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हाई कोर्ट का निर्देश- 30 दिन में हो 40 लाख का भुगतान: महीनों भटकने के बाद प्रिंसिपल की विधवा को मिला हक

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । लंबे समय से अटकी फाइलों के बीच भटकती विधवा को हाई कोर्ट से राहत मिली है। रुणजी गौतमपुरा हासे स्कूल के प्रिंसिपल अजय जैन की मौत के बाद 11 महीनों से उनकी पत्नी कल्पना पेंशन, जीपीए

Khulasa First

संवाददाता

09 दिसंबर 2025, 8:32 पूर्वाह्न
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हाई कोर्ट का निर्देश- 30 दिन में हो 40 लाख का भुगतान

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
लंबे समय से अटकी फाइलों के बीच भटकती विधवा को हाई कोर्ट से राहत मिली है। रुणजी गौतमपुरा हासे स्कूल के प्रिंसिपल अजय जैन की मौत के बाद 11 महीनों से उनकी पत्नी कल्पना पेंशन, जीपीएफ, ग्रेच्युटी के लिए भटक रही थीं।

अफसर फाइल चल रही है, अधिकारी अवकाश पर हैं, कहकर टालते रहे। अंतत: हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को आदेश दिया कि उनके हक के करीब 40 लाख रुपए 30 दिन में प्रदान किए जाए। ंब्याज का प्रावधान है, तो वह भी तय समय में दें।

परदेशीपुरा निवासी अजय जैन रुणजी स्कूल में प्रिंसिपल थे। 11 जनवरी 2025 को स्कूल के लिए निकले थे। स्टेशन की सीढ़ियां चढ़ते वक्त उनकी तबीयत बिगड़ गई। लोगों ने जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट से मौत की जानकारी की। जैन बेहद जिम्मेदार थे। 300 से ज्यादा अवकाश बकाया थे। नजदीकी लोगों के अनुसार बहुत जरूरी होने पर ही अवकाश लेते थे।

अनुकंपा भी नहीं मिली- अजय जैन के परिवार में पत्नी कल्पना, दो बेटे उदित और मोहित और बेटी यशस्वी हैं। भावनात्मक पहलू यह कि सेवावधि में मौत हुई। परिवार ने बेटे मोहित की अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। फाइल भोपाल तक गई, लेकिन नियुक्ति नहीं मिली। कल्पना जैन हाउसवाइफ हैं।

तीनों बच्चे कुंवारे हैं। पति की मौत के बाद उन्होंने फैमिली पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी के आवेदन किए। विभागीय अफसर हर बार उम्मीद बंधाकर भेज देते अभी प्रक्रिया चल रही है। अजय जैन के समकालीन कुछ शिक्षकों की रिटायरमेंट फाइलें इसी बीच पूरी हो गईं और उनकी पेंशन भी शुरू हो गई लेकिन उनके मामले में जिम्मेदारों का रवैया ढीला ही रहा। परिवार के प्रयासों के बाद जून 2025 में पेंशन शुरू तो हुई, लेकिन जीपीएफ और ग्रेच्युटी की करीब 40 लाख की राशि लंबित रही।

इंदौर–भोपाल के 25 से ज्यादा लगाए चक्कर
कल्पना और उनके बेटों ने बीईओ देपालपुर, संकुल रुणजी गौतमपुरा, डीईओ, डीपीआई, ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफिस, जनसुनवाई और लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में 4–5 बार आवेदन दिए। 25 से ज्यादा बार इंदौर–भोपाल के चक्कर लगाने पड़े।

उच्च न्यायालय में याचिका लगाने वाले अधिवक्ता ऋषि आनंद चौकसे ने बताया पत्नी ने जब भी आवेदन दिया, उनके सभी दस्तावेज पूरे थे। नियमों के तहत अचानक मृत्यु की स्थिति में नॉमिनी को समय पर पूरी राशि मिलनी चाहिए थी।

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