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6 करोड़ में बनेगा रणजीत लोक, बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । करीब 150 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में भी महाकाल लोक की तर्ज पर रणजीत लोक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिस पर 6 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रणजीत लोक बनाने में जो पत्थर लगेगा उ

Khulasa First

संवाददाता

10 दिसंबर 2025, 7:41 पूर्वाह्न
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6 करोड़ में बनेगा रणजीत लोक, बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
करीब 150 साल पुराने रणजीत हनुमान मंदिर में भी महाकाल लोक की तर्ज पर रणजीत लोक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिस पर 6 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रणजीत लोक बनाने में जो पत्थर लगेगा उस पर भी इतनी ही राशि खर्च होगी। 4.30 एकड़ में फैले रणजीत हनुमान मंदिर में सिंहस्थ पूर्व लोक बनाने की तैयारी है।

मंदिर में कल से चार दिनी महोत्सव शुरू हो गया है। कल कलेक्टर शिवम वर्मा ने पूजन-अर्चन कर ध्वजारोहण किया। इसके बाद विभिन्न कार्यक्रम हुए। अब मंदिर में रणजीत लोक बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसमें एक विशाल शेड बनेगा ताकि श्रद्धालु बिना किसी दिक्कत के दर्शन कर सकें।

नई बाउंड्रीवॉल बनेगी, जिस पर हनुमानजी के विभिन्न स्वरूप पत्थरों पर उकेरे जाएंगे। पार्किंग से पाथवे का निर्माण किया जाएगा। लाइव टीवी से बाबा के दर्शन होंगे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप बरकरार रहेगा। आगे के भाग में नई बाउंड्रीवॉल बनेगी। इसके अलावा और भी विकास कार्य होंगे।

नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी जिम्मेदारी
प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक निर्माण की नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। रणजीत लोक की छत पर भी नक्काशी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंग-बिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा।

मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे। मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। अलग-अलग चरणों में यहां निर्माण और विकास कार्य होंगे। रणजीत लोक सिंहस्थ पूर्व बन जाएगा।

1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली: मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया।

1992 में आरसीसी छत डाली गई। उन्होंने बताया कि प्रभातफेरी निकालने के पीछे की कहानी ये है कि सीताजी के हरण के बाद सुग्रीव ने वानर सेना को उनका पता लगाने भेजा था। हनुमानजी पता लगाकर लौटे। भगवान राम ने उनसे कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो, लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम देता हूं। लाखों वानरों ने हनुमानजी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था, इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।

चार दिवसीय उत्सव शुरू: मंदिर में चार दिवसीय महोत्सव के पहले दिन कल कलेक्टर शिवम वर्मा ने पूजन-अर्चन कर मंदिर में 11 हजार ध्वजों का पूजन किया। आज भजन संध्या होगी और 51 हजार दीप जलाकर दीपावली पर्व मनाया जाएगा।

कई गायक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे। कल विग्रहों का महाभिषेक और सवा लाख रक्षा सूत्रों को अभिमंत्रित किया जाएगा। 12 दिसंबर को सुबह 5 बजे स्वर्ण रथ में प्रभातफेरी निकाली जाएगी, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। इस दौरान रक्षा सूत्र वितरित किए जाएंगे।

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