दूषित पानी हादसे ने खोली सिस्टम की पोल: महापौर बोले- अधिकारी नहीं सुनते, ऐसे काम नहीं कर सकता; पूर्व सीएम ने कसा तंज- जब आपकी नहीं चली तो पद पर बैठे बिसलेरी क्यों पीते रहे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम में लंबे समय से अंदर चल रही राजनीति और नौकरशाही के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। भागीरथपुरा कांड ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है।
इस दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग अस्पतालों में इलाजरत हैं।
महापौर का बयान
घटना के बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का एक बंद बैठक में दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
एक ही अधिकारी के पास सारे काम हैं और बाकी अधिकारी खाली बैठे हैं। अधिकारी मेरी नहीं सुनते, मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता। महापौर ने यह भी कहा कि फैसलों का पालन नहीं हो रहा और बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जानी चाहिए। यह बयान नगर निगम के भीतर गहरे प्रशासनिक असंतुलन की ओर इशारा करता है।
बैठक में ये रहे मौजूद
यह अहम बैठक 1 जनवरी को रेसीडेंसी कोठी में हुई, जिसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, एसीएस संजय दुबे, मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम आयुक्त दिलीप यादव और जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
उमा भारती ने कसा तंज
इस पर पूर्व सीएम उमा भारती ने तंज कसते हुए कहा कि - इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!
पहले भी ट्वीट करते हुए कहा था
इससे पहले भारती ने ट्वीट करते हुए कहा था कि- 2025 के आखिर में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और पूरी व्यवस्था के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गईं।
प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड पाने वाले इस नगर में इतनी गंदगी, बदसूरती और जहर मिला पानी था, जो कई जिंदगियों को निगल चुका है और और निगलता जा रहा है, और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती, क्योंकि उनके परिवार वाले जिंदगी भर दुख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितों से माफी मांगनी होगी और जो भी नीचे से लेकर ऊपर तक अपराधी हैं, उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए। यह मोहन यादव जी के लिए एक परीक्षा की घड़ी है।
सफाई के सिरमौर शहर पर दाग
भागीरथपुरा में हुआ यह हादसा इंदौर जैसे स्वच्छता में नंबर-1 शहर के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। पीने के पानी से मौतें होने की घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।
एक ही को सभी काम दे रखे हैं
इस पर एसीएस ने कहा कि दो-तीन और अधिकारी दे रहे हैं, कमी है इससे हो जाएगा। इस पर महापौर ने कहा कि अधिकारियों की कमी नहीं है। सही तरह से कार्य विभाजन किया जाए, एक ही को सभी काम दे रखे हैं।
इसके बाद जलकार्य समिति प्रभारी बबलू शर्मा ने कहा कि- अब तो हाथ उठाने की नौबत आ जाती है। हालत खराब है। पार्षद कमल वाघेला ने कहा कि अधिकारियों का रवैया ऐसा है कि पार्षदों के साथ भी मारपीट हो सकती है। वहीं विधायक हार्डिया ने भी कहा कि अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं।
राहुल गांधी का बयान
भागीरथपुरा कांड को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का भी बयान सामने आया है। राहुल ने X पर कहा, इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं - और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की - फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
पानी की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
पानी के सैंपल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसमें स्पष्ट हुआ है कि पानी गंभीर रूप से दूषित था। इसमें मल-मूत्र से उत्पन्न जहरीले बैक्टीरिया पाए गए है।
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