जंगलों में 58 प्रजातियां महज एक प्रतिशत बची, अब 5 लाख पौधे लगेंगे
खुलासा फर्स्ट…इंदौर । जंगलों में 58 तरह की प्रजातियों की संख्या महज एक प्रतिशत रह गई हैं। वन विभाग अब इनकी संख्या बढ़ाने के लिए 5 लाख पौधे तैयार करवा रहा है जो होलकर और आर्ट एवं कामर्स कॉलेज के आसपास
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
जंगलों में 58 तरह की प्रजातियों की संख्या महज एक प्रतिशत रह गई हैं। वन विभाग अब इनकी संख्या बढ़ाने के लिए 5 लाख पौधे तैयार करवा रहा है जो होलकर और आर्ट एवं कामर्स कॉलेज के आसपास लगेंगे। मुख्य वन संरक्षक प्रेमनारायण मिश्र ने बताया कि इंदौर वन मंडल के जंगलों में दहीमन, बिजा, कुल्लू जैसी 58 प्रजातियां 1 फीसदी ही रह गई हैं। जंगलों में मिश्रित प्रजातियां बनी रहे, इसके लिए नर्सरी में इस बार 5 लाख से अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
ये पौधे शहर में होलकर, आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज परिसर के साथ ही रोड, पानी, बिजली, पुल के लिए अधिग्रहित हुई जंगल की जमीनों के बदले में जहां जमीनें मिलेंगी, वहां रोपे जाएंगे। दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं विलुप्तप्राय वनस्पतियों को बचाने के लिए सोशल फॉरेस्ट्री विभाग प्रयास कर रहा है। इंदौर, महू, मानपुर और चोरल में बीट चिह्नित कर निश्चित क्षेत्र में रोपण किया जाएगा, ताकि खत्म हो रही प्रजातियां तेजी से पनप सकें।
आसपास के वन मंडलों से भी बीज बुलाकर नए पौधे तैयार किए जाएंगे। इस कार्य का लक्ष्य उन वृक्ष प्रजातियों को पुनर्जीवित करना है, जिनकी संख्या जंगलों में 1 प्रतिशत से भी कम रह गई है। डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया विभाग ने अब तक इंदौर वन मंडल में 58 प्रजातियों की पहचान की है, जिनमें दहीमन, बिजा, हल्दू, कुल्लू, हर्रा, बेहड़ा, मेंदा, तिनसा, अंजन, अर्जुन, सलई, काला तेंदू, मांडू की इमली जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं। ये वृक्ष जल संरक्षण, मिट्टी की मजबूती, वायु गुणवत्ता व जैव विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कई प्रजातियां औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनका संरक्षण पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
रेसीडेंसी नर्सरी की क्षमता बढ़ाएंगे... रेसीडेंसी नर्सरी में खत्म हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए चिह्नित किया है। इस नर्सरी में पौधे तैयार करने की कुल क्षमता 3.5 लाख पौधों की है। वर्तमान में यहां 2 हजार पौधे उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 50 हजार पौधों तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए वन समितियों द्वारा बीज-संग्रह अभियान शुरू किया है। जनवरी-फरवरी में विशेष अंकुरण कार्य की योजना बनाई है। जून में होलकर कॉलेज में 5 हजार पौधे लगाए गए हैं। वन समितियों, ग्राम वन समितियों और कॉलेज-स्कूलों के माध्यम से व्यापक स्तर पर जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। हर समिति को 2 से 5 हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है।
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