नीमच कृषि उपज मंडी पर भी लग जाएगा गंगा नगर टैक्स: शराब माफिया अशोक अरोरा की नीयत अब मंडी पर डोली
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नीमच।
कुख्यात शराब माफिया और आतंक का पर्याय अशोक अरोरा की नीयत अब मंडी पर डोल गई है। उसने अपने पार्टनर शैलेष (गोपाल) गर्ग को अध्यक्ष चुनाव में खड़ा करवा दिया है। नीमच में कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ के चुनाव की चर्चा है।
अरोरा ने अध्यक्ष पद के लिए राकेश भारद्वाज (अफसर) के मुकाबले अपने पार्टनर शैलेष (गोपाल) गर्ग जीजी को मैदान में उतारकर अब मंडी पर कब्जे की कोशिश शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि यदि गोपाल गर्ग जीते तो मंडी पर गंगा नगर यानी अशोक अरोरा का टैक्स लग जाएगा।
महत्वपूर्ण यह कि व्यापारी किसी से बुराई मोल न लेते हुए दोनों के प्रति समभाव रखेगा, पर अंदर ही अंदर उनमें गंगा नगर यानी अशोक अरोरा की इंट्री से खौफ भी है। वे मान रहे हैं कि यदि गोपाल गर्ग जीत गए तो मंडी में व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। गंगा नगर यानी अशोक अरोरा की दादागीरी उन पर हावी हो जाएगी।
जैसा उसने पूरे नीमच में शराब का अवैध कारोबार फैला रखा है, वैसा ही कामकाज मंडी में शुरू हो जाएगा। व्यापारी मानते हैं कि दोनों ही प्रत्याशी पॉवर सेंटर हैं और दोनों ही बीते वर्षों में नकारात्मक चर्चाओं में रहे हैं? मंडी चुनाव काफी चर्चित हो गए हैं, क्योंकि पूरे नीमच को शराब के नशे में डूबो देने वाले अशोक अरोरा ने अपने पार्टनगर गोपाल जीजी को मैदान में उतार दिया है। राकेश भारद्वाज के साथ ‘बापू’ और गोपाल जीजी के साथ ‘भाई’ खड़े हैं।
विधायक दिलीपसिंह परिहार और उनकी टीम भी मैदान में उतर गई है और प्रचार में नजर आ रही है। गोपाल गर्ग जीजी के लिए लॉबिंग अशोक अरोरा ‘गंगानगर’ और उनकी टीम कर रही है। मंडी के पिछले कुछ चुनावों में अध्यक्ष पद पर वही काबिज हुआ जिसके साथ अशोक गंगानगर खड़ा हुआ था।
जहां बापू यानी राकेश भारद्वाज वोटों के गणित के मास्टरमाइंड हैं तो वहीं अशोक अरोरा शतरंज की बाजी के वो खिलाड़ी हैं जहां उनका विरोधी वही चाल चलता है जो वो चाहता है।
एक तरह से चुनाव ‘जीजी’ और ‘अफसर’ के लिए ही नहीं बल्कि विधायक ‘बापू’ दिलीपसिंह परिहार और ‘भाई’ अशोक अरोरा गंगानगर के बीच ही हो रहा है। इन सारी कवायदों के बीच डर का माहौल भी है।
व्यापारी मान रहे हैं कि यदि गोपाल जीजी जीत गए तो मंडी पर भी अशोक अरोरा अपना कब्जा जमा लेगा। अपनी मनमानी करेगा और व्यापारियों को डरा-धमकाकर वसूली करने के अलावा अपने समर्थक व्यापारियों को ही व्यापार करने देगा।
ये हैं मंडी चुनाव के मुद्दे- मंडी में लाल गुलाब, भ्रष्टाचार, सुविधाओं की कमी, सुरक्षा और खाद्य अधिकारियों द्वारा व्यापारियों से वसूली जैसे कई मुद्दे हैं जिन पर राकेस भारद्वाज सफाई दे रहे हैं तो गोपाल खत्म करने की बात कर रहे हैं, लेकिन उन पर किसी को कोई भरोसा नहीं हो रहा है। मंडी में दुकानों का आवंटन का मुद्दा है।
व्यापारियों को ‘ठगा’ और ‘लूटा’ गया है जिस पर व्यापारी वोट देगा। खुद व्यापारियों से ‘व्यापार’ करने उतर अधिकारी और अध्यक्ष। जिम्मेदारी तात्कालीन अध्यक्ष होने के नाते राकेश भारद्वाज की तो थी ही, लेकिन व्यापारियों के हितैषी बनकर अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोंकने वाले शैलेष (गोपाल) गर्ग जीजी की भी बनती है कि वे उस वक्त क्या कर रहे थे?
बदलाव, लेकिन विकल्प खतरनाक
जब मंडी चुनावों की घोषणा हुई तब अध्यक्ष प्रत्याशी व वर्तमान अध्यक्ष राकेश भारद्वाज को लेकर यह सोच थी कि अब परिवर्तन होना चाहिए और व्यापारी उनसे उब चुके हैं। वो दो दशकों से इस पद पर काबिज हैं, लेकिन जब पता चला कि उनका मुकाबला गंगानगर से निकले गोपाल जीजी करेंगे तो व्यपारियों को बदलाव का ये विकल्प खतरनाक लग रहा है।
क्योंकि गोपाल कुख्यात शराब माफिया और नीमच में आतंक फैला चुका अशोक अरोरा का पार्टनर है। अशोक का गणित ये है कि किसी तरह वो जीत जाएं तो वे मंडी पर भी कब्जा कर लें। मुकाबला बराबरी का माना जा रहा है जो और भी तकलीफदेह है। व्यापारियों के बीच गोपाल जीजी का व्यक्तिगत व्यवहार चर्चा में है। उनका रुखा व्यवहार और कटु शब्द व्यापारियों के गले नहीं उतरते। ये बात उनके खिलाफ तो जाती है।
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