आक्रामकता या आत्मघाती अंदाज: क्या इस स्टार क्रिकेटर का अब खुद के खेल पर विचार जरूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, हेमंत उपाध्याय।
सर्वकालिक महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर का कहना है कि अभिषेक शर्मा में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें 'बहादुरी' और 'मूर्खता' के बीच का अंतर समझना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेंदबाज आपकी पहली ही गेंद की मानसिकता को भांप लेते हैं। और अब टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की बात भी पढ़िये- "अगर आप पहली गेंद पर छक्का मारने की कोशिश में जीरो पर आउट होते हैं, तो आप टीम को दबाव में छोड़ रहे हैं। इरादा अथवा नीयत अच्छी है, लेकिन जिम्मेदारी भी जरूरी है।"
और ध्वस्त हो गईं उम्मीदें
बताइये क्या अभिषेक शर्मा अब यही सब नहीं कर रहे हैं। शोर भरे कोलंबो के आर.प्रेमदासा स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 विश्व कप क्रिकेट मुकाबले में जब अभिषेक शर्मा मैदान में उतरे तो उम्मीदें और उत्साह चरम पर था, लेकिन यह क्या चार गेंदों के बाद ही भारतीय उम्मीदें ध्वस्त हो गईं। सलमान अली आगा ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर ही उन्हें शाहीन शाह आफरीदी के हाथों कैच करवाकर वापस पवेलियन भेज दिया।
खासियत को कमजोरी बनाने पर तुले हैं गेंदबाज
मतलब गेंदबाज अब इस सितारा बल्लेबाज की खासियत को कमजोरी बनाने पर तुले हैं। सलमान की गेंद पर बड़ा शॉट जमाने के प्रयास में अभिषेक आउट हो गए। सलमान ने बैक ऑफ लेंथ गेंद मिडिल-लेग लाइन पर डाली और इस पर अभिषेक ने अपनी शैली में बड़ा शॉट लगाने का प्रयास किया, लेकिन टाइमिंग गड़बड़ाया और गेंद सीधे मिड ऑन पर खड़े शाहीन के हाथों में जाकर समा गई।
शैली के कारण संघर्ष भी
यदि अभिषेक शर्मा की पिछली पांच अंतरराष्ट्रीय पारियों पर नजर डालें, तो वे अपनी शैली के कारण संघर्ष करते ही नजर आ रहे हैं। अमेरिका के खिलाफ मुकाबले से पहले वे पेट से परेशान थे। इसके बावजूद मैदान में उतरे और शून्य अपने साथ लेकर गए। नामीबिया के विरुद्ध मुकाबले को उन्होंने तबीयत और अस्पताल में भर्ती रहने के कारण मिस किया। विश्व कप से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में तीसरे मैच में जब उन्होंने 20 गेंदों पर 68 रन कूट डाले तो उम्मीदें परवान चढ़ी, लेकिन चौथे मैच में भी उन्हें शून्य मिला और अंतिम मैच में 16 गेंदों पर 30 रन उनके खाते में लिखे गए।
निडरता ही बन रही कमजोरी
जानकारों का कहना है कि क्रिकेट की इस युवा सनसनी का प्रदर्शन निरंतरता का आवरण नहीं ओढ़ पा रहा है। अभिषेक की सबसे बड़ी ताकत 'निडरता' ही अब उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती दिखाई दे रही है। वे क्रीज पर अंगद की तरह जमने में विफल हो रहे हैं। पिछली 6 अंतरराष्ट्रीय पारियों में 3 बार शून्य पर आउट होना इस बात को पुष्ट करता है।
इरफान और पारस म्हाम्ब्रे की राय
पूर्व भारतीय खिलाड़ी इरफान पठान कहते हैं- "विश्व कप जैसे बड़े मंच पर टीमें होमवर्क करके आती हैं। आप हर गेंदबाज को पहली ही गेंद पर स्टेप-आउट यानी क्रीज से बाहर निकलकर खेलना नहीं कर सकते, आक्रामकता के पीछे ठोस तर्क होना जरूरी है। पूर्व गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे कहते हैं कि अभिषेक शॉर्ट पिच गेंदों पर जल्दी फ्रंट फुट पर कमिट कर देते हैं, जिससे उनका संतुलन बिगड़ता है । वे शरीर पर आती गेंदों पर असहज नजर आते हैं।
क्रिकेट के जानकारों की राय यह भी है कि अभिषेक को अपनी शैली के साथ यह भी ध्यान रखना होगा कि उनका ज्यादा समय बिताना ही भारत को ऐसी शुरुआत देगा जिससे विपक्षी टीम मुश्किल में आ जाएगी, जहां गुंजाइश हो वहीं गेंद को आसमान का रास्ता दिखाया जाए, गेंदबाज और पिच का ध्यान रखें और एक-दो रन से ही संतोष कर अपनी पारी को आगे बढ़ाएं।
अभिषेक शर्मा को अपनी यह बात याद होगी-"यह मेरा सपना है कि मैं विश्व कप में भारत के लिए खेलूं और जीतूं। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं और विश्व स्तरीय गेंदबाजों के सामने खुद को साबित करना चाहता हूं।"
और अब वे अपने पिता राजकुमार शर्मा की इस बात पर गौर करेंगे-"मैंने उसे कई बार कहा है कि काके (बेटा) सिंगल भी लिया कर, लेकिन अब मैंने कहना छोड़ दिया है। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि वह क्रीज पर थोड़ा और समय बिताए।"
संबंधित समाचार

डिलीवरी बॉय ने की आत्महत्या:रिश्तेदार युवती बना रही थी दबाव; देर रात दोनों के बीच हुई थी बातचीत

617 नवआरक्षकों ने ली देश सेवा की शपथ:रुस्तमजी पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में संयुक्त दीक्षांत परेड

मां और बहन से मारपीट दुष्कर्म की धमकी:युवक ने रिश्तेदारों और परिचितों के खिलाफ की शिकायत

100 करोड़ के ऑनलाइन सट्टा रैकेट पर बड़ा एक्शन:सर्वर प्रोवाइडर गिरफ्तार; IPL सीजन के एक करोड़ वसूलता था आरोपी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!