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भाजपा मुख्यालय में वर्चस्व के लिए ‘त्रि-गुट’ की अदृश्य जंग…!

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जहां संगठन में नई ऊर्जा और उत्साह भरने के लिए लगातार नवाचार में जुटे हैं, वहीं प्रदेश कार्यालय में तीन महत्वाकांक्षी पदाधिकारियों के बी

Khulasa First

संवाददाता

08 दिसंबर 2025, 12:00 अपराह्न
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भाजपा मुख्यालय में वर्चस्व के लिए ‘त्रि-गुट’ की अदृश्य जंग…!

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जहां संगठन में नई ऊर्जा और उत्साह भरने के लिए लगातार नवाचार में जुटे हैं, वहीं प्रदेश कार्यालय में तीन महत्वाकांक्षी पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की अदृश्य जंग छिड़ी हुई है। हालत यह है कि भाजपा मुख्यालय मानो अजब-गजब ‘त्रि-गुट’ में बंट चुका हो।

बेचारे कार्यकर्ता संगठन की सेवा करने आते हैं, पर यहां पहला सवाल यही होता है किसकी सेवा? यदि कोई कार्यकर्ता किसी एक पदाधिकारी के साथ बैठ जाए, तो दूसरे की निगाहें ऐसे चुभती हैं मानो बड़ी भूल कर दी हो और अगर दूसरा खुश हो जाए तो तीसरे की भौंहें ऐसे तन जाती हैं जैसे पार्टी से गद्दारी कर बैठे हों।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि तीनों पदाधिकारी पार्टी एजेंडे को अंजाम देने की जगह फिलहाल ‘वर्चस्व एजेंडे’ की साधना में जुटे दिखाई देते हैं। नारदजी कहते हैं कि आखिर कुलीनों की पार्टी में यह सब चल क्या रहा है?

इंदौर में ‘स्व-विनाश’ मिशन पर कांग्रेस
प्रदेश में इन दिनों एक ही चर्चा है कि प्रदेश कांग्रेस के मुखिया ‘इंदौरी भिया’ से अपना घर ‘इंदौर’ तो संभल नहीं रहा और ठेका ले लिया पूरे प्रदेश को तराशने का। यह आरोप खुद कांग्रेस के अपने सिपहसालार लगाए घूम रहे हैं। अब देखिए न शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले प्रदेश के सबसे कद्दावर नेता की बेइज्जती की।

बात यहीं खत्म नहीं हुई, शहर के कार्यवाहक अध्यक्ष को तो खुलेआम देख लेने की धमकी तक दे डाली, लेकिन प्रदेश के मुखिया ‘इंदौरी भिया’ ने न तो उद्दंड नेता पर कोई कार्रवाई की और न उसे समझाने तक की जहमत ही उठाई। इन सबके वीडियो वायरल, चर्चा जोरदार… मगर ‘इंदौरी भिया’ चुप्पी ओढ़े बैठे हैं। नारदजी तो यह सब देखकर यही कहेंगे कि लगता है इंदौर में कांग्रेस ‘स्व-विनाश मिशन’ पर निकल पड़ी है।

विधानसभा में मोबाइल चोरी, उंगली मीडिया पर!
राजधानी की सबसे सुरक्षित और चौक-चौबंद मानी जाने वाली जगह मध्यप्रदेश विधानसभा। यहां प्रवेश के लिए पहचान-पत्रों की लंबी परेड और सुरक्षा जांच के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन इसी विधानसभा की जनसंपर्क शाखा से एक कर्मचारी का मोबाइल शीतकालीन सत्र के दौरान चोरी हो गया।

घटना उस समय हुई जब मीडिया पर्सन्स को प्रवेश-पत्र जारी किए जा रहे थे। मोबाइल ऐसे गायब हुआ, जैसे कभी-कभी बजट में किए गए वादे गायब हो जाते हैं। मजेदार यह कि संदेह मीडिया पर्सन्स पर ही है, क्योंकि उस शाखा में मीडिया पर्सन्स के अलावा किसी और का प्रवेश लगभग नामुमकिन है।

यह पहली बार नहीं हुआ, पिछले साल भी इसी शाखा से एक कर्मचारी का मोबाइल हवा हो गया था। तब भी उंगलियां मीडिया पर्सन्स की ओर ही उठी थीं। नारदजी कहते हैं कि जब सत्ता के गलियारों में ईमानदारी चाय-समोसे की तरह सस्ती हो तो मोबाइल चोरी कोई ताज्जुब की बात है क्या?

बाढ़ वाले ‘गणेश’, दाढ़ी वाले ‘मुकेश’
‘मामाजी’ के विदिशा में भाजपा का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी के पार्षदों ने बगावत कर रखी है, यह विद्रोह पार्टी के खिलाफ नहीं, अपने ही विधायक के विरुद्ध है। आरोपों की लंबी फेहरिस्त-भ्रष्टाचार, मनमानी और नगर पालिका के हर काम में बेवजह हस्तक्षेप।

इसी नाराजगी के चलते कभी धरना तो कभी मशाल जुलूस तो कभी शवयात्रा...शहर में हड़कंप मच रहा है और उधर मामाजी सब जानते हुए भी चुपचाप सब देख रहे हैं। भोपाल से दिल्ली तक उनकी किरकिरी हो रही है मगर मौन जैसे उनके राजनीतिक आचरण का नया शस्त्र बन गया हो।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता नारदजी से कहते हैं कि विदिशा को मामाजी ने दो महत्वपूर्ण ‘उपहार’ दिए-बाढ़ वाले गणेश और दाढ़ी वाले मुकेश...! पहला तो मुश्किल घड़ी में जनता के काम आ ही जाता है, लेकिन दूसरा बस विवादों में ही नाम कमा रहा है।
थानेदार साहब का तो जलवा है!

भोपाल के नए शहर के एक थानेदार साहब भले लाइन अटैच हो गए हों, पर उनका जलवा कायम है। आलीशान कोठी और होटल बनवाने के बाद उनके द्वारा भोपाल में किसी बिल्डर के संग बड़ी कॉलोनी काटे जाने की सर्वत्र चर्चा है। इसके अलहदा, ये साहब रहे तो एक थाने के थानेदार, लेकिन इनका रुतबा पूरे भोपाल के थाना क्षेत्रों में चलता है।

वो इसलिए कि, थानेदार साहब एक मंत्री और पीएचक्यू में बैठे एक बड़े साहब की बदौलत भोपाल के ज्यादातर थानों में थानेदारी कर चुके हैं। नारदजी कहते हैं कि काम कैसा भी हो, छोटा-बड़ा, उलझा, फंसा, जमीन का, परिवार का, इनके पास हर काम का तोड़ है, पर थानेदार साहब का एक ही सिद्धांत है- काम कैसा भी लाओ, उस पर वजन पहले रख जाओ।

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