अतिक्रमण तोड़ने में सख्ती, फिर धरोहर मार्ग पर अवैध बहुमंजिला निर्माण पर चुप्पी क्यों: सराफा बाजार में नियमों की अनदेखी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक ओर नगर निगम शहर के संकरे मार्गों पर बने मकानों को अतिक्रमण घोषित कर तोड़ने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इंदौर के ऐतिहासिक सराफा बाजार में नियमों को दरकिनार कर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण खुलेआम जारी है। यह निर्माण न केवल धरोहर मार्ग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि देवस्थल की दान की गई भूमि पर होने के कारण गंभीर कानूनी सवाल भी खड़े कर रहा है।
शक्कर बाजार क्षेत्र में स्थित विरासत भवन के कारण यह मार्ग पहले ही धरोहर मार्ग घोषित है। यहां पूर्व में स्वीकृत नक्शों के आधार पर सीमित और नियमों के अनुरूप निर्माण हुए हैं। इसके बावजूद 44 बड़ा सराफा स्थित जगदीश भवन में निर्धारित सड़क सीमा से लगभग पांच फीट तक अवैध निर्माण किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्र में अलग-अलग प्लॉटों का संयुक्तिकरण कर व्यावसायिक बिल्डिंग बनाने की अनुमति नगर निगम नहीं दे सकता। यदि किसी विशेष परिस्थिति में अनुमति दी भी जाती है तो उसके लिए सख्त नियमों का पालन अनिवार्य होता है। इस मामले में अब तक निगम अधिकारियों ने स्वीकृत नक्शे को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
अधिकारी मौन, सवाल बरकरार
क्षेत्र के बिल्डिंग ऑफिसर प्रशांत तिवारी से संपर्क करने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। एसएमएस के जवाब में उन्होंने केवल आई कॉल यू बैक लिखा।
सवाल यह है: जब शहर के अन्य हिस्सों में छोटे अतिक्रमण पर तुरंत बुलडोजर चलाया जा रहा है, तो फिर सराफा बाजार जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? अब देखना यह है कि नगर निगम और प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाते हैं।
देवस्थल की भूमि पर कारोबार?
सूत्रों के अनुसार यह भूमि मूल रूप से पूजा-पाठ के उद्देश्य से पुजारी परिवार को दान में दी गई थी, जिसे कानूनन बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर इसे बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। यह पहला मामला नहीं है जब देवस्थल की भूमि की अवैध खरीदी-बिक्री हुई हो।
40 करोड़ का सौदा और विवाद: बताया जा रहा है कि 44 बड़ा सराफा स्थित जगदीश भवन को सुमित जैन और उनके पार्टनरों ने अविनाश शास्त्री और उनके परिवार से लगभग 40 करोड़ रुपए में खरीदा है। इसमें से करीब 30 करोड़ रुपए अविनाश शास्त्री को मिले, जबकि शेष राशि परिवार के अन्य सदस्यों को दी गई।
सौदे की शर्तों के अनुसार भवन से जुड़े सभी कानूनी विवाद नए खरीदारों को निपटाने थे। सबसे पहले वर्षों से पगड़ी-पैठे के आधार पर व्यापार कर रहे दुकानदारों को अलग-अलग रकम देकर हटाया गया। इस प्रक्रिया पर शास्त्री परिवार के कुछ सदस्यों ने आपत्ति भी दर्ज कराई, जिसके चलते मामला और विवादित हो गया।
नक्शे पर रोक, फिर ‘सेटिंग’ के बाद काम शुरू: निगम में दर्ज आपत्ति के बाद निर्माण कार्य चार दिन के लिए रोका गया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर अधिकारियों से ‘सेटिंग’ होने के बाद दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया। वर्तमान में अलग-अलग प्ल\टों को मिलाकर एक विशाल व्यावसायिक भवन बनाया जा रहा है।
एक ओर मंदिर की जमीन वाले हिस्से में चार मंजिला इमारत खड़ी की जा रही है, वहीं दूसरे हिस्से के पुराने मकानों को भी तोड़ा जा रहा है। आरोप है कि निर्माण के लिए एक फर्जी नक्शा दिखाया जा रहा है, जिसमें जगदीश मंदिर की भूमि और आसपास के मकान भी शामिल हैं।
ग्राउंड फ्लोर का नक्शा आया सामने: निर्माणाधीन अवैध व्यावसायिक परिसर के ग्राउंड फ्लोर का लेआउट सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार इसमें 25 से अधिक दुकानों का प्रावधान किया गया है, जिनका आकार 125 से 380 वर्गफीट के बीच है। नक्शे में दुकानों को C-1 से C-25 तक क्रमांकित किया गया है। ग्राहकों की आवाजाही के लिए 60 फीट और 80 फीट चौड़े पैसेज दिखाए गए हैं, साथ ही बीच में लिफ्ट और सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है।
लेआउट पर सवाल
विशेषज्ञों और व्यापारियों का कहना है कि अत्यधिक दुकानों और सीमित उपयोगी स्थान के कारण यह लेआउट अव्यवहारिक है। छोटी की दुकानों में व्यापार मुश्किल होगा, वहीं अंदरूनी दुकानों की विजिबिलिटी भी कम रहेगी।
रास्ते बंद, जनता परेशान: रविवार को निर्माणाधीन इमारत की छत भरने के दौरान भैरव मंदिर–थाना चौराहे पर सीमेंट, रेत और गिट्टी का मिश्रण सड़क पर तैयार किया गया, जिससे शक्कर बाजार, बड़ा सराफा और आसपास के मार्ग पूरी तरह बंद हो गए।
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