यूनिपोल लगाने के मामले में जांच के फेर में उलझी विज्ञापन कंपनी
Khulasa First
संवाददाता

निगम अफसर, नेता और दीपक एडवरटाइजिंग विज्ञापन कंपनी के कर्ताधर्ताओं की मिलीभगत से नहीं होती कार्रवाई
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सूत्रो की माने तो नगर निगम में अफसरो की अफसरशाही हावी है। इसके चलते जो अफसर जिस जगह है उसने अपनी कमाई के रास्ते वहीं तैयार कर लिए हैं। इसके चलते ही मार्केट विभाग को टुकड़ों में बांटकर हार्डिग माफिया अपनी मनमानी कर रहा है। विज्ञापन के नाम पर निगम अफसरों और नेताओं से मिलीभगत कर दीपक एडवरटाईजिंग कंपनी के द्वारा शहर में मनमाने तरीके से यूनिपोल लगाकर विज्ञापन कर कमाई की जा रही है। जबकि विज्ञापन कंपनी के द्वारा बनाए गए यूनिपोल, विज्ञापन बोर्ड, कैमरे आदि सबकुछ नियम के विपरीत है।
इस मामले का खुलासा होने के बाद निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने जांच कराई और शहर में बिना अनुमति के लगाए गए कतिपय विज्ञापन बोर्ड हटवाकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जबकि डिवाइडर, चौराहों और ब्रिज से सटकार बनाए गए यूनिपोल का मामला दबा दिया।
इसी तरह वर्षो से विज्ञापन कंपनी का कर्ताधर्ता मिलीभगत कर अपना कारोबार फैलाता जा रहा है। सूत्रों की माने तो दीपक एडवरटाईजिंग कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने पहले ग्वालियर में विज्ञापन का ठेका लिया था इसके बाद पूरे ग्वालियर शहर में मनमाने तरीके से यूनिपोल लगवाकर अपनी कमाई शुरू कर दी। उसी तर्ज पर विज्ञापन कंपनी ने इंदौर शहर में भी अपने पैर पसार लिए है। इसमें निगम अफसर पूरी तरह विज्ञापन कंपनी पर मेहरबान बने हुए है।
नगर निगम से विज्ञापन के लिए यूनिपोल बनाने और विज्ञापन लगाने का ठेका ग्वालियर की दीपक एडवरटाइजिंग कंपनी ने वर्ष 2019 में लिया। टेंडर के मुताबिक शहर के बायपास सहित कुछ क्षेत्रो का ठेका इस कंपनी को मिला, लेकिन निगम अफसर, नेता और कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने आपस में मिलीभगत का खेल रचा कि विज्ञापन कंपनी ने पूरे शहर में डिवाइडर, चौराहों व ब्रिज के साइड में यूनिपोल खड़े कर दिए। नियम विरुद्ध बनाए गए यूनिपोल की शिकायत के बाद भी इसके खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारियों के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
ईओडबल्यू की जांच
बताया जाता है कि होर्डिंग माफिया दीपक जेठवानी के खिलाफ ईओडबल्यू ने ग्वालियर में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है, इस मामले में ग्वालियर के निगम अधिकारी सहायक नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया, आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा, अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त वित्त देवेन्द्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जेपी पारा और उपायुक्त विज्ञापन सुनील सिंह चौहान के नाम शामिल है।
इस तरह निगम अफसरों की मिलीभगत का खुलासा ईओडबल्यू की जांच में हो सकता है। दीपक एडवरटाइजिंग के कर्ताधर्ताओं ने ग्वालियर निगम को करीब 54 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। मामले में जांच हो रही है। इसी तरह इंदौर में भी होर्डिंग माफिया दीपक एडवरटाईजिंग के अवैध होर्डिंग मामलों की जांच निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने शुरु कराई है। जब कि निगमायुक्त के मातहत अफसर इस जांच को दबाने में जुट गए है।
नामचीन विज्ञापन
शहर में यूनिपोल लगाकर विज्ञापन करने के मामले में दीपक एडवरटाइजिंग विज्ञापन कंपनी जांच के दायरे में आ गई है। कंपनी के कर्ताधर्ता शहरभर में नियम विरुद्ध बनाए गए यूनिपोल बनाकर व होर्डिंग पर नामी प्रोडक्ट्स के विज्ञापन लगाकर करोड़ों रुपए कमाई की जा रही है। गौरतलब है कि दीपक एडवरटाइजिंग के कर्ताधर्ता दीपक जेठवानी ने पीआरजे आउटडोर के नाम पर ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल के साथ ही इंदौर शहर में निगम के अधिकारियों से मिलीभगत कर निगम को पलीता लगा रहा है।
एक यूनिपोल 4 लाख रुपए
शहर में यूनिपोल पर विज्ञापन लगाने की कीमत को लेकर बताया जाता है कि एक यूनिपोल पर विज्ञापन लगाने के लिए करीब चार लाख रुपए मिलते हैं। शहर में दीपक एडवरटाइजिंग कंपनी ने मनमाने तरीके से यूनिपोल लगाकर हर माह करोड़ों रुपए की अतिरिक्त कमाई शुरू कर दी है।
इसकी जानकारी निगम अफसरो को भी है। लेकिन कभी भी निगम अफसर डिवाइडर, चौराहो आदि स्थानों पर बनाए गए यूनिपोल हटाने की कार्रवाई नहीं करते हंै। अब तक एक ही यूनिपोल हटाने की कार्रवाई हुई वह भी एमआईसी सदस्य नंद किशोर पहाड़िया ने आमजन की सुरक्षा को देखते हुए कराई थी।
लेकिन बाद में उनको पता चला कि यूनिपोल बनाने की अनुमति निगम अफसर ही दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि होर्डिंग माफिया दीपक एडवरटाइजिंग ने सात साल के लिए टेंडर लिया है। इसके चलते विज्ञापन कंपनी के कर्ताधर्ता ने शहर में पैर पसारते हुए मनमाने तरीके से यूनिपोल लगाकर विज्ञापन से कमाई कर रहा है। इससे विज्ञापन कंपनी को हर महीने अवैध होडिंग से करीब दो करोड़ की अतिरिक्त कमाई होती है।
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