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यूजीसी के काले कानून के खिलाफ उमड़ा सैलाब: पुलिसिया चक्रव्यूह भेद कमिश्नर दफ्तर में दाखिल हुई सवर्ण सेना

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 जनवरी 2026, 11:21 पूर्वाह्न
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अहिल्या नगरी गुरुवार को सवर्ण समाज के शौर्य, स्वाभिमान और संगठित आक्रोश की गवाह बनी। सवर्ण सेना के बैनर तले आयोजित ‹मस्तक पर कफन› मार्च ने सड़कों को जन-आक्रोश के भगवा रंग में रंग दिया। यूजीसी के विवादित नए नियमों को ‹काला कानून› करार देते हुए हजारों युवाओं और समाजजनों ने दमनकारी नीति के विरुद्ध शंखनाद किया।

गांधी हॉल से शुरू हुआ विराट प्रदर्शन केवल मार्च नहीं, बल्कि सवर्ण युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सत्ता के खिलाफ एक खुली बगावत के रूप में नजर आया। समूचा शहर यूजीसी काला कानून वापस लो› और ‹जय-जय सियाराम› के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मां करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्रसिंह गौतम, परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष पं. अनूप शुक्ला, कायस्थ समाज के अध्यक्ष मनीष निगम और अग्रवाल सेना के अभय अग्रवाल ने मंच से स्पष्ट चेतावनी दी सवर्ण समाज याचना की स्थिति से बाहर निकलकर अपने अधिकारों के लिए रणक्षेत्र में उतर चुका है।

जन-समूह कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, जहां प्रशासन ने भारी पुलिस बल और लोहे के बैरिकेड्स की अभेद्य दीवार खड़ी कर रखी थी किंतु न्याय की मांग लेकर निकले इस सैलाब के आगे सरकारी तंत्र की घेराबंदी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और हाथापाई हुई, लेकिन आक्रोशित युवाओं ने बैरिकेड्स लांघकर कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार तक अपनी पहुंच दर्ज कराई। यहां सवर्ण सेना ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन जॉइंट कमिश्नर डीएस रणदा को सौंपते हुए सीधे शब्दों में चेताया ‹न्याय दो या संघर्ष लो›।

करणी सेना के बाला ठाकुर, गोलू ठाकुर, यादवेंद्र सिंह, जितेंद्र पवार, शैलेंद्रसिंह चंदेल, शिशुपाल सिंह, ठाकुर जगदीश सिंह, ईश्वरसिंह राठौड़ और रानी करणी सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत कीर्तिराज सिंह ने पुलिसिया तंत्र को कड़ी चुनौती दी।

परशुराम सेना की ओर से जितेंद त्रिपाठी, दीपक शुक्ला, अनिल तिवारी, प्रकाश शर्मा, प्रकाश वाजपेयी, अशोक चतुर्वेदी, प्रफुल्ल शर्मा, गौतम तिवारी, दीपू मिश्रा, विनय दुबे, एडवोकेट नमन दुबे, विनोद द्विवेदी सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने संगठन की शक्ति का लोहा मनवाया।

कायस्थ समाज के राकेश श्रीवास्तव, वीना श्रीवास्तव, महावीर श्रीवास्तव, प्रदीप भटनागर और मातृशक्ति की ओर से प्रमिला शर्मा, मणिमला शर्मा व आरती मिश्रा मौजूद रहीं।

स्टे हठधर्मिता पर करारा तमाचा: सवर्ण सेना... संघर्ष की इसी तपिश के बीच दोपहर 2 बजे न्याय का संदेश आया। जैसे ही खबर पहुंची कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद कानून के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए उस पर रोक लगा दी है और यूजीसी के 2012 के नियमों को ही प्रभावी रखने का निर्देश दिया है, आंदोलनकारियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

जो सड़कें सुबह आक्रोश से तप रही थीं, वे अब जीत के जश्न रीगल चौराहे पर सवर्ण सेना ने इसे सरकार की हठधर्मिता पर न्यायपालिका का करारा तमाचा बताते हुए ऐतिहासिक जश्न मनाया और मिठाई बांटकर अपनी पहली बड़ी जीत दर्ज की। नेतृत्वकर्ताओं ने कहा यह तो केवल एक पड़ाव है, जब तक यूजीसी का यह भेदभावपूर्ण कानून पूरी तरह समाप्त नहीं होता, संघर्ष की मशाल बुझने नहीं दी जाएगी।

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