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58 करोड़ के बैंक लोन घोटाले का मामला: इस बड़े ग्रुप पर ईडी की छापेमारी; 23 लाख रुपए किए जब्त

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। यह छापेमारी 23 और 24 दिसंबर को एक साथ इंदौर और मुंबई में की गई, जहां PMLA एक्ट 2002 के तहत कई ठिकानों पर तल

Khulasa First

संवाददाता

25 दिसंबर 2025, 11:18 पूर्वाह्न
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58 करोड़ के बैंक लोन घोटाले का मामला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। यह छापेमारी 23 और 24 दिसंबर को एक साथ इंदौर और मुंबई में की गई, जहां PMLA एक्ट 2002 के तहत कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

बता दें कि, ईडी की जांच रुचि ग्रुप से जुड़े बैंक लोन धोखाधड़ी मामलों को लेकर की जा रही है। रुचि ग्रुप की स्थापना स्वर्गीय कैलाश चंद्र शाहरा और उमेश शाहरा ने की थी।

सीईओ के ठिकानों पर पहुंची ईडी
जांच के दौरान ईडी की टीम उमेश शाहरा और कंपनी के सीईओ ईश्वर कलंत्री से जुड़े ठिकानों पर भी पहुंची। तलाशी अभियान के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद किए गए।

23 लाख रुपए किए जब्त
ईडी की कार्रवाई में 20 लाख रुपए से अधिक के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए है। इसके साथ ही 23 लाख रुपए से ज्यादा नकद जब्त किया गया है। कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए गए है। इन दस्तावेजों को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।

58 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में दर्ज है केस
इस मामले की शुरुआत भोपाल सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए 58 करोड़ रुपए के बैंक लोन धोखाधड़ी केस से हुई थी। इसमें रुचि ग्रुप की कई कंपनियां शामिल हैं।

जिसमें रुचि ग्लोबल लिमिटेड (अब: एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड), रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब: स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड), आरएसएएल स्टील प्राइवेट लिमिटेड (अब: एलजीबी स्टील प्राइवेट लिमिटेड) ईडी ने इसी केस को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत अपनी जांच में लिया है।

लेन-देन में की हेराफेरी
ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी कंपनियों का नेटवर्क बनाकर लेन-देन में हेराफेरी की। फर्जी बिक्री और खरीद दिखाकर खातों में गड़बड़ी की। बैंक से प्राप्त ऋण राशि का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग किया। 

जानबूझकर कंपनियों को घाटे में दिखाया ताकि लोन डिफॉल्ट किया जा सके, अपराध से अर्जित धन को छिपाने और घुमाने (लॉन्ड्रिंग) की कोशिश की गई।

जांच जारी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अपराध से जुड़ा है और आगे की जांच जारी है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।

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