सुरक्षा के उल्लंघनों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन इतनी देरी क्यों: अवैध पटाखा कारोबार को पनपने देना प्रशासन की सुस्ती
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कलेक्टर शिवम वर्मा के तथाकथित सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासन की सुस्ती और निगरानी की कमी ने एक बार फिर प्रशासन को सवालों के घेरे में ला खड़ा...
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कलेक्टर शिवम वर्मा के तथाकथित सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासन की सुस्ती और निगरानी की कमी ने एक बार फिर प्रशासन को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
राऊ क्षेत्र में पटाखों का खुलेआम अवैध विक्रय और एक फीड प्रोडक्शन यूनिट की सुरक्षा के उल्लंघनों पर कार्रवाई तो हुई लेकिन कार्रवाई में देरी क्यों? क्या प्रशासन की आंखें बंद करके अवैध कारोबार को पनपने देना अब नई रणनीति बन गई है?
राऊ के प्रशासनिक अमले ने कथित रूप से दो स्थानों पर प्रभावी छापेमारी की, लेकिन सच्चाई यह है कि चांद सितारा पटाखा हाउस जैसे प्रतिष्ठान लंबे समय से अवैध व्यापार चला रहे थे और अब जाकर दुकान सील की गई।
एसडीएम गोपाल वर्मा का दावा है कि जांच में अवैध बिक्री पकड़ी गई, लेकिन सवाल उठता है आखिर इतने दिनों तक निगरानी टीम कहां सोई हुई थी? इसी तरह ग्रो वेल फीड प्रोडक्शन यूनिट में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ रही थीं आवश्यक अनुमतियां गायब थीं, मापदंडों का उल्लंघन हो रहा था और प्रशासन को अब जाकर होश आया। यूनिट को सील करना तो ठीक, लेकिन जनता की सुरक्षा को दांव पर लगाने वाली इस लापरवाही के लिए जवाबदार कौन?
कार्रवाई महज दिखावे की
कलेक्टर शिवम वर्मा का बयान सुनने में तो कड़ा लगता है जनसुरक्षा, कानून व्यवस्था और शासकीय नियमों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयान देती है। अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं और कार्रवाई महज दिखावे की। क्या यह निरंतर कार्रवाई का दावा केवल कागजों तक सीमित है?
जनता को लग रहा है कि प्रशासन की यह कड़ी चेतावनी सिर्फ आंकड़ों को चमकाने का जरिया बन गई है, न कि वास्तविक समाधान। इस घटना ने एक बार फिर जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध कारोबार को रोकने के बजाय बाद में सीलिंग का नाटक क्यों?,
क्योंकि सरकारी लापरवाही बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। पिछले दिनों हुई अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगने की घटना ने आखिरकार प्रशासन की नींद खोल दी है। प्रशासन कार्रवाई का ढोंग रच रहे हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि कब तक यह नौटंकी चलेगी और कब जिम्मेदारी तय होगी?
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