50 हजार जॉब, कर्मचारियों को कैशलेस इलाज सुविधा: राज्य सरकार के बजट में युवा- किसान कर्मचारियों पर रहेगा फोकस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
विधानसभा के बजट सत्र की अधिसूचना जारी हो गई है। 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलने वाले सत्र में डॉ. मोहन यादव सरकार पहली बार रोलिंग बजट का कॉन्सेप्ट पेश करेगी, यानी इस बार बजट में एक साल की बजाय अगले तीन सालों के फाइनेंशियल रोडमैप की झलक देखने को मिलेगी।
बजट के पिटारे से आम जनता, कर्मचारियों, किसानों और युवाओं के लिए कई बड़ी सौगातें निकलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अगले एक साल में 50,000 नई सरकारी नौकरियों का ऐलान कर सकती है।
राज्य के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 35 लाख रुपए तक की केशलैस स्वास्थ्य बीमा योजना सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक हो सकती है।
किसानों की आय दोगुनी करने के मकसद से हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और शहरी परिवहन को सुगम बनाने के लिए सस्ती सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की भी तैयारी है।
बता दें कि मोहन सरकार अपने कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट पेश करने वाली है। इस बार 4.65 लाख करोड़ का बजट पेश करने का अनुमान है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा है।
कर्मचारियों के लिए मेगा हेल्थ स्कीम
बजट में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य आश्वासन योजना शुरू कर सकती है। इसमें कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 35 लाख रुपए तक का केशलैस कवर मिलेगा। वर्तमान में, कर्मचारियों को पहले अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ता है और बाद में विभाग से प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करना होता है, जिसमें अक्सर पूरी राशि नहीं मिलती। नई योजना के तहत, हरियाणा और राजस्थान की तरह, कर्मचारी और उनके परिवार के लोग योजना के कार्ड के जरिए सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में केशलैस इलाज करा सकेंगे।
50,000 नौकरियों का वादा
सरकार बजट में 50,000 से अधिक रिक्त सरकारी पदों को भरने की घोषणा कर सकती है। यह भर्तियां मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाएंगी।
भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए परीक्षाओं के पैटर्न में भी कुछ बदलाव का ऐलान हो सकता है। युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ‘युवा उद्यमी योजना’ जारी रहेगी।
सहकार टैक्सी: ओला-उबर को टक्कर देने की तैयारी
शहरी क्षेत्रों में परिवहन को सुगम और सस्ता बनाने के लिए ‘सहकार टैक्सी सेवा’ शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। सहकारिता विभाग की यह योजना ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों का एक सहकारी विकल्प प्रदान करेगी।
पांच पॉइंट्स में समझे ये कैसे काम करेगी। इसका संचालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और अन्य बड़ी सहकारी समितियों के जरिए होगा। यह एक सहकारी मॉडल होगा, इसलिए ड्राइवरों को किसी कंपनी को कमीशन नहीं देना होगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा और राइड्स मौजूदा टैक्सियों की तुलना में सस्ती होंगी। कमीशन मुक्त होने से ड्राइवरों की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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