केनरा बैंक में 40 लाख का खेल: ईओडब्ल्यू ने 5 पर दर्ज किया केस; झूठे सत्यापन से बैंक को लगाई चपत
KHULASA FIRST
संवाददाता

अफसरों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों पर लोन पास, बिकी हुई संपत्ति को बंधक दिखाया
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राष्ट्रीयकृत बैंक में बैठे जिम्मेदार अफसरों की कथित मिलीभगत से हुए 40 लाख रुपए के लोन घोटाले का खुलासा हुआ है। फर्जी दस्तावेज, भ्रामक जानकारी और आंख मूंदकर किए गए भौतिक सत्यापन के दम पर केनरा बैंक से मशीनरी लोन मंजूर कर दिया गया, जबकि जिस संपत्ति को बंधक दिखाया गया, वह सालों पहले बिक चुकी थी।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक, क्रेडिट मैनेजर सहित पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वरसिंह यादव के मुताबिक केनरा बैंक के उप महाप्रबंधक शिवानंद तोतड़ की शिकायत पर उक्त कार्रवाई की गई। जांच में खुलासा हुआ कि चंद्रशेखर पचौरी निवासी जूनी इंदौर ने अप्रैल 2018 में जय शिव एंड कंपनी के नाम से नंदा नगर शाखा में चालू खाता खुलवाया।
इसके बाद मशीनरी खरीदने के बहाने नौलखा शाखा में 40 लाख रुपए के लोन के लिए आवेदन किया गया। लोन आवेदन में राममोहन अग्रवाल को को-ओब्लिगेंट दर्शाया गया और उषा नगर एक्सटेंशन स्थित एक प्लॉट को बंधक बताया गया।
दस्तावेजों में संपत्ति को सभी प्रकार के भार से मुक्त दिखाया गया, लेकिन ईओडब्ल्यू जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। खुलासा हुआ कि संबंधित प्लॉट राममोहन अग्रवाल ने वर्ष 2000 में खरीदा था और 2001 में वहां 13 फ्लैट व 6 दुकानें बनाकर सभी यूनिट बेच दी गई थीं। लोन स्वीकृति के समय को-ओब्लिगेंट न तो उस संपत्ति का मालिक था और न ही वह संपत्ति कागजों में दर्शाई स्थिति में मौजूद थी।
इसके बावजूद तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी ने परियोजना रिपोर्ट को तकनीकी और आर्थिक रूप से उपयुक्त बताकर मई 2018 में लोन स्वीकृत करने की सिफारिश कर दी।
वहीं तत्कालीन शाखा प्रबंधक जतिन गुप्ता द्वारा प्रस्तुत भौतिक सत्यापन रिपोर्ट में बहुमंजिला इमारत का कोई उल्लेख नहीं किया गया। बैंक कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई भौतिक सत्यापन रिपोर्ट भी जांच में गलत और भ्रामक पाई गई। लोन स्वीकृत होने के बाद आरोपी द्वारा किस्तों का भुगतान नहीं किया गया। अंतत: मई 2023 में खाते को एनपीए घोषित करना पड़ा।
इन सभी पर दर्ज हुआ केस
बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचने और अफसरों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर ईओडब्ल्यू ने चंद्रशेखर पचौरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक जतिन गुप्ता, तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी सहित पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
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