्वीकार कर रही है। क्या प्रशासन यह बताएगा कि आयुष्मान कार्ड से इलाज होना क्या किसी की जान की भरपाई कर सकता है?

सिस्टम द्वारा किया गया नरसंहार स्थल
क्या फाइलों में बंद जांच रिपोर्ट उन मासूमों और बुजुर्गों को वापस ला पाएगी जो नगर निगम की पाइपलाइनों में दौड़ते भ्रष्टाचार और लापरवाही के शिकार हो गए? भागीरथपुरा आज एक मोहल्ला नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा किया गया नरसंहार स्थल बन चुका है।

वहां की हवाओं में मातम है और नलों में मौत का रिसाव जारी है, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे नुमाइंदों की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

प्रशासनिक तंत्र की अर्थी
आज दोपहर जब 185 भागीरथपुरा से राजाराम बोरासी की अंतिम यात्रा मालवा मिल मुक्तिधाम की ओर बढ़ेगी, तो वह केवल एक पार्थिव शरीर नहीं होगा, बल्कि वह इंदौर के उस प्रशासनिक तंत्र की अर्थी होगी जो जनता को शुद्ध पानी तक मुहैया कराने में अक्षम साबित हुआ है।

28 बलिदानों का हिसाब आखिर कौन देगा
शहर के माथे पर लगे इन 28 बलिदानों का हिसाब आखिर कौन देगा? क्या जनता की जान इतनी सस्ती है कि उसे कागजी स्पष्टीकरणों और झूठे आश्वासनों की भेंट चढ़ा दिया जाए? यह त्रासदी दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा की गई वह हत्या है जिसमें हथियार दूषित पानी है और कातिल नगर निगम की लापरवाही।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!