सब कुछ लुटा के होश में आए: खरगे, राहुल, उमा बिफरे, मुख्यमंत्री हुए सख्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौरी अफसरों की मनमानी ने पूरे देश में करा दी सरकार की बदनामी
‘भागीरथपुरा' देशव्यापी मुद्दा बना
‘जहरीले जल' से हुई मौत के जिम्मेदार अफसरों को मुख्यमंत्री ने दी सजा, एक का तबादला, दो सस्पेंड
अफसरों की लापरवाही से प्रदेश ही नहीं, केंद्र सरकार भी घिरी, नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को घेरा
अफसरों के समक्ष बेबसी दिखाने वाले इंदौरी नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने लगाई फटकार
‘घंटा' लेकर कांग्रेस ने किया नगर निगम पर उग्र प्रदर्शन, दोषियों पर आपराधिक मुकदमे की मांग
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार सरकार को उन अफसरों को इंदौर से हटाना ही पड़ा, जिन पर ‘सरकार' का आंख-कान-नाक होने के आरोप लग रहे थे। देर से ही सही, लेकिन सरकार के कड़े एक्शन को इंदौर के हित में माना जा रहा है। अफसरों की बेदखली को दिल्ली दरबार से भी जोड़ा गया है, जिस तक जहरीले जल की आंच पहुंच गई थी।
इसके पहले कि इस कांड की आंच से जबरिया बड़ी सरकार घेरे में आए, छोटी सरकार ने सख्ती बरती। बावजूद इसके इंदौर का मामला देशव्यापी मुद्दा बनने से बच नहीं पाया। लगातार पांचवें दिन इंदौर राष्ट्रीय स्तर के मीडिया की सुर्खियां बना रहा।
राहुल, खरगे, अखिलेश ही नहीं, उमा भारती ने भी मुखरता से जल से मौत को धिक्कारा। ये सब औसत इंदौरी को भी खूब अखर रहा है कि जिस भाजपा पर आंखें मींचकर इतना भरोसा किया, उसके नेताओं ने ये क्या दिन दिखाए?
लेकिन वो इंदौरी ही कैसा, जो उम्मीद छोड़ दे। लिहाजा अहिल्या नगरी में उम्मीद है कि इंदौर नगर निगम के ‘क्षितिज' से एक नया सूर्योदय होगा और अब नेताओं को ये न कहना पड़ेगा कि अफसर सुन नहीं रहे।
68 साल पहले प्रेम धवन द्वारा लिखी और रवि के संगीत में तलत महमूद के स्वर वाली ग़ज़ल से आज के शीर्षक के शब्द गढ़े गए हैं- सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया... दिन में अगर चराग जलाए तो क्या किया...?
ल गता नहीं कि तलत साहब ने हमारे इंदौर के मौजूदा हालात को जैसे 5 सदी पहले ही भांप लिया था और अपना स्वर दिया? बाद में इन्हीं शब्दों को स्वर कोकिला लता मंगेशकर व रफी साहब ने भी स्वर दिए, लेकिन सबसे पहले प्रेम धवन ने ही 1957 में इस गीत को रच दिया, जो ‘भागीरथपुरा' के कलंक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त एक्शन से जुड़ गया।
वे सब अफसर एकमुश्त हटा दिए गए, जो पीने के दूषित जल से एक दर्जन से अधिक निर्दोषों के असमय काल-कवलित होने के जिम्मेदार थे। जिनकी लापरवाही ने इंदौर के साथ प्रदेश सरकार की देशभर में घर बैठे बदनामी करवा दी। जिनकी आत्ममुग्धता ने ‘भागीरथपुरा' को देशव्यापी मुद्दा बना दिया और केंद्र की मोदी सरकार को भी असहज कर दिया।
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष से लेकर देश के सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष, सपा मुखिया आदि विपक्ष को भाजपा के खिलाफ हमलावर कर दिया। अफसरों की इसी सुस्ती ने घर के बाहर, यानी प्रतिपक्ष ही नहीं, घर के अंदर भी नाराजगी भर दी और कमलदल की ही फायर ब्रांड पूर्व मुख्यमंत्री को भी गुस्से से भर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आखिरकार इन अफसरों को कड़ी सजा दी। जिस नगर निगम की ये पूरी जवाबदेही थी, उसके मुखिया दिलीप यादव को निगमायुक्त पद से हटाकर भोपाल पंचायत व ग्रामीण विभाग में बुला लिया गया। यादव का एटिट्यूड काफी चर्चा में था।
लिहाजा वे महज सौ-सवा सौ दिन में इंदौर से विदा हो गए। जो अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया शहर के राजनीतिक नेतृत्व को ठेंगे पर रख आधा दर्जन से ज्यादा महकमों के मुखिया बने थे, वे निलंबन का शिकार हो गए। सिसोनिया के प्रति तो इतना गुस्सा था कि प्रभावित इलाके में जनता ने उनके पुतले तक जलाए थे।
इंदौर में अंगद जैसे 15 बरस से जमे जल आपूर्ति से जुड़े अफसर संजीव श्रीवास्तव भी सस्पेंड कर दिए गए। अब श्रीवास्तव के पूरे कार्यकाल व कार्यकलापों के साथ उनकी संपत्ति की जांच की मांग भी बुलंद हो गई है। मुख्यमंत्री ने तुरत-फुरत तीन नए अफसर निगम में तैनात भी कर दिए, ताकि जनहित के कामकाज प्रभावित न हों।
खबर लिखे जाने तक नए निगमायुक्त की नियुक्ति भी कर दी गई। आईएएस क्षितिज सिंघल को नया निगमायुक्त बनाया गया है। मुख्यमंत्री के इस एक्शन के बाद अब ये उम्मीद की जा सकती है कि अफसरों व जनप्रतिनिधियों के बीच की जंग थम जाएगी और जनता के काम से जुड़ी फाइल्स रफ्तार पकड़ लेंगी।
भागीरथपुरा कांड इंदौर नगर निगम तक सीमित नहीं रहा। पहले इसने शहर की सीमा लांघ मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन सरकार को चपेट में लिया और शुक्रवार तक केंद्र की मोदी सरकार तक जा पहुंचा। पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में लंबा ट्वीट किया और पानी के नाम पर जहर बांटने का आरोप लगाकर पूरी भाजपा को ट्रिपल इंजन सरकार के नाम पर घेरा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तो एक कदम आगे निकल गए और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जलगंगा मिशन याद दिलाते हुए जवाब मांगा। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी मौका लपकने से नहीं चूके और 2027 के यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपाई शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।
भाजपा को सबसे बड़ा झटका सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के बयान से मिला। भारती ने घटना के जिम्मेदारों के लिए दंड व प्रायश्चित की बात कर प्रदेश व इंदौर के राजनीतिक नेतृत्व की नेतृत्व क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया।
गौरतलब है कि इंदौर महापौर सहित विधायक, पार्षद व सांसद ने अफसरों के नहीं सुनने की शिकायतें की थीं। लिहाजा साध्वी ने फटकार लगाई कि फिर बजाय बिसलेरी का पानी पीने के इस्तीफे क्यों नहीं दिए? उधर, स्थानीय कांग्रेस ने भी नगर निगम पर उग्र प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग बुलंद की।
प्रदर्शन में मंदिर में बजाया जाने वाला घंटा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसे पुलिस को जब्त तक करने को मजबूर होना पड़ा। कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ अफसरों की जवाबदेही तय कर सरकार नेताओं को बचा रही है।
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