3 दशक पुरानी धोखाधड़ी दफ्तरों की धूल में दफन: पुलिस मुख्यालय की 15 दिन की समय-सीमा भी धरी रह गई
भूमाफिया–अधिकारियों की साठगांठ से बने अवैध मॉल का जांच प्रतिवेदन 11 साल से लापता अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर । भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की असलियत का खुलासा पुलिस मुख्यालय के प
Khulasa First
संवाददाता

भूमाफिया–अधिकारियों की साठगांठ से बने अवैध मॉल का जांच प्रतिवेदन 11 साल से लापता
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की असलियत का खुलासा पुलिस मुख्यालय के पत्र क्र. पु.मु./समनि/को.फ्रॉ./शिका/308/2025 से हुआ है। 18 अगस्त 2025 को मुख्यालय ने पुलिस आयुक्त को जारी उक्त पत्र में कहा है शिकायतकर्ता अनिल वर्मा द्वारा कुख्यात भूमाफिया पिंटू छाबड़ा एवं तृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था से जकुड़े अध्यक्ष राजेश सिद्ध, बालमुकुंद सिद्ध, मोहनलाल पिता ताराचंद चुघ, रीना पति मोहनलाल चुघ, नीतेश पिता मोहनलाल चुघ, आलोक भंडारी एवं पदाधिकारियों पर लगे गंभीर आरोपों पर 15 दिन में प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया था, जो प्राप्त नहीं हुआ। यानी जिस मामले में भूमाफिया, सहकारिता संस्थाओं, रजिस्ट्री घोटाले और करोड़ों के लोन का सवाल था, उस पर जांच अधिकारी ने कार्रवाई से साफ हाथ खड़े कर दिए।
11 साल से फाइलों में घूम रही न्याय की लाश
शिकायतकर्ता अनिल वर्मा बताते हैं उनकी जमीन पर तीन दशक पहले धोखाधड़ी हुई। शिकायत किए 11 वर्ष बीत चुके, लेकिन कार्रवाई शून्य। हर बार नई जांच, नया प्रतिवेदन, नया आदेश और फिर वही जांच का नाटक । इस बीच, जिस भूमि पर विवाद था—उसी पर भूमाफिया ने बैंक से करोड़ों का लोन उठाया और मॉल खड़ा कर दिया। यह सब तब हुआ जब—प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री,आयुक्त जैसे शीर्ष पदों तक शिकायतें की लेकिन अधिकारियों और भूमाफिया की सांठगांठ के चलते पूरा तंत्र मौन रहा।
जांचों की सिफारिशें बेअसर
सरकारी जांचों में स्पष्ट रूप से कहा गया था अवैध निर्माण तुरंत रोका जाए, रजिस्ट्री निरस्त की जाए, भूमाफिया पर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया जाए लेकिन इन सभी सिफारिशों को दरकिनार कर दिया गया। परिणाम विवादित भूमि पर मॉल खड़ा है। प्रशासन मौन, जिम्मेदार गायब।
सहकारिता विभाग भी सवालों के घेरे में
संयुक्त आयुक्त सहकारिता एवं संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने उपायुक्त से कनकेश्वरी और तृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था की शिकायत (23 जून 2025) पर 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। संयुक्त आयुक्त बीएल मकवाना ने निर्देश दिया था शिकायत के सभी तथ्यों की गहन जांच की जाए, सहकारिता संस्था के रिकॉर्ड खंगाले जाएं, 4 बिंदुओं की जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराई जाए और पूरी रिपोर्ट 15 दिनों में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए।
सहकारिता प्रावधानों का दुरुपयोग कर जमीन हड़पने की साजिश
शिकायतकर्ता अनिल वर्मा के अनुसार भूमाफिया पिंटू छाबड़ा गिरोह ने तृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों के साथ मिलकर सहकारिता कानून की जटिल प्रक्रियाओं को हथियार बनाकर जमीन हड़पने की संगठित साजिश रची। सहकारी संस्थाओं को रजिस्ट्री शुल्क से छूट का लाभ हड़पने के लिए षड्यंत्र रचा गया। उनकी पारिवारिक भूमि स्थानांतरण मामले में न वैधानिक प्रक्रिया अपनाई, न सदस्यों की पात्रता जांची न किसी तरह की जरूरी स्वीकृति ली गई। जमीन हड़प कर अवैध धन अर्जित किया गया।
कैसे हड़पी 4.59 एकड़ जमीन
ग्राम खजराना की भूमि सर्वे क्र. 33 (2.75 एकड़) और 28/2 (1.84 एकड़) वर्मा परिवार ने विधिवत खरीदी थी। आवेदक ने बालमुकुंद सिद्ध के साथ विक्रय अनुबंध और आम मुख्त्यारनामा किया। बालमुकुंद सिद्ध ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर सहकारिता अधिनियम का दुरुपयोग कर भूमि को तृष्णा और कनकेश्वरी सहकारी संस्थाओं को अवैध रूप से स्थानांतरित कर दिया।
सहकारिता कार्यालय की जांच में यह अनियमितता सामने आ चुकी है। मामला पुलिस मुख्यालय के सहकारिता फ्रॉड प्रकोष्ठ के दायरे में है लेकिन कार्रवाई शून्य।
सहकारिता विभाग ने नहीं दी जानकारी: विभाग से जानकारी मांगी गई थी कि 21.01.1994 को खरीदी गई भूमि के लिए कितने सदस्य पात्र थे? कलेक्टर कार्यालय से कॉलोनाइजर लाइसेंस, नक्शा स्वीकृति, अनापत्तियां लेने में क्या कार्रवाई हुई? सदस्यों के नाम प्रस्तावित भूखंड का नक्शा स्वीकृति, विकास की क्या जानकारी है? 1997 से भूमि के विक्रय/हस्तांतरण का रिकॉर्ड, 2001–02 से 2024 तक की सदस्यता सूची, ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराए लेकिन उसने जानकारी नहीं दी।
तीन दशक का घोटाला, 11 साल से शिकायत: पूरे प्रकरण में साफ है भूमाफिया सक्रिय है और प्रशासन निष्क्रिय। कानून स्पष्ट है लेकिन कार्रवाई गायब। शिकायतकर्ता लड़ रहा है, वहीं फाइलें सो रही हैं। तीन दशक का धोखाधड़ी इतिहास,11 साल की शिकायत यात्रा, करोड़ों के बैंक लोन, अवैध निर्माण, मॉल का खड़ा हो जाना और सरकारी विभागों की धीमी, संदिग्ध कार्यशैली एक बड़े तंत्रगत भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश करते हैं।
किसी विभाग ने कार्रवाई नहीं की...
को-ऑपरेटिव फ्रॉड में शिकायत की थी। जिसके बाद पुलिस मुख्यालय ने इंदौर सी पी को पत्र लिखकर कार्रवाई कर 15 दिन में प्रतिवेदन मांगा था। जो अब तक नहीं दिया गई। क्योंकि पुलिस द्वारा सहकारिता विभाग में पत्राचार कर आगे कार्रवाई नहीं की, पुष्टि स्वयं ही की है। सहकारिता विभाग को की गई शिकायत की भी पूरी जांच नहीं हुई। दूसरी ओर भूमाफियाओं द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा से 200 करोड़ का लोन भी कराया गया है। - अनिल वर्मा, पीड़ित
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