6 साल बाद भी पीजी सीट नहीं: स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई की स्थिति खराब
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में 6 साल बीतने के बाद भी एक भी पोस्ट ग्रेजुएट सीट अलॉट नहीं हो सकी है। इससे अंदाजा लगता है कि इसकी स्थिति बहुत खराब है। 2019 में ही डायरेक्टर सहित 12
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में 6 साल बीतने के बाद भी एक भी पोस्ट ग्रेजुएट सीट अलॉट नहीं हो सकी है। इससे अंदाजा लगता है कि इसकी स्थिति बहुत खराब है। 2019 में ही डायरेक्टर सहित 12 फैकल्टी की भर्ती पूरी कर ली गई थी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत 2019 में शुरू किए गए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई की हालत खराब है।
2020 में 8 (प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर) ने जॉइन भी कर लिया और तभी से उन्हें वेतन मिलना शुरू हो गया। अब तक करीब 10 करोड़ रुपए सैलरी पर खर्च होने के बावजूद आज तक किसी शिक्षक ने एक भी छात्र को नहीं पढ़ाया।
उधर, ग्वालियर के मानसिक आरोग्यशाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 6 साल से एमफिल और एमडी की सीटों पर एडमिशन हो रहे हैं।
जबलपुर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन को भी एमडी और डीएम की 6-6 सीटें मिल गईं, लेकिन इंदौर का आई सेंटर छह साल में एक भी पीजी सीट हासिल नहीं कर पाया। अगर शुरुआत में ही मंजूरी मिल जाती तो 50 से ज्यादा नेत्र सर्जन अब तक तैयार हो चुके होते।
खामी थी, फिर भी आवेदन दिया
फैकल्टी ने 2020 में जॉइन किया, तब तक अस्पताल की बिल्डिंग तैयार ही नहीं थी। इनकी ड्यूटी एमवाय अस्पताल में लगा दी गई। 2022 में नई बिल्डिंग बनी और करीब 20 करोड़ रुपए की मशीनें लगाई गईं। 2022-23 में इंदौर ने 11 सीटों के लिए 13 लाख रुपए खर्च कर आवेदन दिया।
उक्त आवेदन नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि अस्पताल में बेड 200 की जगह 100 थे और एनेस्थेसिया, पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री विभाग नहीं थे। ऊपर से फैकल्टी नियुक्तियों को लेकर शिकायतें भी दर्ज थीं, जिनमें चयनित प्रोफेसरों की योग्यता की जांच चली।
इन शिकायतों की क्लोजर रिपोर्ट हाल ही में आई है, जिसके बाद अब सीटों के लिए फिर प्रयास किए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि खामियों के बावजूद आवेदन इसलिए किया, क्योंकि शासन स्तर से निर्देश आए थे कि अप्लाई कर दो, मान्यता मैनेज हो जाएगी।
तकनीकी कमियां दूर कर रहे...कुछ तकनीकी बिंदुओं पर कमियां थीं, जिन्हें लगातार दूर कर रहे हैं। नेत्र रोग में पीजी सीटें एमजीएम के पास हैं, और भी सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। - डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज
सभी पैमानों पर खरा उतरना जरूरी
पूर्व डीन डॉ. वीपी पांडे बताते हैं कि जब भी पीजी सीटों के लिए अप्लाई करते हैं, तो उसके लिए कई बिंदुओं को परखा जाता है। शिक्षण संस्थान में पढ़ाई के हिसाब से टीचरों की नियुक्ति होना आवश्यक है। मरीजों की एक निश्चित संख्या होना जरूरी है।
तय संख्या में बेड्स भी होना चाहिए, ताकि स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग ठीक से हो सके। इन बिंदुओं पर कोई संस्थान खरा उतरता है तो उसे 3 से 6 महीने में सीटें आवंटित हो जाती हैं। जो संस्थान खरा नहीं उतरता उसे परमिशन नहीं मिल सकती।
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