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निगम में 6 करोड़ का स्विमिंग पूल घोटाला: नेहरु पार्क स्विमिंग पूल निर्माण में निगम अधिकारी; नेता और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया निर्माण उद्घाटन से पहले ही टूटा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । नगर निगम द्वारा नेहरू पार्क में करीब छह करोड़ रुपए की लागत से स्विमिंग पूल का निर्माण कराया जा रहा है। स्विमिंग पूल बनने से पहले ही उसके घटिया निर्माण का खुलासा हो गया। इससे निग...

Khulasa First

संवाददाता

18 दिसंबर 2025, 8:16 पूर्वाह्न
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निगम में 6 करोड़ का स्विमिंग पूल घोटाला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
नगर निगम द्वारा नेहरू पार्क में करीब छह करोड़ रुपए की लागत से स्विमिंग पूल का निर्माण कराया जा रहा है। स्विमिंग पूल बनने से पहले ही उसके घटिया निर्माण का खुलासा हो गया। इससे निगम में हड़कंप मच गया है। लोग चटकारे लेकर छह करोड़ के स्विमिंग पूल घोटाले की चर्चा कर रहे हैं।

नगर निगम अफसर, नेता और ठेकेदारों की मिलीभगत से नेहरू पार्क में बनाए जा रहे स्विमिंग पूल के घटिया निर्माण का खुलासा हो गया है। बताया जाता है कि स्विमिंग पूल का निर्माण इसी माह पूरा होना था और 25 दिसंबर को महापौर पुष्यमित्र भार्गव इसका उदघाटन करने वाले थे, लेकिन निर्माणाधीन स्विमिंग पूल में पानी भरा जाता, उससे पहले ही उसके निर्माण की परतें उखड़ना शुरू हो गई।

जगह-जगह टाइल्स टूटने और उखड़ने लगी। इस मामले का खुलासा होते ही निगम में हड़कंप मच गया। हर कोई महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव से इस घटिया निर्माण की शिकायत कर जबाब मांगने लगे।

इससे मौजूदा में निगम गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि स्वीमिंग पूल निर्माण के नाम पर एक बार फिर निगम अफसर, नेता और ठेकेदार ने घोटाला कर दिया।

इनका कहना है
स्विमिंग पूल निर्माण को लेकर एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया का कहना है कि ठेकेदार ने पहले टाइल्स लगाए फिर निर्माण किया इस कारण टाइल्स पर मलबा गिरने से वह खराब हो गए हैं।

उनको हटाकर नए टाइल्स लगाए जाएंगे। इसी तरह जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर का कहना है कि मरम्मत का जिम्मा ठेकेदार का है वही खराब टाइल्स अपने खर्च से बदलेगा।

जांच पर सवाल
नगर निगम के इंजीनियरों की निगरानी में किए जा रहे स्विमिंग पूल निर्माण को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। लोग कह रहे है कि जब ठेकेदार निर्माण कार्य कर रहा था तो निगम के इंजीनियर जांच करने नहीं गए।

जब ठेकेदार ने मनमाने तरीके से निर्माण कर लिया उसके बाद उसकी लीपापोती की जा रही है। इसके लिए पूरी तरह निगम अधिकारी जिम्मेदार है। यही वजह है कि घटिया निर्माण का उपयोग होने से पहले ही उसकी मरम्मत की जा रही है।

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