खाता गोवर्धनलाल का बंद किया कन्नूलाल का नहीं: भैरव बाबा मंदिर विवाद; हो रही कब्जे की कोशिश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पाटनीपुरा से मालवा मिल मार्ग स्थित भैरव बाबा मंदिर को लेकर उठे विवाद के बीच नया खुलासा हुआ है। मंदिर की देखभाल कर रहे यादव परिवार का कहना है जिन कन्नूलाल के संपत्तिकर के खाते को बंद करवाने की बात कही जा रही है, दरअसल वह खाता उनके बेटे गोवर्धनलाल यादव का है, जो पुन: खोला जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति भी फर्जी है। कुछ लोग मंदिर पर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है मंदिर समिति के सुरेश बैरागी, माताप्रसाद प्रजापति, ओमप्रकाश यादव और करण ठाकुर ने बताया था कि 150 वर्ष पुराना ये मंदिर राजस्व रिकॉर्ड में भी सन् 1925 मिसल बंदोबस्त में दर्ज है। ये भूमि मंदिर की न होकर शासकीय रही, जो कई बार नजूल से हाउसिंग बोर्ड तक हस्तांतरित होती रही है। बोर्ड ने गत 20 अप्रैल 2024 को अपने आदेश में यह भूमि शासन को समर्पित कर दी, जो आज भी शासकीय भूमि है।
मंदिर की देखरेख करने वाले यादव परिवार ने स्व. कन्नूलाल यादव के नाम से फर्जी संपत्तिकर का खाता खुलवाया, जबकि भूमि के मालिकाना हक से संबंधित कोई भी कागज उनके पास नहीं है। मंदिर समिति ने वर्ष 2023 में तत्कालीन निगमायुक्त को सप्रमाण शिकायत की, जिसकी जांच के दौरान निगम ने हाउसिंग बोर्ड को मंदिर की जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने संबंधी पत्र लिखा था।
इस पर अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट दी कि उक्त भूमि शासकीय है, जिस पर भैरव बाबा मंदिर स्थापित है। इसके बाद निगम ने कन्नूलाल यादव के संपत्तिकर खाते को बंद कर दिया।
उन्होंने बताया कि मुकेश और सागर यादव ने निगम को भ्रमित करने के उद्देश्य से दीवानी मुकदमा पेश किया, जो कि भूखंड क्र. 196 का है, जिसके बारे में वह बताते हैं कि ये मंदिर के पक्ष में है। मामले में यादव परिवार के अशोक यादव, सागर यादव और दिनेश यादव ने बताया मंदिर में जो संपत्तिकर खाता था, वह कन्नूलाल यादव के नाम पर नहीं, बल्कि उनके बेटे गोवर्धनलाल यादव के नाम पर था, जिसे पुन: चालू करवाया जा रहा है। इसके लिए 22 दिसंबर को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि 196/12 नंदा नगर मेनरोड पर स्थित मंदिर का खाता क्र. 1000960450 हमारी पुश्तैनी संपत्ति है।
यह संपत्ति कन्नूलाल यादव के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज थी। उनकी मृत्यु के बाद वर्तमान में उनके बेटे गोवर्धनलाल यादव के नाम पर दर्ज है। इसका टैक्स नियमित रूप से भरा जाता है। दिसंबर में ही हमने 4405 रुपए का संपत्तिकर भरा है।
इस खाते को कुछ ऐसे लोग, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं है, की शिकायत पर संपत्तिकर खाता बंद कर दिया गया। ये लोग मंदिर पर कब्जा करने की नीयत से गलत शिकायतें करते हैं। इसलिए खाता पुन: चालू किया जाए।
यादव ने बताया खाता जल्द ही चालू हो जाएगा। दरअसल, ये मंदिर और उसकी जमीन हमारी संपत्ति है, लेकिन क्षेत्र के कतिपय लोगों की नजरें इस पर हैं और वे षड्यंत्रपूर्वक इसे कब्जाने की कोशिश कर रहे हैं। जो मंदिर समिति बनाई गई, वह भी फर्जी है। ऐसी कोई समिति मंदिर की है ही नहीं।
हमने राजस्व समिति प्रभारी को भी पत्र लिखा है, जिसमें बताया कि 400 वर्गफीट पर मंदिर निर्माण होकर 300 वर्गफीट किराए पर दिया गया है। इसके शासकीय दस्तावेज व संपत्तिकर रसीद भी है।
2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में डिक्री भी पारित की थी। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उक्त संपत्ति को सरकारी बताते हुए आवेदन लगाया गया और छलपूर्वक संपत्ति को हड़पना चाहते हैं।
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