सचिव पद की दावेदार एडवोकेट दीप्ति गौर का नामांकन निरस्त: सबसे दिलचस्प मुकाबला अध्यक्ष पद के लिए
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसो. की चुनावी बिसात बिछते ही विधिक गलियारों में गर्माहट बढ़ गई है। 28 जनवरी को मतदान के लिए सोमवार शाम जैसे ही प्रत्याशियों की अंतिम सूची चस्पा हुई विवाद के स्वर मुखर हो गए।
चुनावी समर की इस उठापटक में सबसे बड़ा उलटफेर सचिव पद की दावेदार एडवोकेट दीप्ति गौर के नाम को लेकर हुआ। निर्वाचन समिति ने अंतिम समय पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया, जिसके बाद चुनावी माहौल में अचानक तनाव और कानूनी चुनौती की स्थिति पैदा हो गई है।
इस विवाद की जड़ में निर्वाचन समिति का वह तर्क है जिसमें कहा गया है कि दीप्ति गौर की प्रस्तावक समर्थक रितू भार्गव ने ऐन वक्त पर समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना समर्थन लिखित में वापस ले लिया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार समर्थक के पीछे हटने की स्थिति में नामांकन पत्र स्वतः ही अपात्र हो गया।
हालांकि, इस फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है, क्योंकि एडवोकेट दीप्ति गौर ने इसे सीधे तौर पर प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है। गौर का आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन समिति में शामिल कुछ सदस्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी।
उनकी शिकायत पर गौर करने के बजाय समिति ने उनका नाम ही सूची से गायब कर दिया। गौर ने कड़े लहजे में कहा कि जब जांच में उनका नामांकन पहले सही पाया गया था, तो समिति को इसे हटाने का अधिकार नहीं है और अब वे इस अन्याय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।
विवादों के इस साये के बीच बार एसोसिएशन के विभिन्न पदों के लिए चुनावी चेहरा अब पूरी तरह साफ हो चुका है। सबसे दिलचस्प मुकाबला अध्यक्ष पद के लिए देखने को मिलेगा, जहां पांच दिग्गज अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
अंतिम सूची के अनुसार गौरव श्रीवास्तव, गोविंदपाल सिंह सोनगरा, मनीष जैन, मनीष यादव और पवन जोशी के बीच कांटे की टक्कर है। वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए भी रस्साकशी कम नहीं है, यहां अभिषेक तुगनावत, अपूर्वा शुक्ला, भावना साहू, धर्मेंद्र साहू और मधुसूदन यादव मैदान में डटे हुए हैं।
सचिव पद पर अब गोविंदराज पुरोहित, मनीष गड़कर और निलेश मनोरे के बीच त्रिकोणीय मुकाबला शेष रह गया है, जबकि सहसचिव पद के लिए अमृत राज और ज्ञानेंद्र शर्मा के बीच सीधा मुकाबला होगा।
दूसरी ओर, कार्यकारिणी सदस्य के पांच पदों के लिए आठ उम्मीदवारों की मौजूदगी ने इस मुकाबले को पदाधिकारियों की तुलना में थोड़ा सरल बना दिया है।
चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही
निर्वाचन समिति के मीडिया प्रभारी एडवोकेट अजय मिश्रा ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है, लेकिन दीप्ति गौर के कानूनी रुख ने अब पूरी चुनावी प्रक्रिया पर न्यायिक हस्तक्षेप का साया डाल दिया है।
आने वाले दिन तय करेंगे कि 28 जनवरी को होने वाला यह मतदान बिना किसी कानूनी अड़चन के संपन्न होता है या हाईकोर्ट की सुनवाई इसमें कोई नया मोड़ लेकर आती है।
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