भागीरथपुरा में निगम के बाद स्वास्थ्य विभाग भी फेल: हर विभाग आंकड़े छिपाने की जादूगरी में अव्वल
KHULASA FIRST
संवाददाता

महामारी की तरह मौतें और बीमारी से अनजान रहा स्वास्थ्य विभाग
इलाज के बजाय छिपाए आंकड़े, 14 की हुई मौत, पुष्टि सिर्फ चंद लोगों की
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बीता वर्ष 2025 शहर को ऐसा दर्द दे गया, जिसे कई परिवार पीढ़ियों तक नहीं भुला सकेंगे। सबसे स्वच्छ शहर की अमृत योजना से निकले जहर ने वर्ष 2026 की शुरुआत में ही कई परिवारों के लिए अंधेरा कर दिया।
क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 1400 से अधिक बीमार हैं। शुरुआत में जिसे एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण हादसा’ बताया जा रहा था, वही अब निगम द्वारा ठेके की देरी, प्रशासनिक लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी की विफलता का घातक उदाहरण बन चुका है।
सूत्रों के अनुसार यह त्रासदी टाली जा सकती थी। यह हादसा नहीं, लापरवाही से हुई मौतें थीं। कुलकर्णी नगर निवासी 43 वर्षीय व्यक्ति की दूषित पानी पीने के बाद तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वह क्षेत्र में ही मजदूरी करता था।
शहर में दूषित पानी से होने वाली यह 14वीं मौत है। देश का ‘सबसे साफ शहर’ कहलाने वाला इंदौर आज एक भयावह सच्चाई से रूबरू है। इलाज मुफ्त करने की घोषणा के बाद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण हर दिन किसी न किसी मरीज की मौत हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम से लेकर कई विभागों में अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर इतने भयावह कांड के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से इंदौर ही नहीं, देश का हर नागरिक हैरान है।
स्वास्थ्य विभाग की जादूगरी भी कम नहीं- इस पूरे कांड में जहां अभी तक हर कोई नगर निगम और नर्मदा आपूर्ति विभागों की तरफ उंगली उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर इंदौर का स्वास्थ्य विभाग भी मरीजों की संख्या में कम दिखाने की जादूगरी में शुरू से लगा रहा।
किसी क्षेत्र में एकाएक यदि एक बीमारी के मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। तो इसे देखने की जिम्मेदारी शहर के स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ डॉ, माधव हसानी की टीम की होती है। इसके बाद भी इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला सप्ताहभर से जारी था।
लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन अफसरों ने मामला दबाए रखा। बस्ती में सप्ताहभर में 14 मौतें हो गईं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने तीन मौतों की पुष्टि डायरिया के कारण होने की पुष्टि की है। उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की की शुरुआत की।
रिपोर्ट में खुलासा- अमृत नहीं, महीनों से पी रहे थे लोग जहर
सूत्रों के मुताबिक भागीरथपुरा की पुरानी पाइप लाइन बदलने के लिए अगस्त 2025 में ही टेंडर जारी किया गया था, जिसमें गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतों का जिक्र था। देरी और कमजोर निगरानी के कारण शहर के कई हिस्सों में सीवेज और पेयजल लाइनें आपस में जुड़ गईं।
खासकर पुराने इलाकों में जैसे भागीरथपुरा। इधर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब भेजे गए पानी के सैंपलों की रिपोर्ट गुरुवार को जारी हो गई। इसमें पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा के रहवासी पिछले कई दिनों से ड्रेनेज मिला पानी पी रहे थे।
सोमवार को भागीरथपुरा में बड़ी संख्या में उल्टी-दस्त के मरीज सामने आने के बाद निगम ने लोगों के घरों से पानी का सैंपल लेकर एमजीएम मेडिकल कालेज और नगर निगम की लैबों में जांच के लिए भेजा था। गुरुवार को इन दोनों जगह से जांच रिपोर्ट आ गई।
दोनों ही जगह इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा के रहवासी जिस पानी को नर्मदा जल समझकर पी रहे थे वह दरअसल ड्रेनेज मिला हुआ था। इस पानी में बेक्टेरिया पाए गए हैं। पीना तो दूर यह इस्तेमाल के लायक तक नहीं था।
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