पबों में चल रहा मौत का खेल: लापरवाही के चलते गोवा जैसा हादसा इंदौर में न हो जाए...
शहर के सभी क्लब- पबों में हर रोज इलेक्ट्रॉनिक फायर क्रैकर्स का इस्तेमाल क्लब- पब के संचालकों में गैरकानूनी संचालन और जेबें भरने की होड़ रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर । गो वा के च
Khulasa First
संवाददाता

शहर के सभी क्लब- पबों में हर रोज इलेक्ट्रॉनिक फायर क्रैकर्स का इस्तेमाल
क्लब- पब के संचालकों में गैरकानूनी संचालन और जेबें भरने की होड़
रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गो वा के चर्चित क्लब बीर्च बाय रोमियो लैन में इलेक्ट्रॉनिक फायर क्रैकर्स से लगी आग ने 25 जिंदगियां लील लीं। यह लापरवाही गोवा तक सीमित नहीं है, इंदौर के पब और क्लबों में भी इसका उपयोग बेखौफ हो रहा है। जहां गोवा में डांस फ्लोर पर अचानक फूटे इलेक्ट्रिक क्रैकर्स ने भगदड़ मचाई, वहीं इंदौर के अधिकांश पबों और क्लबों में यही खतरनाक ‘शो–शाइनिंग ट्रेंड’ लगातार बढ़ रहा है। छोटे-छोटे बंद हॉल, तेज संगीत, शराब के नशे में धुत भीड़ और उसके बीच जलती चिंगारियां कहीं कुछ भी हो सकता है। सवाल साफ है क्या इंदौर में भी हम एक ऐसे ही बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं ?
सूत्रों के मुताबिक इंदौर के लोकप्रिय पबों में अब हर रेगुलर पार्टी में इलेक्ट्रॉनिक फायर क्रैकर्स का उपयोग आम हो गया है। हर एक फायर क्रैकर के लिए ग्राहकों से 500 से 1000 रुपए तक वसूले जाते हैं। बर्थडे, एनिवर्सरी, थीम पार्टी या डीजे नाइट हर जगह शो ऑफ के नाम पर इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा हैं। कई क्लबों में यह अतिरिक्त चार्ज बिल में भी नहीं जोड़ा जाता, बल्कि सीधा काउंटर पर लिया जाता है। कुछ संचालक तो अपने वेटरों को टारगेट देते हैं कि जितने ज्यादा क्रैकर्स बिकेंगे उतना ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा। ऐसे में सुरक्षा का ख्याल कौन रखेगा।
120–150 की जगह में 300–400 लोगों को ठूंस देते हैं
कई पब संचालक 120–150 लोगों की कैपेसिटी में 300–400 लोगों को ठूंस देते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक क्रैकर्स का धुआं, स्पार्क और रिएक्शन सब कुछ जोखिम बढ़ाता है। ज्यादातर क्लबों में फायर एक्जिट ब्लॉक, एक्सपायर्ड फायर एक्सटिंग्विशर, खुली विजिबिलिटी होती हैं।
हर पब-क्लब के साउंड–लाइट कंट्रोल रूम में प्लास्टिक–थर्माकोल भी रहती है। ऐसे माहौल में एक चिंगारी ही काफी है। गोवा में जिस तरह 100 से ज्यादा लोग एक ही फ्लोर पर थे और निकलने का रास्ता एक, ऐसे में तो इंदौर के लोकप्रिय क्लबों की सिचुएशन भी अलग नहीं है।
कई शहरों में इनडोर फायर क्रैकर्स चलाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। क्लब संचालक पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द होने और सुरक्षा उल्लंघन का मामला दर्ज हो सकता है।
फायर एनओसी है या नहीं, किसी को परवाह नहीं: सूत्रों के मुताबिक शहर के कई पब अस्थायी एनओसी या पुराने लाइसेंस के भरोसे चल रहे हैं। कई जगहों पर लाइसेंस सिर्फ पेपर पर है, जमीन पर नहीं। पुलिस, नगर निगम, फायर की संयुक्त कार्रवाई होती भी है कि नहीं किसी को नही पता। वर्तमान में इंदौर के हर क्लब, पब में थीम पार्टी और डीजे नाइट के दौरान इलेक्ट्रिक पटाखों का उपयोग सबसे ज्यादा होता है।
इन नियमों का पालन करवाने की जरूरत
हर क्लब में इलेक्ट्रॉनिक फायर क्रैकर्स पर तुरंत रोक।
फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य ।
रात में रैंडम इंस्पेक्शन।
ओवरक्राउडिंग पर भारी जुर्माना।
बिना लाइसेंस संचालन पर सीधी कार्रवाई।
ये समस्या हो सकती है उत्पन्न
क्लबों में जगह सीमित होती है, इसलिए फायर क्रैकर्स की चिंगारी सीधे लोगों के कपड़ों या शरीर को छू सकती है। इससे जलने, आग लगने या गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
पर्दे, फोम, लकड़ी, प्लास्टिक और शराब जल्दी आग पकड़ती हैं। एक छोटी चिंगारी भी पूरे हॉल को कुछ ही सेकंड में जला सकती है।
फायर क्रैकर्स धुआं छोड़ते हैं, जो बंद कमरे में जमा होकर सांस लेने में परेशानी, दम घुटना, आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं।
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