चोइथराम ट्रस्ट की 21 हजार करोड़ की संपत्ति की जांच का रास्ता साफ: हाई कोर्ट से याचिका खारिज
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । चोइथराम चेरिटेबल ट्रस्ट ( सीसीटी) की करीब 21 हजार करोड़ रुपए की संपत्तियों की जांच जल्द शुरू होगी क्योंकि हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार लोक न्यास की जांच के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चोइथराम चेरिटेबल ट्रस्ट ( सीसीटी) की करीब 21 हजार करोड़ रुपए की संपत्तियों की जांच जल्द शुरू होगी क्योंकि हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार लोक न्यास की जांच के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के फैसले को ट्रस्ट की संपत्तियों की पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि जांच आसान नहीं होगी। सीसीटी का संबंध चोइथराम इंटरनेशनल फाउंडेशन (सीआईएफ) से होने के कारण दस्तावेजी और कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं लेकिन जांच से ट्रस्ट की संपत्तियों और फंड को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हाई कोर्ट ने पूर्व ट्रस्टियों की सभी आपत्तियों को खारिज कर साफ कहा किसी भी ट्रस्टी को शिकायत या आवेदन देने से नहीं रोका गया है।
कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकता है। कोर्ट ने माना आवेदन में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्ट्या कार्रवाई और सुनवाई योग्य हैं। चोइथराम इंटरनेशनल फाउंडेशन ( सीआईएफ) की ट्रस्ट डीड की व्याख्या को लेकर उठाया गया तर्क भी कोर्ट ने इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया। कहा यह विषय अंतिम सुनवाई में देखा जा सकता है। वहीं, पगरानी का नाम शिकायत से हटाने की मांग भी खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा सीसीटी के ट्रस्टी होने के कारण उनका नाम हटाने का आधार नहीं बनता।
ट्रस्ट 1972 से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सक्रिय
चोइथराम चेरिटेबल ट्रस्ट 1972 से इंदौर में स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का संचालन कर रहा है। संस्थापक ठाकुरदास चोइथराम पगारानी ने विदेश में सीआईएफ की स्थापना ट्रस्टों को वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से की थी।शिकायत के अनुसार सीआईएफ के पास अरबों रुपए के फंड और निवेश हैं, जिनमें सीसीटी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा, करीब 21 हजार करोड़ रुपए बताया गया है। सीसीटी चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश मोतीयानी का आरोप है यह राशि कभी सीसीटी तक नहीं पहुंची।
विदेशी कंपनियों में ट्रेडमार्क दर्ज कराने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है लेखराज पगारानी, किशोर पगारानी, रमेश थानवानी और दयाल दतवानी ने सीसीटी के ट्रस्टी या पूर्व ट्रस्टी रहते हुए सीआइएफ से जुड़ी अहम जानकारियां और महत्वपूर्ण ट्रेडमार्क विदेशी कंपनियों में दर्ज कराए।इन चारों ने रजिस्ट्रार, लोक न्यास की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था मामला विदेशी संपत्तियों से जुड़ा है, इसलिए रजिस्ट्रार को जांच का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर को दिए विस्तृत आदेश में इस तर्क को खारिज कर दिया।
वादी के वकील बोले– जांच पूरी तरह वैध
मोतियानी की ओर से पेश एडवोकेट अमोल श्रीवास्तव ने कहा हाईकोर्ट के आदेश से स्पष्ट है एमपी पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1951 की धारा 26 के तहत की जा रही कार्रवाई पूरी तरह वैध है। एक कार्यकारी ट्रस्टी द्वारा शिकायत दायर करना विधि सम्मत है।
आरोप गंभीर हैं और विदेशी संपत्ति का तर्क प्रारंभिक जांच नहीं रोक सकता।कोर्ट के आदेश के बाद अब मामला धारा 26 और 27 के तहत रजिस्ट्रार लोक न्यास के पास आगे बढ़ेगा। जरूरत पर विस्तृत सुनवाई के लिए जिला कोर्ट भेजा जा सकता है।
संबंधित समाचार

एमडी ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार:कॉस्मेटिक दुकान के नाम पर बेच रहा था नशा

जहरीले पानी से 21वीं मौत:एक और महिला ने तोड़ा दम

मेट्रो के 16 स्टेशन जल्द पूरे होंगे परीक्षण का कार्य अंतिम चरण में

अनिका को महू से मिली बड़ी मदद, अन्य जगह भी जाएगी:कई संस्थान आए आगे
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!