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675 साल पुरानी देव भूमि हड़प गया भूमाफिया: होलकर स्टेट के दस्तावेजों से हुई पुष्टि- जमीन महादेव मंदिर चंद्रहास्य की...

विस्तार महू नाका से अन्नपूर्णा तक था अधिकारियों की साठगांठ से कटी अवैध कॉलोनियां अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर । होलकर रियासत द्वारा वर्तमान पुराने आरटीओ रोड पर महादेव मंदिर के लिए 1356 म

Khulasa First

संवाददाता

17 दिसंबर 2025, 12:55 अपराह्न
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675 साल पुरानी देव भूमि हड़प गया भूमाफिया

विस्तार महू नाका से अन्नपूर्णा तक था

अधिकारियों की साठगांठ से कटी अवैध कॉलोनियां

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
होलकर रियासत द्वारा वर्तमान पुराने आरटीओ रोड पर महादेव मंदिर के लिए 1356 में दान दी गई जमीन एक भूमाफिया ने हड़प ली। होलकरकालीन दस्तावेजों के अनुसार उस समय जमीन का क्षेत्रफल 35 एकड़ था। भूमाफिया के विरुद्ध लगातार शिकायत की जा रही है पर सुनवाई नहीं हो रही।

तत्तकालीन अधिकारियों की मिलीभगत से देवस्थल के नाम दर्ज भूमि निजी नामों पर दर्ज कर दी गई। इन खसरों पर कूटरचित दस्तावेजों से कई अवैध कॉलोनियां और निजी संपत्तियां निर्मित हो चुकी हैं।

नकल खसरा फौजा कस्बा, जिला इंदौर, रियासत इंदौर सन 1356 फ़सली (सन 1948-49) का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आया है, जो होलकर स्टेट इंदौर दरबार के छः आने के स्टांप पर चार आने कोर्ट फीस के टिकट के साथ सत्यापित है। यह दस्तावेज स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है संबंधित भूमि श्री महादेव मंदिर चंद्रहास्य देवस्थल के नाम पर दर्ज थी। अन्य उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 1915 के पूर्व तालाब एवं घुड़दौड़ के उपयोग में आने वाली भूमि भी सच्चिदानंद चंद्रहास्य अवस्थी को पूजा-पाठ के उद्देश्य से दान दी गई थी। जो देवस्थल की इनामी भूमि के रूप में दर्ज रही है।

35 एकड़ भूमि सिमटी 10 बाय 20 हिस्से में, मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड में दर्ज थी: जिला प्रशासन के मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड के अनुसार श्री महादेव मंदिर के नाम पर लगभग 35 एकड़ भूमि दर्ज थी। वर्तमान स्थिति यह है यह विशाल देवस्थान सिमटकर मात्र 10 बाय 20 के छोटे से क्षेत्र में रह गया है। इस भूमि के अधिकांश सर्वे नंबर निजी नामों पर दर्ज हो गए हैं। कुछ हिस्सों पर अन्य देवस्थानों के नाम दर्ज हैं, जबकि कुछ प्रशासन के अधीन। यह स्थिति गंभीर संदेह उत्पन्न करती है कि देवस्थान की मूल भूमि को योजनाबद्ध तरीके से हड़प लिया गया।

फर्जीवाड़े से कॉलोनियां काटने का आरोप
आरोप है इस देवस्थल की इनामी भूमि पर अवैध कॉलोनियां काट दी गईं। गंभीर प्रश्न यह है देवस्थान की भूमि आवासीय कैसे हो गई। आरोपों के अनुसार सब नजूल विभाग के बड़े अधिकारियों और कॉलोनाइज़र बॉबी छाबड़ा की साठगांठ से हुआ। खसरों में हेरफेर कर निजी नाम चढ़ा दिए गए, जबकि कानूनन यह भूमि देवस्थान की थी इसलिए इस प्रकार हस्तांतरित नहीं किया जा सकता था।

पेशवाकाल में पूजा-पाठ के लिए दी थी भूमि...
दावा है पेशवा काल में रियासत इंदौर ने सन 1356 के आसपास भीमाशंकर महादेव मंदिर, रामपुर कोठी की भूमि सच्चिदानंद चंद्रहास्य अवस्थी को पूजा-पाठ एवं धार्मिक कार्यों के लिए प्रदान की थी। इस देवस्थल से जुड़े खसरा नंबर इस प्रकार बताए जा रहे हैं:1458, 1459, 1460, 1461, 1462, 1463, 1464, 1465, 1466, 1467, 1468। सभी देवस्थान की इनामी भूमि बताए जा रहे हैं।

करोड़ों-अरबों के गबन का आरोप
कहा जा रहा है यह प्रकरण हाई कोर्ट, राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना निपटाया नहीं जा सकता। आरोप है कई अधिकारियों ने कॉलोनाइज़रों के साथ मिलकर बड़ा आर्थिक लाभ कमाया और अरबों रुपए का गबन किया। जब आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था का नाम भूमि पर चढ़ाया गया, उस समय कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत लिए जाने का भी आरोप सामने आया है।

सीएम, पीएम सहित कई जांच एजेंसियों को शिकायत
सुदामा नगर ई-सेक्टर निवासी मुन्ना उर्फ लीलाधर चौधरी ने शातिर अपराधी बताए जा रहे रणवीर उर्फ बॉबी छाबड़ा तथा राजस्व विभाग के कई अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थी का आरोप है वर्षों से की जा रही उनकी शिकायतों पर प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में कार्रवाई नहीं हो रही है। रणवीर उर्फ बॉबी छाबड़ा के विरुद्ध 100 से अधिक शिकायतें कीं।

सभी अधिकारियों द्वारा कथित रूप से दबा दी गईं। तहसीलदार नारायण नांदेडकर, पटवारी अमन शुक्ला, जीवन चौधरी तथा एसडीएम कार्यालय से जुड़े अधिकारी कार्रवाई के नाम पर उन्हें गुमराह करते रहे, जबकि कुछ अधिकारी आरोपित बॉबी के साथ मिलीभगत में भी दिखाई दिए।

मुन्ना चौधरी का दावा है 7 मई 2025, 31 मई 2025 और 4 अगस्त 2025 सहित तारीखों पर वरिष्ठ अधिकारियों, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय को शिकायतें की परंतु हर बार टालमटोल की गई। राऊ तहसील में बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद तहसीलदार से संपर्क नहीं हो पाया और उन्हें जान का खतरा होने के बावजूद संरक्षण नहीं दिया गया।

प्रार्थी ने सीएम हेल्पलाइन पर भी कई शिकायतें (शिकायत क्रमांक 30535356 दिनांक 13.01.2025 और 25779555 दिनांक 24.01.2024 सहित) दर्ज कराई थीं, परंतु उनके अनुसार संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 2019, 2022 और 2023 में उनके बयान भी दर्ज किए गए, किंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी बॉबी और उसके सहयोगियों द्वारा आकाश गृह निर्माण संस्था के सदस्यों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई तथा मंदिर/देवस्थान की भूमि पर अवैध कॉलोनी ‘सच्चिदानंद कॉलोनी’ विकसित की गई। उनके अनुसार लगभग 35 एकड़ शासकीय एवं देवस्थान भूमि पर राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर अवैध परिवर्तन किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस भूमि की वर्तमान कीमत 30 से 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट बताई जाती है।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि 50 लाख रुपये लेकर रजिस्ट्री करवाने का बयान एक प्रॉपर्टी ब्रोकर राजेंद्र भुसारी द्वारा दिया गया है, जिसमें ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका का भी उल्लेख है। प्रार्थी का कहना है कि उन्होंने 1950 से 2005 तक के राजस्व अभिलेख लेकर यह सिद्ध किया है कि भूमि मंदिर की है, फिर भी आरोपीगण ने रामपुरा कोठी भीमाशंकर महादेव मंदिर से संबंधित भूमि की रजिस्ट्री करवा दी, जो कानूनन प्रतिबंधित है। कई बार शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मुन्ना चौधरी ने मांग की है कि तत्कालीन तहसीलदार नारायण नांदेडकर, पटवारी अमन शुक्ला, जीवन चौधरी तथा अन्य संबंधित राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और मुख्य आरोपी रणवीर उर्फ बॉबी छाबड़ा के साथ सभी सहयोगियों पर भी कानूनी कार्यवाही की जाए।

उन्होंने अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है। प्रार्थी के अनुसार सभी शिकायतों एवं दस्तावेजों की प्रतियां उन्होंने संबंधित विभागों को सौंप दी हैं और अपेक्षा है कि उच्च अधिकारी उनके आवेदन पर संज्ञान लेकर उचित न्याय प्रदान करेंगे।

सरकार की चुप्पी पर सवाल
इतने गंभीर आरोपों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का खुलासा होने के बावजूद सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 675 साल पुरानी देवस्थान भूमि के इस कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था, भूमि रिकॉर्ड प्रणाली और धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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