अयोग्य डॉक्टर के इलाज से मां की मौत का आरोप: कलेक्टर की जनसुनवाई में बेटे की पीड़ा; सीएमएचओ और पुलिस पर गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कलेक्टर जनसुनवाई में एक बेटे का दर्द उस वक्त सामने आया जब उसने एक साल पहले अपनी मां की कथित रूप से गलत इलाज से हुई मौत के मामले में दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित रोहन चौहान ने आरोप लगाया कि अयोग्य डॉक्टर द्वारा अवैध रूप से एलोपैथी इलाज किए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उलटे, केवल एक एफिडेविट के आधार पर बिना किसी लिखित आदेश के क्लिनिक की सील खोल दी गई, जो कानून और जनहित दोनों के खिलाफ है।
रोहन चौहान का कहना है कि उनकी माता के उपचार से संबंधित प्रकरण में सीएमएचओ इंदौर द्वारा की गई आधिकारिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि बीईएमएस चिकित्सक द्वारा अवैध रूप से एलोपैथी पद्धति से इलाज किया गया, जो दंडनीय अपराध है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डॉ. श्रीचंद बांगेचा ने अपनी अयोग्यता के बावजूद गंभीर इंजेक्शन और दवाइयां लगाईं, जिससे उनकी मां की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद संबंधित चिकित्सक और क्लिनिक संचालक के विरुद्ध न तो कठोर कार्रवाई की गई और न ही सक्षम न्यायालय या सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना क्लिनिक को दोबारा संचालित करने से रोका गया।
एफिडेविट के आधार पर क्लिनिक खोलना कानून सम्मत नहीं
पीड़ित का आरोप है कि सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट में अपराध की पुष्टि होने के बावजूद केवल एफिडेविट पर कार्रवाई रोक दी गई। रोहन ने सवाल उठाया कि यदि एफिडेविट ही अपराध खत्म करने का आधार बन जाए तो कोई भी आरोपी इस तरह बच सकता है।
सरकारी जांच में जब अपराध सिद्ध हो चुका है तो एफिडेविट के आधार पर क्लिनिक खोलना कानून सम्मत नहीं है। बिना एफआईआर दर्ज किए क्लिनिक को खोलना आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि पुलिस, सीएमएचओ और कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते आरोपी खुलेआम क्लिनिक चला रहे हैं, जिससे अन्य लोगों की जान भी खतरे में है। उन्होंने मांग की कि सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन
रोहन ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी डॉक्टर स्वयं को एमबीबीएस बताता है तो वह किसी भी रूप में उक्त क्लिनिक से जुड़ा नहीं रह सकता। जांच रिपोर्ट में जिन डॉक्टरों को आरोपी बताया गया है, उनके खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई आवश्यक है।
सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जूनी इंदौर थाना प्रभारी को लिखे पत्र में बताया गया है कि बीईएमएस अहर्ताधारी कएलोपैथी इलाज नहीं कर सकते। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा संस्थान अधिनियम 1973 की धारा 7(ग) तथा धारा 8(2) और मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 21 व 24 के तहत यह कृत्य दंडनीय है।
इसके बावजूद अब तक अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया है। पीड़ित रोहन चौहान ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। जांच पूर्ण होने तक क्लिनिक को पुनः सील किया जाए।
संबंधित समाचार

NEET पीजी काउंसलिंग में इस कोटे पर छात्रों को राहत:हाईकोर्ट की किस खंडपीठ ने क्या कहा; अब किससे मांगा जवाब

पर्दे की आड़ में युवती के साथ क्या किया:किस बहाने ले गया था युवक; पुलिस ने किसे किया गिरफ्तार

युवती ने युवक को ऐसे कैसे पीटा:साथी युवक ने क्या पकड़ रखा था; वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा

राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) इस दिन होगी:100 परीक्षा केन्द्रों पर इतने हजार परीक्षार्थी होंगे शामिल; इन दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!