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बाले-बाले ले लिया हिस्ट्रीशीटर हेमंत यादव का रिमांड: मामला डाॅक्टर का पैर तुड़वाने की सुपारी देने का

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जनवरी 2026, 8:49 पूर्वाह्न
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बाले-बाले ले लिया हिस्ट्रीशीटर हेमंत यादव का रिमांड

खिलौने की तरह रखा, रिमांड पूरा होने पर भेजा जेल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बेटे का इलाज कर संक्रमण के नाम पर उसका पैर काटने वाले डॉक्टर पर सुपारी देकर हमला कराने वाले हिस्ट्रीशीटर का रिमांड पूरा होने पर बाले-बाले कल उसे विजय नगर पुलिस ने जेल भिजवा दिया। पुलिस उसे दो दिनों के प्रॉडक्शन वारंट पर लाई थी। इस दौरान उस पर कोई सख्ती नहीं करते हुए उसका खिलौने की तरह ध्यान रखा गया।

उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को स्कीम-54 निवासी डॉक्टर शिवकुमार यादव पर हमला हुआ था। बाइक सवार दो बदमाशों ने उन पर हमला कर कार में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने मामले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर खजराना के मोहसिन और देवास के कालू को गिरफ्तार किया था।

दोनों ने देवास के जाहिद का नाम लिया था। पुलिस ने जाहिद को पकड़ा तो उसने बताया कि वह हत्या और अपहरण के मामले में सजा काटकर 15 अगस्त को छूटा था। जेल में बंद रहने के दौरान उसकी कातिलाना हमले में जेल में सजा काट रहे हिस्ट्रीशीटर गुंडे हेमंत यादव से दोस्ती हुई थी। हेमंत यादव ने बताया था कि उसके बेटे मोहित का तीन साल पहले एक्सीडेंट हुआ था।

डॉक्टर शिवकुमार ने ही उपचार किया था। संक्रमण फैलने के कारण उसका पैर काटना पड़ गया। हेमंत ने कहा था कि डॉक्टर के इलाज में लापरवाही करने के कारण बेटे का एक पैर कटा था। वह पैर तुड़वा कर बदला लेना चाहता था।

इसलिए उसने सुपारी देकर मोहसिन खान, कालू और साजिद खान से हमला कराया। मामले में पूछताछ के लिए पुलिस ने हेमंत यादव का रिमांड लिया था। रिमांड अवधि में हेमंत सुपारी देने की बात से इनकार करता रहा।

उसका कहना था कि मुझे डॉ. से बदला लेना होता तो मैं कब से ले चुका होता। न तो मैंने सुपारी दी है न ही मैंने इस बारे में किसी को कुछ कहा। हालांकि पुलिस का कहना है कि हेमंत ने सुपारी देकर हमला कराने की बात स्वीकारी है। रिमांड समाप्त होने पर पुलिस ने कल उसे वापस जेल भिजवा दिया। पुलिस को केस में बस एक बाइक की जब्ती करना है।

पांच दिन का रिमांड मांगा था, दो दिनों का मिला
सूत्रों का कहना है कि 31 दिसंबर को विजय नगर पुलिस हेमंत यादव का रिमांड लेने पहुंची थी। खबर लगने पर हेमंत यादव की और से तीन से चार वकील इसका विरोध करने खड़े थे। पुलिस ने पांच दिनों का रिमांड मांगा तो वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि हेमंत यादव का डॉ. शिवकुमार यादव पर हमले से कोई लेना देना नहीं है।

केस के सारे आरोपी पकड़े जा चुके हैं और हेमंत यादव को न तो शहर से बाहर कहीं ले जाना और न ही कुछ भी जब्त होना हैं। ऐसे में पांच दिनों के रिमांड की कोई जरुरत नहीं है, लेकिन पुलिस के अड़े रहने पर कोर्ट ने आखिरकार दो दिनों का रिमांड स्वीकार कर लिया।

इसमें भी वकीलों का कहना था कि हेमंत यादव की दो बार बायपास हो चुकी है। उसकी रोजाना दवाई-गोलियां देना पड़ती है। कुल मिलाकर पुलिस को हेमंत यादव का रिमांड तो मिल गया, लेकिन उसे कांच के बर्तन की तरह रखना पड़ा। उससे पूछताछ में कोई सख्ती भी पुलिस नहीं दिखा पाई।

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