सराफा चौपाटी 9.30 बजे ही खुलेगी लेकिन दुकानें 80 क्यों: कल रात्रि जमकर हंगामा, दुकानदारों ने दिया धरना; स्वाद के शौकीनों को निराश लौटना पड़ा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । सराफा चौपाटी को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद के बीच कल रात्रि जमकर हंगामा मचा। नगर निगम ने तय किया था कि यहां परंपरागत 80 दुकानें ही लगेंगी और वो भी रात्रि 9.30 बजे बाद
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सराफा चौपाटी को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद के बीच कल रात्रि जमकर हंगामा मचा। नगर निगम ने तय किया था कि यहां परंपरागत 80 दुकानें ही लगेंगी और वो भी रात्रि 9.30 बजे बाद ही। जब दुकानों को रोका गया तो दुकानदार विरोध पर उतारू हो गए और धरना दे दिया। इस दौरान सराफा पुलिस ने दो दुकानदारों पर केस दर्ज कर लिया। व्यापारियों का कहना है कि महापौर और अधिकारियों से 60 दुकानों की ही बात हुई थी, 80 कैसे हो गई?
सराफा में लगने वाली चौपटी को लेकर नगर निगम ने मंगलवार और बुधवार को लगातार मुनादी पिटवाई थी कि दुकानें 9.30 बजे बाद ही लगाएं और जो 80 दुकानें परंपरागत रूप से लगती रही हैं, वो ही लगाएं। बाकी को यहां लगाने की कोई पात्रता नहीं हैं। अभी यहां करीब 200 दुकानें लगती हैं जो सराफा मेनरोड के साथ ही गलियों में लगती हैं।
चौराहा से पीपली बाजार, छोटा सराफा, धान गली, शक्कर बाजार, मोरसली गली और खजूरी बाजार की ओर दुकानें लगा ली जाती हैं। यहां दुकानदारों के बीच ग्राहकों को लेकर मारपीट भी होती रही है। अभी सोमवार रात्रि को ही यहां दो दुकानदार जमकर भिड़ गए और एक दूसरे की लात-घूंसों से पिटाई कर दी।
इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। कल रात्रि निगम और पुलिस की टीम सराफा में मौजूद रही और दुकानदारों को 9.30 बजे से पूर्व आने से सख्ती से रोका। इस दौरान दुकानदारों और पुलिस का विवाद भी हुआ। सराफा में चौपाटी दुकानदार शाम 4 बजे से ही आने लग जाते हैं जिससे व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वो इसके खिलाफ लगातार आवाजें उठाते रहे हैं। बहरहाल, कल रात्रि पुलिस और निगम अधिकारियों ने सख्ती से दुकानों को आने से रोका तो दुकानदारों ने धरना दे दिया। इस दौरान निगम और व्यापारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। अधिकारियों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वे नहीं माने और धरने पर बैठे रहे।
बाद में शांति भंग की आशंका में दो दुकानदारों कैलाश गुर्जर निवासी जनता कॉलोनी बड़ा गणपति और दिनेश व्यास निवासी शकर बाजार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। आखिरकार, वहां परंपरागत 80 दुकानें ही लगीं।
व्यापारी बोले- 80 नहीं 60 दुकानें तय हुई थीं
मामले में सराफा व्यापारी एसोसिएशन के पदाधिकारी अविनाश शास्त्री ने कहा कि सराफा चौपाटी का विवाद कई महीनों से चल रहा है। यहां गैस सिलेंडर समेत अन्य ज्वलनशील पदार्थों के उपयोग से कभी भी कोई अग्निकांड होने का खतरा है जिसके कारण व्यापारी उनका विरोध कर रहे हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में कमेटी भी बनी, लेकिन उसकी एक भी बैठक बीते दो माहों में नहीं हो सकी। महापौर ने कहा था कि दीपावली बाद सराफा चौपाटी का मामला वे स्वयं देखेंगे और सबकुछ व्यवस्थित कर देंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यहां चौपाटी दुकानदार आपस में लड़ते हैं।
उनके बीच मारपीट होती रहती है। दूसरी बात ये है कि महापौर के साथ बैठक में 60 दुकानें लगने पर ही सहमति बनी थी, ये 80 दुकानें कैसे हो गई, समझ में नहीं आ रहा है। हमारी आपत्ति तो सराफा में चौपाटी लगने से ही है। फिर भी यदि दुकानें लगना हैं तो वो तय दुकानें ही लगें और अशांति न फैले।
पदाधिकारी व कमेटी सदस्य अजय लाहोटी ने कहा कि मारपीट से सराफा का नाम खराब हो रहा है। इसलिए इस मामले को जल्द से जल्द निपटाया जाना जरूरी है। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने कहा कि सभी दुकानों और फूड स्टॉल को स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होगा। निगम ने सुरक्षा व्यवस्था से लेकर सफाई तक के लिए कुछ बिंदु तय किए हैं, जिनका पालन करना सभी दुकानदारों के लिए अनिवार्य होगा।
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