अब भक्तों को 30 मिनट में हो सकेंगे खजराना गणेश के दर्शन: प्रथम पूज्य का आशीर्वाद और 2026 की नई शुरुआत
हेमंत उपाध्याय 99930- 99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर । भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसी कारण किसी नए कार्य अथवा नववर्ष की शुरुआत उनके दर्शनों के साथ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Khulasa First
संवाददाता

हेमंत उपाध्याय 99930- 99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसी कारण किसी नए कार्य अथवा नववर्ष की शुरुआत उनके दर्शनों के साथ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश में अनगिनत भक्तों की आस्था के केंद्र शहर के खजराना गणेश के दर्शनों के लिए नववर्ष की पूर्व संध्या से ही भक्तों का हुजूम उमड़ने लगता है।
खजराना मंदिर प्रबंध समिति ने पिछले वर्षों के अनुभव और भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से नववर्ष की पूर्व संध्या से लेकर नववर्ष में दर्शन के लिए विशेष योजना बनाई है। इसमें भक्तों को कतार में लगने के बाद करीब 30 मिनट में खजराना गणेश के दर्शन हो सकेंगे।
खजराना गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने खुलासा फर्स्ट को बताया कि इस बात के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं कि भक्तों को आधे घंटे में भगवान श्रीगणेश के दर्शन हो जाएं। संभावना है कि नववर्ष की पूर्व संध्या से लेकर नववर्ष के पहले दिन चार से पांच लाख श्रद्धालु भगवान खजराना गणेश के दर्शनों के लिए पहुंचेंगे। पुजारी अशोक भट्ट के अनुसार मंदिर में लगे स्थायी बैरिकेड के आगे और बैरिकेड लगाए जाएंगे ताकि दर्शकों को सुगम दर्शन हो सकें। दर्शकों की सुविधा के लिए कर्मचारी भी तैनात किए जाएंगे।
विघ्नहर्ता के द्वार से भक्त करेंगे नव वर्ष का शुभारंभ
आम तौर पर खजराना गणेश मंदिर के पट रात 12 तक खुले रहते हैं और सुबह पांच बजे फिर खोल दिए जाते हैं। पिछले समय के अनुभव और हुड़दंगी लोगों के कारण किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने इसलिए नववर्ष की पूर्व संध्या पर रात 11 बजे तक ही भक्तों को दर्शकों का अवसर मिल सकेगा। रात की आरती में भक्त शामिल नहीं हो सकेंगे।
फूलों से की जाएगी सजावट
मंदिर समिति के अनुसार नववर्ष पर खजराना गणेश के गर्भगृह को फूलों से सजाया जाएगा। मंदिर परिसर में भी आकर्षक साज-सज्जा की जाएगी। प्रबंध समिति की बैठक में इंतजामों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
6 जनवरी से तिल चतुर्थी मेला
पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि मंदिर के लिए तिल चतुर्थी का विशेष महत्व रहता है। इस बार यह मेला 6 से 8 जनवरी तक लगाया जाएगा। तिल चतुर्थी पर मंदिर में विशेष सजावट की जाती है।
खजराना गणेश मंदिर का इतिहास और मान्यता
खजराना गणेश मंदिर 1735 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया था। इतिहास के अनुसार मुगल शासक औरंगजेब के समय खंडित होने से बचाने के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को एक कुएं में डालकर छिपा दिया गया था।
कहा जाता है कि पुजारी मंगल भट्ट को सपने में भगवान गणेश ने दर्शन देकर उसी जगह मंदिर बनाने को कहा था। देवी अहिल्या को यह बात बताई गई। उस स्थान को खोदा गया तो वैसी ही मूर्ति निकली थी।
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