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20 मौतों ने खड़े किए सिस्टम पर सवाल: भागीरथपुरा जल त्रासदी; स्वच्छता के मॉडल में पसरा मातम

Khulasa First

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संवाददाता

10 जनवरी 2026, 5:13 pm
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20 मौतों ने खड़े किए सिस्टम पर सवाल

वोट, वादे और जहरीला पानी, कुचली गई गरीबों की जिंदगी

भागीरथपुरा में तैनात होंगे दो दर्जन प्रभारी अधिकारी

जल त्रासदी पर सरकार सख्त, लेकिन जवाब में असहजता

हाई कोर्ट में शपथ-पत्र से खुलासा- 4965 ट्यूबवेल का पानी पीने योग्य नहीं

विधायक-सांसद-पार्षद निधि से लगे ट्यूबवेल, जहर पहुंचा घर-घर

यह हादसा नहीं, सिस्टम का नरसंहार है, जब सब पता था, तब चुप्पी क्यों और दोषी कौन?

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दूषित पेयजल को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिकाकर्ता महेश गर्ग की ओर से प्रस्तुत जनहित याचिका (डब्ल्यूपी 2096/2015) में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा हुआ है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मेंटेनेंस डिवीजन नंबर-2 के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव द्वारा दाखिल शपथ-पत्र में स्वीकार किया गया है कि शहर के 4965 ट्यूबवेल, बोरिंग और हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं था, इसके बावजूद यही पानी भागीरथपुरा सहित पूरे शहर में सप्लाई किया जाता रहा।

पानी पर दो हलफनामे, दो आंकड़े
शपथ-पत्र में यह भी स्वीकार किया गया कि जल उपलब्धता को लेकर विभाग द्वारा अलग-अलग हलफनामों में 314.75 एमएलडी और 258.4 एमएलडी-दो भिन्न आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इन दोनों के बीच 56.71 एमएलडी का अंतर था, जिसे पहले स्पष्ट नहीं किया गया।

बाद में तर्क दिया गया कि यह अंतर ट्यूबवेल से मिलने वाले 70 एमएलडी पानी और उस पर दर्शाए गए 20 प्रतिशत वितरण नुकसान के कारण है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ट्यूबवेल का पानी पीने योग्य नहीं था तो उसे कुल जल आपूर्ति में क्यों शामिल किया गया?

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता तंत्र
शपथ-पत्र में यह भी कहा गया कि ये ट्यूबवेल पीएचई विभाग द्वारा नहीं, बल्कि विधायक, सांसद और पार्षद निधि से अन्य विभागों द्वारा स्थापित किए गए। यानी जहरीला पानी जनता तक पहुंचता रहा, लेकिन उसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं दिखा।

188 ट्यूबवेल चिह्नित, बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया... जवाब में कोर्ट को बताया गया कि सर्वे के दौरान अब तक 188 ऐसे ट्यूबवेल चिह्नित किए गए हैं, जो 1 से 15 घरों को पानी दे रहे थे। इनके बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा धर्मशालाओं में लगे ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन काटने की मंजूरी भी ली गई है।

फूड लैब रिपोर्ट : पानी ‘नॉट पोटेबल’
निगम की फूड लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी शपथ-पत्र के साथ संलग्न की गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि ट्यूबवेल, बोरिंग और हैंडपंप का पानी ‘नॉट पोटेबल’ यानी पीने योग्य नहीं है। इसके बावजूद वर्षों तक यही पानी आम जनता को सप्लाई होता रहा।

जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि शहरभर में फैले ट्यूबवेल और हैंडपंप की पहचान व उन पर कार्रवाई एक लंबी प्रक्रिया है और सर्वे अभी जारी है। लेकिन सवाल यह है कि जब रिपोर्ट में पानी को जहरीला बताया जा चुका था, तब तक जनता को सुरक्षित रखने के लिए क्या किया गया? हाई कोर्ट में पेश यह शपथ-पत्र प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि जब पानी जहरीला था, तब चुप्पी क्यों? और यदि सब कुछ पता था, तो जिम्मेदार कौन?

2015 की याचिका, 2026 की त्रासदी
गौरतलब है यह याचिका वर्ष 2015 में दायर की गई थी और उस पर निर्णय भी हो चुका है। उसी याचिका में निगम इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत यह शपथ-पत्र आज की भयावह स्थिति की ओर इशारा करता है। हालिया भागीरथपुरा जल त्रासदी ने इस पूरे मामले को फिर से केंद्र में ला दिया है, जहां गरीब और असहाय लोगों की जान गई। यह मामला अब केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि जवाबदेही और जवाब मांगने का बन चुका है। सवाल वही है- क्या यह सिर्फ हादसा था या एक लंबी प्रशासनिक विफलता का नतीजा?

भागीरथपुरा क्षेत्र आज अपनी स्वच्छता के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम की उस अनदेखी के लिए चर्चा में है जिसने 20 मासूम जिंदगियां निगल लीं। विडंबना यह है कि जिस वार्ड संख्या 11 को साल 2023 में इंदौर का ‘सबसे स्वच्छ वार्ड’ घोषित कर पुरस्कृत किया गया था, वहीं के रहवासी आज दूषित पानी पीने के कारण मल्टी-ऑर्गन फैल्योर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह त्रासदी उस समय और भी गंभीर हो जाती है, जब यह तथ्य सामने आता है कि इस खतरे की चेतावनी स्वयं क्षेत्रीय पार्षद द्वारा दो साल पहले ही महापौर को लिखित में दी गई थी।

अ गस्त 2025 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर आयोजित एक भव्य समारोह में भागीरथपुरा के विकास की जमकर सराहना की गई थी। उस मंच से महापौर ने पार्षद कमल वाघेला की तारीफों के पुल बांधते हुए उन्हें ‘प्रशंसा पत्र’ प्रदान किया था।

महापौर ने अन्य पार्षदों को नसीहत दी थी कि वे भागीरथपुरा जाकर विकास और स्वच्छता का मॉडल देखें। दावों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में यहां सड़कों, ड्रेनेज और पानी की लाइनों पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए। लेकिन आज वही ड्रेनेज लाइनें और पेयजल पाइपलाइनें मौत का जाल साबित हुई हैं, क्योंकि लैब रिपोर्ट में पानी के 60 में से 35 सैंपल फेल पाए गए हैं, जिनमें हैजा और टाइफाइड फैलाने वाला खतरनाक ‘फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया’ मिला है।

दो साल पहले दी गई चेतावनी को किया गया नजरअंदाज
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या नई नहीं थी। 29 फरवरी 2024 को पार्षद कमल वाघेला ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को पत्र लिखकर आगाह किया था कि क्षेत्र में गंदे पानी की वजह से लोग पीलिया और टाइफाइड का शिकार हो रहे हैं और एक 23 वर्षीय युवती की मौत भी हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, उस दौरान निरीक्षण में नर्मदा जल की पाइपलाइन और ड्रेनेज लाइन एक-दूसरे के बेहद करीब और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त मिली थीं। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसका खामियाजा आज पूरा क्षेत्र भुगत रहा है। स्वयं पार्षद वाघेला के घर का बोरिंग भी जांच में दूषित पाया गया है।

सियासी घमासान और प्रशासनिक खींचतान
इस त्रासदी ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महापौर पर तीखा हमला बोलते हुए उनके कार्यालय में मिली ‘नोट गिनने की मशीन’ पर सवाल उठाए हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि क्या नगर निगम में ठेकेदारों से नकद लेनदेन होता है और क्या भ्रष्टाचार के चलते ही विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता किया गया?

दूसरी ओर, चौतरफा घिरे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सारा दोष अधिकारियों पर मढ़ दिया है। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में महापौर ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि एमआईसी सदस्य और अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते और वे ऐसे सिस्टम में काम करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

जिम्मेदार कौन?
भागीरथपुरा की यह घटना इंदौर के स्वच्छता दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। जिस वार्ड को विकास का सर्टिफिकेट दिया गया, वहां बुनियादी पाइपलाइन के सुधार के लिए बजट होने के बावजूद काम क्यों नहीं हुआ? 20 मौतों के बाद अब शासन शुद्ध जल अभियान’ और अभियान विश्वास के जरिए डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस आपराधिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कोई कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह त्रासदी भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।

हृदयविदारक मौतों के विरोध में युवा कांग्रेस ने किया शांतिपूर्ण सत्याग्रह
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई हृदयविदारक मौतों के विरोध में युवा कांग्रेस ने इंदौर में शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित किया। यह सत्याग्रह पलासिया चौराहा, आई.लव.यू. इंदौर साइन बोर्ड के नीचे आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष यश लखन घनघोरिया जी की अगुवाई में आयोजित इस सत्याग्रह शहर युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अमित पटेल, संगठन प्रभारी चेतन चौधरी, प्रदेश सचिव वरेश पाल सिंह जादौन, युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव मोनिका मांदरे, विधानसभा अध्यक्ष बलवंत, दानिश खान, अमन सोनी, हर्ष डागरे सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी सत्याग्रह में मौजूद रहे और इस हादसे के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।

सत्याग्रह के दौरान प्रतिभागियों ने भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई मौतों पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की। युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह घटना पूरी तरह राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही का परिणाम है।

प्रदेश में ‘शुद्ध जल अभियान’ का शंखनाद आज
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से उपजी त्रासदी के बाद अब शासन-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं। इस गंभीर संकट से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने आज से प्रदेश में ‘शुद्ध जल अभियान’ शुरू करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय नीरज मंडलोई और इंदौर जिला प्रभारी व अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। स्पष्ट किया पेयजल शुद्धता शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भागीरथपुरा पर फोकस रहेगा।

नीरज मंडलोई ने सख्त निर्देश दिए किसी भी प्रभावित परिवार पर इलाज के खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए। कलेक्टर शिवम वर्मा को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने को कहा ताकि डिस्चार्ज के समय मरीजों से बिल वसूली न की जाए। अभियान विश्वास के तहत भागीरथपुरा को 20-25 जोन में बांटकर प्रत्येक 50 से 100 घरों पर एक प्रभारी अधिकारी तैनात रहेगा। यह टीम न केवल जल वितरण पर नजर रखेगी, बल्कि अस्पताल से लौटे मरीजों के स्वास्थ्य और उनकी दवाओं के सेवन की भी नियमित ट्रैकिंग करेगी।

ताजा आंकड़ों के अनुसार भागीरथपुरा में संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। शुक्रवार को ओपीडी में डायरिया के 15 नए मामले सामने आए, जिनमें से केवल दो को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी। कुल 414 मरीज भर्ती किए गए थे, जिनमें से 369 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

45 का उपचार जारी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय वे 11 मरीज हैं, जो आईसीयू में हैं, जिनमें से चार वेंटिलेटर पर मौत से लड़ रहे हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम 24 घंटे निगरानी कर रही है, क्योंकि इनमें किडनी, लिवर फेल्योर और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर जैसी जटिलताएं हैं। वेंटिलेटर पर मौजूद अधिकांश मरीज वृद्ध हैं और पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियों (कोमॉर्बिडिटी) से जूझ रहे थे।

मेन पाइप लाइन से जुड़े सार्वजनिक बोरवेल सील
भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नगर निगम आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया सभी 105 ओवरहेड टैंकों पर इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटरीकृत ‘वाटर एनालाइजर’ लगाए जाएंगे।

इसकी सीधी निगरानी एक आधुनिक कंट्रोल रूम से की जाएगी, जिससे पानी की गुणवत्ता में जरा भी बदलाव होने पर तत्काल अलर्ट जारी होगा साथ ही मेन पाइप लाइन से जुड़े सभी सरकारी बोरवेलों को तत्काल प्रभाव से सील करने के निर्देश दिए हैं ताकि भूमिगत जल प्रदूषण को रोका जा सके।

अच्छी खबर यह है भागीरथपुरा का ओवरहेड टैंक जांच में सुरक्षित पाया गया है और 13 जनवरी से इससे पुनः जलप्रदाय शुरू कर दिया जाएगा, हालांकि एहतियातन नागरिकों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।

प्रदेशव्यापी सतर्कता और व्यापक स्वास्थ्य जांच
एसीएस अनुपम राजन ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा इससे पूरे प्रदेश को गंभीर चेतावनी मिली है। शुद्ध जल अभियान के तहत प्रदेश के सभी जल स्रोतों की जांच की जाएगी और सीवेज व पेयजल लाइनों के मिलान को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर मरम्मत होगी।

भागीरथपुरा में जल्द बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवतियों और बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे सहित प्रशासन और नगर निगम के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षित पेयजल प्रदाय का संकल्प लिया।

मौतों के आंकड़ों पर सवाल बरकरार, मुआवजे की जानकारी देने से बचते दिखे अफसर
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और मौतों को लेकर सरकार भले ही आक्रामक मोड में नजर आ रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत और प्रशासनिक बयानों के बीच विरोधाभास अब भी सवाल खड़े कर रहा है। मौतों के आंकड़ों और प्रभावितों को दिए गए मुआवजे पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे की ओर इशारा करते दिखे, जिससे प्रशासन की पारदर्शिता पर संदेह और गहरा गया है।

भागीरथपुरा जल त्रासदी की गंभीरता को देखते हुए इंदौर के संभागायुक्त कार्यालय में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें मुख्यमंत्री के निज सचिव, एसीएस नीरज मंडलोई और प्रदेश के एसीएस अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में सरकार ने सख्त लहजे में कहा कि क्षेत्रीय महामारी को खत्म करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हालांकि बैठक के दौरान अधिकारियों की भाषा और फैसलों से ज्यादा ध्यान इस बात ने खींचा कि मौतों के वास्तविक आंकड़ों और मुआवजे की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने से प्रशासन बचता नजर आया। जब मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठे तो एसीएस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ‘कोई विसंगति नहीं है, सब क्लीयर है’ और मुआवजे की जानकारी के लिए कलेक्टर से पूछने की सलाह दे दी।

बैठक में यह स्वीकार किया गया कि भागीरथपुरा की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है और अब प्रशासन युद्ध स्तर पर काम करेगा। निगम द्वारा पानी की टंकी में मेन लाइन से जोड़े गए बोरवेल कनेक्शनों को तत्काल सील करने और दूषित स्रोतों की सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया गया। इसके बावजूद ओवरहेड टैंक की रिपोर्ट ठीक बताकर लोगों को सिर्फ पानी उबालकर पीने की सलाह देना प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े करता है। करीब छह हजार परिवारों को 20-22 सेक्टरों में बांटकर हर सेक्टर में एक अधिकारी तैनात किया गया है, जो घर-घर निगरानी करेगा। डायरिया के मामलों में कमी का दावा किया गया, लेकिन अस्पतालों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, जो हालात की गंभीरता खुद बयां करते हैं।

अधिकारियों ने शहरभर में जलस्रोतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, पाइपलाइन और सीवेज लाइन को लीकेज-फ्री करने व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की घोषणा जरूर की, लेकिन सवाल यह है कि यदि यह सब पहले किया गया होता, तो क्या भागीरथपुरा में इतनी बड़ी त्रासदी होती?

प्रदेश सरकार ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेशभर में शुद्ध पेयजल को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। लेकिन भागीरथपुरा के पीड़ितों के लिए यह घोषणा तब तक खोखली ही मानी जाएगी, जब तक मौतों, जिम्मेदारों और मुआवजे पर साफ और ठोस जवाब सामने नहीं आते।

भाजपा सरकार ने इंदौर को अमृत नहीं, जहर परोस दिया: कांग्रेस
तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय से लेकर वर्तमान महापौर पुष्यमित्र भार्गव तक इंदौर के विकास के नाम पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए। फिर आज इंदौर को एक गिलास साफ पानी क्यों नसीब नहीं हो रहा? शहर के नलों से जहर बह रहा है और जनता उसे पीने को मजबूर है। कांग्रेस मां नर्मदा का अमृत जल लेकर आई थी, भाजपा ने उसे जहर में बदल दिया। आज इंदौर बदहाली, बीमारी और भय के दौर से गुजर रहा है। इसकी सीधी जिम्मेदारी भाजपा की निकम्मी और भ्रष्ट सरकार की है।

यह बात शुक्रवार को इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी व राष्ट्रीय सचिव हरीश चौधरी एवं प्रदेश सह प्रभारी उषा नायडू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने गंभीर समसामयिक मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए व्यक्त किए।

पटवारी ने रियल टाइम वाटर ऑडिट लागू करने की मांग करते हुए कहा इंदौर नगर निगम की लापरवाही ने शहर को स्वास्थ्य संकट में धकेल दिया है। भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों और शासन की लापरवाही के मामले की जांच रिटायर्ड चीफ जस्टिस की निगरानी में होना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि दोषी अधिकारियों और महापौर पर गैर-इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाए।

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